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शहर में बिजली की आवाजाही बनी मुसीबत
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तकनीकी दिक्कतों के कारण शहर में घंटों गायब रहती है बिजली
लखीमपुर खीरी। बिजली की आवाजाही लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। इसके पीछे बड़ा कारण पुराने ट्रांसफार्मर और जर्जर विद्युत उपकरण हैं, जो आए दिन फेल हो जाते हैं। संसाधनों के अभाव में सरकार का 24 घंटे बिजली सप्लाई का दावा हवाई साबित हो रहा है। वहीं देहात क्षेत्रों के हालात और भी खराब है। उन्हें 18 घंटे के बजाय मात्र आठ से दस घंटे ही सप्लाई मिल पा रही है।
शहर में बिजली आपूर्ति के लिए चार विद्युत उपकेंद्र हैं। इनमें से अधिकांश उपकरण काफी पुराने हैं और जर्जर हो चुके हैं। इनमें आए दिन कोई न कोई तकनीकी खराबी आती ही रहती है। शहर में 630 केवी से लेकर 25 केवी तक के करीब 1100 ट्रांसफार्मर लगे हैं। इनमें से अधिकांश ट्रांसफार्मर बेहद पुराने हैं। रोज ही किसी न किसी इलाके के ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाएं आम हैं। गर्मी बढ़ने पर तो एक दिन में कई कई ट्रांसफार्मर फुंक जाते हैं। कभी कभी इनकी मरम्मत में पूरा पूरा दिन लग जाता है। बरसात के मौसम की चिपचिपी गर्मी में लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
शुक्रवार को शाहपुरा कोठी के पास बिजली का तार टूट गया। इससे उस क्षेत्र की बिजली कट गई। तार जोड़ने में बिजली विभाग को कई घंटे लग गए। कई घंटे बाद जब बिजली आपूर्ति बहाल हुई तो वोल्टेज इतना कम था कि पंखे रेंगते नजर आए। दोपहर बाद फिर काफी देर के लिए बिजली गायब हुई। शुक्रवार को बरसात की चिपचिपी गर्मी में लोग बेहाल हो उठे। कुछ ऐसा ही हाल कई अन्य मोहल्लों का भी रहा।
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गर्मी के मौसम में बिजली की खपत एकाएक बढ़ जाता है। इसका लोड ट्रांसफार्मरों पर पड़ता है। नतीजा यह होता है कि ट्रांसफार्मरों के फुंकने का सिलसिला शुरू हो जाता है। ट्रांसफार्मर की मरम्मत के लिए शहर में गढ़ी रोड पर एकमात्र वर्कशाप है। गर्मी के दिनों इस वर्क शाप पर भी काम का लोड बढ़ जाता है। जिससे आए दिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हाल यह है कि गर्मी के मौसम में जब सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत होती है। तभी लोगों को सबसे ज्यादा बिजली किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने से ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त लोड पड़ता है जिसके कारण ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाएं हो रही हैं। ट्रांसफार्मरों की त्वरित मरम्मत कर जल्दी से जल्दी बिजली आपूर्ति बहाल करने का प्रयास रहता है। तकनीकी दिक्कतों के कारण असुविधा कम से कम हो इसकी कोशिश की जा रही है। - अनुराग शर्मा, एसडीओ सिटी
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लखीमपुर खीरी। बिजली की आवाजाही लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। इसके पीछे बड़ा कारण पुराने ट्रांसफार्मर और जर्जर विद्युत उपकरण हैं, जो आए दिन फेल हो जाते हैं। संसाधनों के अभाव में सरकार का 24 घंटे बिजली सप्लाई का दावा हवाई साबित हो रहा है। वहीं देहात क्षेत्रों के हालात और भी खराब है। उन्हें 18 घंटे के बजाय मात्र आठ से दस घंटे ही सप्लाई मिल पा रही है।
शहर में बिजली आपूर्ति के लिए चार विद्युत उपकेंद्र हैं। इनमें से अधिकांश उपकरण काफी पुराने हैं और जर्जर हो चुके हैं। इनमें आए दिन कोई न कोई तकनीकी खराबी आती ही रहती है। शहर में 630 केवी से लेकर 25 केवी तक के करीब 1100 ट्रांसफार्मर लगे हैं। इनमें से अधिकांश ट्रांसफार्मर बेहद पुराने हैं। रोज ही किसी न किसी इलाके के ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाएं आम हैं। गर्मी बढ़ने पर तो एक दिन में कई कई ट्रांसफार्मर फुंक जाते हैं। कभी कभी इनकी मरम्मत में पूरा पूरा दिन लग जाता है। बरसात के मौसम की चिपचिपी गर्मी में लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
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शुक्रवार को शाहपुरा कोठी के पास बिजली का तार टूट गया। इससे उस क्षेत्र की बिजली कट गई। तार जोड़ने में बिजली विभाग को कई घंटे लग गए। कई घंटे बाद जब बिजली आपूर्ति बहाल हुई तो वोल्टेज इतना कम था कि पंखे रेंगते नजर आए। दोपहर बाद फिर काफी देर के लिए बिजली गायब हुई। शुक्रवार को बरसात की चिपचिपी गर्मी में लोग बेहाल हो उठे। कुछ ऐसा ही हाल कई अन्य मोहल्लों का भी रहा।
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गर्मी के मौसम में बिजली की खपत एकाएक बढ़ जाता है। इसका लोड ट्रांसफार्मरों पर पड़ता है। नतीजा यह होता है कि ट्रांसफार्मरों के फुंकने का सिलसिला शुरू हो जाता है। ट्रांसफार्मर की मरम्मत के लिए शहर में गढ़ी रोड पर एकमात्र वर्कशाप है। गर्मी के दिनों इस वर्क शाप पर भी काम का लोड बढ़ जाता है। जिससे आए दिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हाल यह है कि गर्मी के मौसम में जब सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत होती है। तभी लोगों को सबसे ज्यादा बिजली किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने से ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त लोड पड़ता है जिसके कारण ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाएं हो रही हैं। ट्रांसफार्मरों की त्वरित मरम्मत कर जल्दी से जल्दी बिजली आपूर्ति बहाल करने का प्रयास रहता है। तकनीकी दिक्कतों के कारण असुविधा कम से कम हो इसकी कोशिश की जा रही है। - अनुराग शर्मा, एसडीओ सिटी