फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   The Sharda River continues to cut through the village, while department officials continue to measure their boundaries

Lakhimpur Kheri News: शारदा नदी काटती रही गांव, विभागों के अफसर नापते रहे अपनी सीमाएं

Thu, 01 Oct 2026 11:58 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Thu, 01 Oct 2026 11:58 PM IST
विज्ञापन
The Sharda River continues to cut through the village, while department officials continue to measure their boundaries
बेचू लाल
लखीमपुर खीरी। बिजुआ ब्लॉक के रूरा सुल्तानपुर गांव में शारदा नदी लगातार गांव की जमीन काट रही है, लेकिन बचाव की जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है। बुधवार सुबह प्राचीन देवी माता मंदिर नदी में समा गया। इससे पहले वीरबाबा स्थान भी नदी की धारा में समा चुका है।
विज्ञापन

ग्रामीणों के मुताबिक, सात से आठ मकान और करीब 180 एकड़ जमीन भी कटान की भेंट चढ़ चुकी है। गांव पर संकट बढ़ता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग क्षेत्राधिकार को लेकर आमने-सामने हैं। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता करन पाल गंगवार ने कहा कि रूरा सुल्तानपुर उनके क्षेत्र में नहीं आता और बाढ़ खंड से जानकारी लेने के लिए कहा। वहीं, बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने भी गांव को अपने क्षेत्र में नहीं बताया। उनका कहना है कि यह हिस्सा डूब क्षेत्र में आता है और सिंचाई विभाग के क्षेत्र में है।
विज्ञापन

ग्रामीणों का कहना है कि नुकसान के बाद मुआवजा तो मिलता रहा, लेकिन गांव को बचाने के लिए कभी प्रभावी बचाव कार्य नहीं कराया गया। उनका आरोप है कि समय रहते कटानरोधी काम शुरू होता तो मंदिर, मकान और खेत बचाए जा सकते थे। बुधवार को मंदिर कटने के बाद राजस्व टीम गांव पहुंची थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट में क्या कहा गया, इसकी जानकारी नहीं हो सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन

सरकारी नियम के अनुसार, रूरा सुल्तानपुर डूब क्षेत्र में आता है और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। इसके बावजूद विभाग गांव को अपने क्षेत्र में होने से इन्कार कर रहा है। आपदा विभाग के अनुसार, डूब क्षेत्र में कोई भी निर्माण व बचाव कार्य नहीं होता है। इसी वजह से वहां अभी तक कोई कार्य नहीं कराया गया। विभाग के अनुसार डूब क्षेत्र में बचाव कार्य कराने की अपेक्षा आबादी को दूसरी जगह सुरक्षित बसाने में कम खर्च आता है।
गोला एसडीएम युगांतर त्रिपाठी ने बताया कि कटान की जद में आकर जिन ग्रामीणों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके रहने के लिए प्रशासन ने स्थान उपलब्ध कराया है। हालांकि, प्रभावित ग्रामीण फिलहाल अपने रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

---------------
तीन गांव पहले ही शारदा की चपेट में
भीरा। रूरा सुल्तानपुर के आसपास के तीन गांव पिछले तीन साल में शारदा नदी की चपेट में आ चुके हैं। नयापुरवा और चकपुरवा पिछले साल नदी में समा गए थे, जबकि कुरियाना पुरवा भी पहले कटान की भेंट चढ़ चुका है। ग्रामीणों ने कहा कि वे हर वर्ष लिखित में बचाव कार्य की मांग करते हैं, लेकिन आज तक कुछ नहीं हो सका। अब रूरा सुल्तानपुर और उसके मजरा तनसुख पुरवा पर संकट है। तनसुख पुरवा में दो हजार से अधिक वोटर और करीब पांच हजार की आबादी बताई गई है। संवाद
--------

वीरबाबा का मंदिर बहुत पुराना था। नदी में समाने से पहले यहां कोई बचाव कार्य नहीं कराया गया। समय रहते काम होता तो शायद मंदिर नहीं डूबता।
-बेचू लाल, निवासी कुरियाना
--------------

गांव में दो प्राचीन मंदिरों के साथ सात से आठ मकान कट चुके हैं। सैकड़ों एकड़ जमीन भी नदी में समा चुकी है और कटान लगातार जारी है।
-राजकमल, निवासी कुरियाना
---------------
मामले की जानकारी कराई जाएगी। बाढ़ खंड और सिंचाई विभाग से पूछा जाएगा। जिसकी भी जिम्मेदारी तय होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम

बेचू लाल

बेचू लाल

बेचू लाल

बेचू लाल

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed