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तीन कृषि कानूनों की वापसी के एलान पर आंदोलन की तपिश अभी बाकी

Sun, 21 Nov 2021 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 12:48 AM IST
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The heat of the movement is yet to come on the announcement of the withdrawal of three agricultural laws
तिकुनिया गुरुद्वारा में बैठक करते भारतीय किसान यूनियन संयुक्त मोर्चा के किसान।
कल 22 नवंबर को लखनऊ में होने वाली किसान महापंचायत के लिए भाकियू ने लगाया जोर
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लखीमपुर खीरी। किसानों के विरोध के बाद सरकार ने तीन कृषि कानून की वापसी का एलान भले ही कर दिया हो, लेकिन किसान आंदोलन की तपिश जिले में अब भी बाकी है। कल लखनऊ में होने वाली किसान महापंचायत को लेकर किसान संगठनों ने जोर आजमाइश शुरू कर दी है।
भाकियू टिकैत गुट का कहना है कि करीब दस हजार लोग जिले से लखनऊ में होने वाली पंचायत में शामिल होने जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के हर मुद्दे को लड़ने के लिए भाकियू आगे आएगी। इन्हीं सब मांगों के लिए किसान कल 22 नवंबर को लखनऊ जाने की तैयारियों में जुटे हुए हैं, जबकि 26 नवंबर को आंदोलन के एक साल पूरा होने पर किसान दिल्ली बॉर्डर पर भी पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।
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सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला बहुत पहले करना चाहिये था। तमाम किसान साथी मारे गए हैं। तमाम किसानों के ऊपर फर्जी मुकदमे भी लिखे गए हैं। सरकार को मारे गए किसानों को मुआवजा देना चाहिए और किसानों के ऊपर लिखे गए फर्जी मुकदमे वापस होने चाहिए। सरकार को किसान आयोग का गठन जल्द से जल्द किया जाना चाहिए।
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-श्यामू शुक्ला, प्रदेश अध्यक्ष, कार्यवाहक किसान यूनियन अवध
जब तक सरकार एमएसपी की गारंटी नहीं देती धरना प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा और संघर्ष चलता रहेगा। 22 तारीख को हम लोग लखनऊ में महापंचायत करेंगे, जिसमें किसानों का बढ़ा बिजली बिल, फर्जी मुकदमे खत्म करने की मांग होगी। जब तक किसानों की संपूर्ण समस्या का समाधान नहीं हो जाता संघर्ष जारी रहेगा।
- अनूप अनूप सिसौैदिया, जिलाध्यक्ष, किसान यूनियन स्वराज
सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लिया है। यह किसान संगठन की जीत है। अब सरकार शहीद हुए किसानों को शहीद का दर्जा दे और उनको मुआवजा दे। एमएसपी की गारंटी भी सरकार को देनी चाहिए। तभी आंदोलन थमेगा।
-रामसनेही गुप्ता, प्रदेश सचिव, भारतीय किसान यूनियन स्वराज
किसानों पर रिपोर्ट, मुआवजे समेत कई मुद्दे अभी बाकी
लखीमपुर खीरी। भाकियू टिकैत गुट के यूपी उत्तराखंड (तराई क्षेत्र) प्रदेश उपाध्यक्ष अमनदीप संधू ने बताया कि अभी तो सरकार ने सिर्फ तीन कृषि कानून वापस लेने का एलान किया है। पर उन्हें एमएसपी की गारंटी का कानून चाहिये। किसान आंदोलन के दौरान कई किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई हैं, उन्हें सरकार को वापस लेना होगा। इसके अलावा तिकुनिया कांड के घायल किसानों को मुआवजा तक नहीं दिया गया है। किसानों से जुड़े अभी भी तमाम मुद्दे बाकी हैं, जिनका समाधान होना है। इसलिये आंदोलन जारी रहेगा। बताया कि अकेले लखीमपुर खीरी से कल लखनऊ में होने वाली किसान महापंचायत में 10 हजार किसानों को ले जाने की तैयारी है, जबकि इसके बाद 26 नवंबर को किसान दिल्ली बॉर्डर के लिये कूच करेंगे। संवाद

किसान आंदोलन में पांच बसें जाएंगी लखनऊ
तिकुनियां। कस्बा स्थित गुरुद्वारा में संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं की एक बैठक हुई। बैठक में 22 नवंबर को लखनऊ में होने वाली पंचायत में भाग लेने के लिए विचार-विमर्श किया गया। तय हुआ कि यहां से पांच बसों में किसान लखनऊ जाएंगे। इसके अलावा अन्य छोटी गाड़ियां भी जाएंगी। बैठक की अध्यक्षता किसान नेता गुरदेव सिंह कक्कड़ ने की। इस मौके पर तहसील इकाई के कार्यकर्ता मौजूद रहे। किसान नेता राम सिंह ढिल्लो ने कहा प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए हैं। यह किसानों की आधी जीत है। हमारा आंदोलन अभी जारी रहेगा। 22 नवंबर को लखनऊ में होने वाली किसान महापंचायत में आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। एमएसपी सहित अन्य मुद्दों पर लड़ाई जारी रहेगी। बैठक में जयमल सिंह, रूप सिंह, गुरसेवक सिंह, लवजीत सिंह समेत गंगानगर, रामनगर, खैरटिया, निघासन, सिंगाही आदि किसान मौजूद रहे। संवाद
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