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Lakhimpur Kheri News: गोशालाओं में पशुओं के आहार का बजट भारी, जमीनी इंतजाम हल्के

Fri, 02 Oct 2026 12:08 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Fri, 02 Oct 2026 12:08 AM IST
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The budget for animal feed in cow shelters is huge, but the ground arrangements are light
अस्थाई गोआश्रय केंद्र मकसोहा में खुले में बैठे गोवंशीय पशु। संवाद
लखीमपुर खीरी। गोवंश के पेट भरने के लिए सरकारी खजाने से रोज 15.93 लाख रुपये निकल रहे हैं, लेकिन गोशालाओं में इंतजाम की तस्वीर इससे उलट है। कहीं हरा चारा नदारद है तो कहीं भूसा कम है।
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बारिश में कहीं गोशालाओं के परिसर डूबे हैं तो कहीं रास्ते बंद हैं। एक गोशाला में बिजली तक नहीं है। यह स्थिति तब है, जब जिले की 137 गोशालाओं में 31,865 से अधिक गोवंश संरक्षित हैं और प्रशासन भूसा-हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रहा है।
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शासन ने प्रति पशु प्रतिदिन 50 रुपये आहार के लिए तय किए हैं। इसमें तीन किलो भूसा, पांच किलो हरा चारा और आधा किलो दाना दिया जाना है। इस हिसाब से गोवंश के आहार पर रोज करीब 15.93 लाख रुपये खर्च होते हैं। बृहस्पतिवार को की गई पड़ताल में कई गोशालाओं में इस व्यवस्था की जमीनी तस्वीर अलग मिली।
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मझगईं में अस्थायी गोशाला में 499 पशु हैं। यहां 120 क्विंटल भूसा और चार टिन शेड हैं, लेकिन हरा चारा उपलब्ध नहीं है। हरे चारे के विकल्प के लिए साइलेज की मांग की गई है। बीमारी के चलते दो माह में 10 पशुओं की मौत हुई है। दो पशु बीमार हैं।
ग्राम पंचायत तेंदुआ की लोहन्ना स्थित स्थायी गोशाला में 279 पशु हैं। यहां टिनशेड और पानी की व्यवस्था है। एक ट्रॉली भूसा और हरे चारे की व्यवस्था होने का दावा है। हालांकि, कठिना नदी के किनारे होने से बारिश में गोशाला में जलभराव हो गया। मोहम्मदी की मियांपुर कॉलोनी की गोशाला में 226 गोवंश हैं। नदी किनारे होने से यहां भी जलभराव रहता है। चारा नाव से पहुंचाना पड़ता है। गोशाला में तीन एकड़ में नैपियर घास खड़ी है। निघासन क्षेत्र की 13 गोशालाओं में 4,279 गोवंश हैं। संवाद
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1.65 करोड़ की गोशाला में बिजली तक नहीं
गोला गोकर्णनाथ। लंदनपुर ग्राम पंचायत के प्रसादपुर में करीब 1.65 करोड़ रुपये की लागत से बनी बृहद गोशाला में कच्चे रास्ते से लेकर परिसर तक पानी भरा है। बिजली कनेक्शन नहीं होने से रात में अंधेरा रहता है। यहां 262 गोवंश हैं। परिसर के गड्ढों और नालियों में गिरने से कई पशुओं के चोटिल होने की बात भी बताई गई। करीब ढाई एकड़ में बनी गोशाला में तीन शेड हैं। जलभराव के कारण आने-जाने में भी परेशानी है। संवाद
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बारिश में दो गोशालाएं बंद, 294 गोवंश शिफ्ट
पसगवां। मठबाल देवता और सुनौरा की अस्थायी गोशालाओं में भारी बारिश और जलभराव के कारण संचालन बंद करना पड़ा। मठबाल देवता की गोशाला में नहर का पानी पहुंच गया था। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि 95 गोवंश ढखौरा और 93 बाईकुआं गोशाला भेजे गए। सुनौरा के 106 गोवंश को सेमराजानीपुर शिफ्ट किया गया। संवाद
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छह माह में 848 गोवंश की मौत
गोशालाओं में एक अप्रैल से 30 सितंबर तक करीब 848 गोवंश की मौत हो चुकी है। इसमें बीमार और सड़क हादसों में घायल पशुओं की मौत का आंकड़ा शामिल है। पशुओं की मौत के बाद निस्तारण से पहले चिकित्सकीय टीम निरीक्षण करती है। इसके बाद नियमानुसार गड्ढा खोदकर नमक आदि के साथ दफनाया जाता है।
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क्षमता से अधिक गोवंश, जलभराव ने बढ़ाई परेशानी
महेवागंज। 400 क्षमता वाली अस्थायी गोआश्रय मकसोहा में 430 गोवंश हैं। खेतों में जलभराव के कारण हरे चारे की दिक्कत सामने आई। बारिश में गोशाला में भी जलभराव हुआ, जिसे पंप से पानी निकालकर दूर किया गया। फूलबेहड़ पशु चिकित्सक डॉ. जितेंद्र त्रिपाठी के जिम्मे उपचार आदि है। खंभारखेड़ा में नगरपालिका के अधीन गोआश्रय केंद्र में करीब 300 गोवंश हैं। जलभराव होने पर यहां भी पंप से पानी निकलवाया गया। संवाद
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42 की जगह 17 पशु चिकित्सक
जिले में 42 पशु चिकित्सक होने चाहिए, लेकिन लंबे समय से मात्र 17 से काम चलाया जा रहा है। कम डॉक्टर होने से पशुओं के इलाज में दिक्कत आती है। हालांकि विभाग का दावा है कि पशुओं की नियमित जांच और इलाज होता रहता है।


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बारिश के चलते गोशालाओं में जलभराव से दिक्कतें हुई थीं। पंप से पानी निकाला गया है। हरे चारे और भूसे के लिए फर्में नामित हैं। कहीं चारा या भूसा कम है तो संबंधितों से जवाब तलब किया जाएगा। प्रति पशु प्रतिदिन 50 रुपये शासन से तय हैं। इसमें तीन किलो भूसा, पांच किलो हरा चारा और आधा किलो दाना दिया जाता है।
-डॉ. दिनेश कुमार सचान, सीवीओ

अस्थाई गोआश्रय केंद्र मकसोहा में खुले में बैठे गोवंशीय पशु। संवाद

अस्थाई गोआश्रय केंद्र मकसोहा में खुले में बैठे गोवंशीय पशु। संवाद

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