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Lakhimpur Kheri News: ऑडियोलाॅजिस्ट नहीं, लखनऊ की दौड़ लगा रहे मूकबधिर
Wed, 11 Jun 2025 12:28 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 11 Jun 2025 12:28 AM IST
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में दिव्यांगता की जांच के लिए हड्डी, आंख, कान, गला से संबंधित जांचों की व्यवस्था है, लेकिन ऑडियोलॉजिस्ट न होने से मूकबधिरों को लखनऊ रेफर किया जा रहा है। इस कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जिला अस्पताल में प्रत्येक सोमवार को दिव्यांगों के प्रमाणपत्र बनाने के लिए कैंप लगाया जाता है। यहां हाथ, पैर व आंख के अलावा कई जांचें होती हैं। हालांकि, ऑडियोलॉजिस्ट की तैनाती व कुछ मशीनों की कमी होने से मूकबधिर मरीजों को जांच के लिए लखनऊ के केजीएमसी, राम मनोहर लोहिया सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। ऑडियोलॉजिस्ट के न होने से कैंप में आने वाले करीब 10-15 मरीजों को चिकित्सक लखनऊ रेफर कर देते हैं। अन्य मरीजों को भी जांच के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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बेरा मशीन नहीं, निजी में महंगी जांच
जिला अस्पताल में बेरा (ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पांस ऑडीओमेट्री) मशीन नहीं है। इससे मरीजों को जांच के लिए प्राइवेट पैथोलॉजी में महंगी जांच करानी पड़ती है या तो लखनऊ जाना पड़ता है। श्रवण बाधित दिव्यांगों का परीक्षण करने के लिए कुछ विशेष उपकरणों की जरूरत होती है। इसे बेरा जांच कहते हैं और इसमें उपयोग की जाने वाली मशीन को बेरा मशीन कहा जाता है। इससे पता चल सकता है कि किसी व्यक्ति तक आवाज की तरंंगे किस स्तर तक पहुंच रही हैं। इस रिपोर्ट के बिना श्रवण बाधित लोगों को सहायक उपकरण नहीं मिल पाते हैं।
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ऑडियोलॉजिस्ट की तैनाती को लेकर रिक्तियां निकाली गई हैं। तैनाती होते ही जिला अस्पताल में यह सुविधा शुरू हो जाएगी। इससे मरीजों को लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा।
-डॉ. आरके कोली, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में प्रत्येक सोमवार को दिव्यांगों के प्रमाणपत्र बनाने के लिए कैंप लगाया जाता है। यहां हाथ, पैर व आंख के अलावा कई जांचें होती हैं। हालांकि, ऑडियोलॉजिस्ट की तैनाती व कुछ मशीनों की कमी होने से मूकबधिर मरीजों को जांच के लिए लखनऊ के केजीएमसी, राम मनोहर लोहिया सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। ऑडियोलॉजिस्ट के न होने से कैंप में आने वाले करीब 10-15 मरीजों को चिकित्सक लखनऊ रेफर कर देते हैं। अन्य मरीजों को भी जांच के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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बेरा मशीन नहीं, निजी में महंगी जांच
जिला अस्पताल में बेरा (ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पांस ऑडीओमेट्री) मशीन नहीं है। इससे मरीजों को जांच के लिए प्राइवेट पैथोलॉजी में महंगी जांच करानी पड़ती है या तो लखनऊ जाना पड़ता है। श्रवण बाधित दिव्यांगों का परीक्षण करने के लिए कुछ विशेष उपकरणों की जरूरत होती है। इसे बेरा जांच कहते हैं और इसमें उपयोग की जाने वाली मशीन को बेरा मशीन कहा जाता है। इससे पता चल सकता है कि किसी व्यक्ति तक आवाज की तरंंगे किस स्तर तक पहुंच रही हैं। इस रिपोर्ट के बिना श्रवण बाधित लोगों को सहायक उपकरण नहीं मिल पाते हैं।
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ऑडियोलॉजिस्ट की तैनाती को लेकर रिक्तियां निकाली गई हैं। तैनाती होते ही जिला अस्पताल में यह सुविधा शुरू हो जाएगी। इससे मरीजों को लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा।
-डॉ. आरके कोली, सीएमएस, जिला अस्पताल