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Lakhimpur Kheri News: थारू महिलाओं को हस्तशिल्प में हुनर निखारने का मिलेगा मौका
Tue, 18 Aug 2026 11:19 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 18 Aug 2026 11:19 PM IST
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पलिया। थारू जनजाति की महिलाओं को हस्तशिल्प कला में प्रोत्साहित करने और उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गोरखपुर एनवायरनमेंटल एक्शन ग्रुप की ओर से परिचयात्मक भ्रमण का आयोजन किया गया। मंगलवार को दुधवा टाइगर रिजर्व मुख्यालय से 15 गांवों की 15 महिला सदस्यों का दल सिरोही, मुजफ्फरनगर के लिए रवाना हुआ।
इसमें सोनहा, बंदरभरारी, ध्यानपुर, सिकलपुरा, तारभूषी, चंदनचौकी, रामनगर, पुरैना, बेलडांडी, धुसकिया, पचपेड़ा, बरबटा, मुड़नोचनी, पोया और मौरा गांव की एक-एक महिला शामिल हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग के उपनिदेशक जगदीश आर. ने बताया कि भ्रमण के दौरान हस्तशिल्प उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्धता से जुड़े कार्यों को बारीकी से समझें। उन्होंने कहा कि यहां से मिली व्यावहारिक जानकारी को अपने काम में शामिल कर उत्पादों को और आकर्षक बनाया जा सकता है।
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21 अगस्त को लौटेगा दल
भ्रमण के दौरान पूर्व जायका परियोजना में कार्य कर चुकीं शिवकुमारी और डिजाइनर आरती भी महिलाओं के साथ रहेंगी। मंगलवार से शुरू हुआ यह भ्रमण 21 अगस्त को समाप्त होगा। आयोजकों के अनुसार पहल का उद्देश्य थारू महिलाओं के पारंपरिक हस्तशिल्प को कौशल, डिजाइन और गुणवत्ता के स्तर पर मजबूत करना है। इससे उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने के साथ महिलाओं की आय बढ़ाने और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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इसमें सोनहा, बंदरभरारी, ध्यानपुर, सिकलपुरा, तारभूषी, चंदनचौकी, रामनगर, पुरैना, बेलडांडी, धुसकिया, पचपेड़ा, बरबटा, मुड़नोचनी, पोया और मौरा गांव की एक-एक महिला शामिल हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग के उपनिदेशक जगदीश आर. ने बताया कि भ्रमण के दौरान हस्तशिल्प उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्धता से जुड़े कार्यों को बारीकी से समझें। उन्होंने कहा कि यहां से मिली व्यावहारिक जानकारी को अपने काम में शामिल कर उत्पादों को और आकर्षक बनाया जा सकता है।
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21 अगस्त को लौटेगा दल
भ्रमण के दौरान पूर्व जायका परियोजना में कार्य कर चुकीं शिवकुमारी और डिजाइनर आरती भी महिलाओं के साथ रहेंगी। मंगलवार से शुरू हुआ यह भ्रमण 21 अगस्त को समाप्त होगा। आयोजकों के अनुसार पहल का उद्देश्य थारू महिलाओं के पारंपरिक हस्तशिल्प को कौशल, डिजाइन और गुणवत्ता के स्तर पर मजबूत करना है। इससे उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने के साथ महिलाओं की आय बढ़ाने और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।