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Lakhimpur Kheri News: जनजाति संस्कृति को करीब से दिखाएगा थारू शिल्पग्राम

Wed, 19 Jul 2023 12:32 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 19 Jul 2023 12:32 AM IST
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Tharu Shilpgram will show tribal culture closely
चंदनचौकी में बना थारू ​शिल्पग्राम।
पलियाकलां। आदिवासी जनजाति थारू क्षेत्र की संस्कृति, उनके व्यंजन और उनके पहनावे को करीब से दिखाने के लिए थारू शिल्पग्राम चंदनचौकी में बनाया गया है। इसमें दुधवा नेशनल पार्क आने वाले सैलानियों के लिए थारू हट भी बनाए गए हैं। कई प्रदेशों में जाकर वहां की आदिवासी जनजाति में बने शिल्पग्रामों को देखकर इसमें वही रंग देकर इसको खोलने की तैयारी हो रही है।
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दुधवा नेशनल पार्क में हर साल देश-विदेश से सैकड़ों की संख्या में सैलानी यहां आते हैं, जो पार्क का भ्रमण तो करते ही हैं। साथ ही पार्क के जंगलों में बसी थारू जनजाति को करीब से जानने के लिए उत्सुक भी दिखाई देते हैं। ऐसे में परियोजना अधिकारी यूके सिंह ने थारू शिल्पग्राम का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसकी 2019 में मंजूरी होने के बाद चंदनचौकी में थारू शिल्पग्राम के भवन को बनाने का कार्य शुरू हुआ। जो सन् 2020-21 में पूरा हो गया जिसके लिए कुल 1.60 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित हुआ था।
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अब यहां भवन, थारूहट, म्यूजियम आदि बनकर पूरी तरह से तैयार हो गया है। परियोजना अधिकारी यूके सिंह ने बताया कि थारू जनजाति के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी बाहर से आने वाले सैलानियों को हो इसके लिए यहां एक म्यूजियम बनाया गया है। इसमें थारू उत्पादों, हस्तशिल्प समेत अन्य हैंडिक्राफ्ट से संबंधित चीजें रखीं जाएंगी और उनके बारे में जानकारी भी सैलानियों को दी जाएगी। चार थारूहट बनाए गए हैं, जिनमें सैलानी रात में रुक सकेंगे। ऐसे में स्टे करने वाले सैलानियों के लिए थारू नृत्य की भी व्यवस्था है।
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इसके लिए अलग से नृत्य का कमरा बनाया गया है। एक किचन है, जिसमें थारू समाज के व्यंजनों को बनाकर सैलानियों को परोसा जाएगा। जबकि थारू उत्पादों की बिक्री के लिए यहां पर 10 दुकानें भी बनवाईं गईं है। इनमें थारू उत्पादों की बिक्री होगी और उनके उत्पादों की धमक महानगरों व विदेशों तक होगी। नवंबर में दुधवा पार्क के नवीन पर्यटन सत्र से पहले ही इस थारू शिल्पग्राम को खोलने की इस साल ही तैयारी और प्रयास किए जा रहे हैं।


बाहर से भी स्टडी कर यहां दिया जा है अलग रूप

आंध्र प्रदेश व तेलंगाना आदि जाकर वहां से थारू व आदिवासी समुदाय के थारू शिल्पग्रामों को देखकर उसके हिसाब से चंदनचौकी में बने शिल्पग्राम को भी अलग रूप दिया जा रहा है। परियोजना अधिकारी यूके सिंह ने बताया कि वह खुद अलग-अलग प्रदेशों में इस जनजाति के लोग जहां है वहां जाकर देख रहे हैं और थारू शिल्पग्राम को और बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं।


साज-सज्जा व पेंटिंग आदि का काम है बाकी

थारू शिल्पग्राम में अभी साज-सज्जा, फर्नीचर समेत पेंटिंग आदि काम बाकी रह गया है। यहां आधुनिक पेंटिंग कराई जानी है, जिससे यह लगे कि बाहर से आए हुए सैलानी थारू कल्चर में आए हैं और उन्हीं को दर्शाती यहां पर पेंटिंग बनाई जानी है।



शिल्पकार अब शिल्पग्राम को देंगे बेहतर रूप

थारू शिल्पग्राम को बेहतर रूप देने के लिए शिल्पकार बुलाए गए हैं जो यहां आकर इस शिल्पग्राम को बेहतर रूप देंगे और थारू गांवों की तरह इनकी परंपरा को दर्शाते हुए इसको बेहतर बनाने का कार्य करेंगे।

चंदनचौकी में बना थारू शिल्पग्राम।

चंदनचौकी में बना थारू शिल्पग्राम।

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