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Lakhimpur Kheri News: मझगईं में दरोगा पर रिश्वत लेने के आरोप का वायरल वीडियो जांच में नहीं मिला सही
Sun, 20 Sep 2026 11:31 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:31 PM IST
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मझगईं। थाने में तैनात एक दरोगा पर रिश्वत लेने के आरोप का वीडियो और शपथ पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शपथ पत्र में थाने से छोड़ने के एवज में एक लाख रुपये से शुरू होकर 25 हजार रुपये देने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, सीओ पलिया की जांच में आरोप गलत और निराधार पाए गए हैं।
वायरल शपथ पत्र और वीडियो के अनुसार, ग्राम खालेपुरवा चौरी निवासी मनोज कुमार ने बताया कि 14 अगस्त की रात वह दोस्त तीरथराम के साथ लालबोझी स्थित अपने मौसा गजराज के घर गया था। रात करीब नौ बजे लौटते समय नाथबाबा मंदिर के पास कुछ ग्रामीणों ने उन्हें चोर समझकर रोक लिया और डायल 112 को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस दोनों को पकड़कर थाने ले आई।
मनोज और तीरथराम का आरोप है कि थाने में तैनात दरोगा ने उन्हें छोड़ने के एवज में एक लाख रुपये मांगे। गरीबी का हवाला देने पर 50 हजार रुपये मांगे गए। बाद में 25 हजार रुपये पर बात तय हुई। दोनों के मुताबिक, किसी तरह 25 हजार रुपये जुटाकर दरोगा को दिए गए।
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वायरल वीडियो में आरोप लगाया गया है कि रकम लेने के बाद दरोगा ने दोनों को चेतावनी दी कि लेन-देन की जानकारी किसी को देने पर फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेज दिया जाएगा। मनोज के मुताबिक, डर के कारण वह शांत रहा और करीब एक महीने बाद सीओ पलिया को शपथ पत्र देकर शिकायत की।
सीओ पलिया जितेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया था। जांच कराने पर आरोप गलत और निराधार पाए गए हैं। मझगईं थाना प्रभारी सुनील मलिक ने भी घटना को गलत बताया है। संवाद
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वायरल शपथ पत्र और वीडियो के अनुसार, ग्राम खालेपुरवा चौरी निवासी मनोज कुमार ने बताया कि 14 अगस्त की रात वह दोस्त तीरथराम के साथ लालबोझी स्थित अपने मौसा गजराज के घर गया था। रात करीब नौ बजे लौटते समय नाथबाबा मंदिर के पास कुछ ग्रामीणों ने उन्हें चोर समझकर रोक लिया और डायल 112 को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस दोनों को पकड़कर थाने ले आई।
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मनोज और तीरथराम का आरोप है कि थाने में तैनात दरोगा ने उन्हें छोड़ने के एवज में एक लाख रुपये मांगे। गरीबी का हवाला देने पर 50 हजार रुपये मांगे गए। बाद में 25 हजार रुपये पर बात तय हुई। दोनों के मुताबिक, किसी तरह 25 हजार रुपये जुटाकर दरोगा को दिए गए।
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वायरल वीडियो में आरोप लगाया गया है कि रकम लेने के बाद दरोगा ने दोनों को चेतावनी दी कि लेन-देन की जानकारी किसी को देने पर फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेज दिया जाएगा। मनोज के मुताबिक, डर के कारण वह शांत रहा और करीब एक महीने बाद सीओ पलिया को शपथ पत्र देकर शिकायत की।
सीओ पलिया जितेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया था। जांच कराने पर आरोप गलत और निराधार पाए गए हैं। मझगईं थाना प्रभारी सुनील मलिक ने भी घटना को गलत बताया है। संवाद