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वन विभाग को लगातार गच्चा दे रहा बाघ जंगल में हुआ गुम
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में 18 दिनों से गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिए जंगल में घूम रहा बाघ वन विभाग की आफत बन गया है। दो दिनों तक लगातार लगाए गए कैमरों में इस बाघ की तस्वीर भी कैद हुई, पगचिन्ह मिलने के साथ ही वॉटरहोल में वह पानी पीता भी दिखाई दिया, लेकिन रविवार को उसका कोई सुराग नहीं लगा। उधर, बाघ की तलाश के लिए चलाए जा रहे सघन सर्च अभियान के चलते किशनपुर सेंक्चुरी का पर्यटन फिलहाल दो दिन के लिए एक बार फिर बंद कर दिया गया है।
बाघ को बेहोश कर उसके गले में फंसे रस्सी के फंदे को निकालने के लिए गठित तीन सदस्यीय ट्रैंक्युलाइज विशेषज्ञों की टीम पिछले 18 दिन से किशनपुर सेंक्चुरी में कैंप कर रही हैं। बावजूद इसके टीमें बाघ को घेरने और उसे निशाने पर लेने में कामयाब नहीं हो पा रही हैं। पिछले दो दिनों में बाघ की लोकेशन का पता लगाने में वन विभाग को आंशिक सफलता तो जरूर मिली, लेकिन उसका सटीक सुराग न मिलने से बाघ को बेहोश करने की सारी तैयारियां धरी रह गईं। वन विभाग के मुताबिक, बाघ को बेहोश करने के लिए हर संभव कवायद की जा रही है, लेकिन जंगल की भौगोलिक स्थिति लंबी ऊंची झाड़ियां, घना जंगल और घास के मैदान में बाघ के छिप जाने से उसे टैंक्युलाइज करने में दिक्कतें आ रही हैं।
रविवार को लगाए गए कैमरों में न तो बाघ की कोई तस्वीर कैद हुई और न ही उसके पगचिन्ह ही मिले हैं। सर्च अभियान का नेतृत्व कर रहे आईएफएस अधिकारी राजेश कुमार निगरानी टीमों के साथ जंगल के चप्पे-चप्पे में बाघ की तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पा रहा है। उधर, दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक संजय पाठक ने किशनपुर सेंक्चुरी का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने उस स्थान का भी निरीक्षण किया जहां पर लगे कैमरों में बाघ की तस्वीर कैद हुई थी। उन्होंने सर्च अभियान में जुटे अफसरों, निगरानी टीमों और वन कर्मियों से वार्ता की और बाघ की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास के निर्देश दिए।
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बाघ की लोकेशन ट्रैस करने के लिए जंगल में लगाए गए कैमरों में दो दिन तक लगातार उसकी तस्वीरें कैद हुईं हैं। रविवार को उसका फिर कोई सुराग नहीं लग पाया है। बावजूद इसके सर्च अभियान पूरी मुस्तैदी से चलाया जा रहा है। सघन सर्च अभियान के चलते सैलानियों के लिए किशनपुर सेंक्चुरी का पयर्टन दो दिनों के लिए बंद किया गया है।
- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
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बाघ को बेहोश कर उसके गले में फंसे रस्सी के फंदे को निकालने के लिए गठित तीन सदस्यीय ट्रैंक्युलाइज विशेषज्ञों की टीम पिछले 18 दिन से किशनपुर सेंक्चुरी में कैंप कर रही हैं। बावजूद इसके टीमें बाघ को घेरने और उसे निशाने पर लेने में कामयाब नहीं हो पा रही हैं। पिछले दो दिनों में बाघ की लोकेशन का पता लगाने में वन विभाग को आंशिक सफलता तो जरूर मिली, लेकिन उसका सटीक सुराग न मिलने से बाघ को बेहोश करने की सारी तैयारियां धरी रह गईं। वन विभाग के मुताबिक, बाघ को बेहोश करने के लिए हर संभव कवायद की जा रही है, लेकिन जंगल की भौगोलिक स्थिति लंबी ऊंची झाड़ियां, घना जंगल और घास के मैदान में बाघ के छिप जाने से उसे टैंक्युलाइज करने में दिक्कतें आ रही हैं।
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रविवार को लगाए गए कैमरों में न तो बाघ की कोई तस्वीर कैद हुई और न ही उसके पगचिन्ह ही मिले हैं। सर्च अभियान का नेतृत्व कर रहे आईएफएस अधिकारी राजेश कुमार निगरानी टीमों के साथ जंगल के चप्पे-चप्पे में बाघ की तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पा रहा है। उधर, दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक संजय पाठक ने किशनपुर सेंक्चुरी का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने उस स्थान का भी निरीक्षण किया जहां पर लगे कैमरों में बाघ की तस्वीर कैद हुई थी। उन्होंने सर्च अभियान में जुटे अफसरों, निगरानी टीमों और वन कर्मियों से वार्ता की और बाघ की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास के निर्देश दिए।
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बाघ की लोकेशन ट्रैस करने के लिए जंगल में लगाए गए कैमरों में दो दिन तक लगातार उसकी तस्वीरें कैद हुईं हैं। रविवार को उसका फिर कोई सुराग नहीं लग पाया है। बावजूद इसके सर्च अभियान पूरी मुस्तैदी से चलाया जा रहा है। सघन सर्च अभियान के चलते सैलानियों के लिए किशनपुर सेंक्चुरी का पयर्टन दो दिनों के लिए बंद किया गया है।
- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क