{"_id":"68bc70c4d03277d39000813d","slug":"three-more-houses-of-grant-no-12-village-merged-into-sharda-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1008-155107-2025-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: ग्रंट नंबर 12 गांव के तीन और घर शारदा में विलीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: ग्रंट नंबर 12 गांव के तीन और घर शारदा में विलीन
Sat, 06 Sep 2025 11:05 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 06 Sep 2025 11:05 PM IST
विज्ञापन
निघासन। क्षेत्र के ग्रंट नंबर 12 गांव में शुक्रवार रात नीरज और शिवरतन के पक्के मकान समेत सज्जन की झोंपड़ी नदी की धारा में समा गई।
कटानग्रस्त ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें सिर्फ लंच पैकेट नहीं, बल्कि सुरक्षित रहने के लिए जगह और स्थायी आवास चाहिए। गांव की तेजाना ने भावुक होकर कहा कि उनका घर नदी में समा गया है। अब वह परिवार सहित खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि केवल लंच पैकेट से जीवन नहीं चलेगा।
गांव की ही प्यारी ने कहा कि पिछले साल जिनके घर कट गए थे, उन्हें आज तक जमीन और आवास नहीं दिया गया। अब प्रशासन केवल दिलासा देने आ रहा है। पूजा देवी ने बताया कि उनकी जमीन पहले ही नदी में समा चुकी है और अब घर भी बह गया। वह त्रिपाल डालकर किसी तरह गुजारा कर रही हैं। सावित्री देवी का आधा मकान कट चुका है और बाकी भी किसी भी वक्त ढह सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते नदी की धारा मोड़ने और बांध बनाने का काम किया गया होता, तो आज गांव का अस्तित्व खतरे में न पड़ता।
नदी के काटन के चलते गांव के लोग अपना जरूरी सामान ट्रैक्टर-ट्रॉली और बैलगाड़ियों में भरकर श्रीनगर बंधे पर सहित सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं। इधर, तहसीलदार मुकेश वर्मा ने बताया कि ग्रंट नंबर 12 में अब तक 800 लंच पैकेट और 400 राहत किट बांटी जा चुकी हैं। पूरे तहसील क्षेत्र में 5500 से ज्यादा लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कटानग्रस्त ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें सिर्फ लंच पैकेट नहीं, बल्कि सुरक्षित रहने के लिए जगह और स्थायी आवास चाहिए। गांव की तेजाना ने भावुक होकर कहा कि उनका घर नदी में समा गया है। अब वह परिवार सहित खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि केवल लंच पैकेट से जीवन नहीं चलेगा।
गांव की ही प्यारी ने कहा कि पिछले साल जिनके घर कट गए थे, उन्हें आज तक जमीन और आवास नहीं दिया गया। अब प्रशासन केवल दिलासा देने आ रहा है। पूजा देवी ने बताया कि उनकी जमीन पहले ही नदी में समा चुकी है और अब घर भी बह गया। वह त्रिपाल डालकर किसी तरह गुजारा कर रही हैं। सावित्री देवी का आधा मकान कट चुका है और बाकी भी किसी भी वक्त ढह सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते नदी की धारा मोड़ने और बांध बनाने का काम किया गया होता, तो आज गांव का अस्तित्व खतरे में न पड़ता।
विज्ञापन
नदी के काटन के चलते गांव के लोग अपना जरूरी सामान ट्रैक्टर-ट्रॉली और बैलगाड़ियों में भरकर श्रीनगर बंधे पर सहित सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं। इधर, तहसीलदार मुकेश वर्मा ने बताया कि ग्रंट नंबर 12 में अब तक 800 लंच पैकेट और 400 राहत किट बांटी जा चुकी हैं। पूरे तहसील क्षेत्र में 5500 से ज्यादा लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
विज्ञापन