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Lakhimpur Kheri News: त्वचा में खिंचाव और अंगुलियों में सूजन है स्क्लेरोडर्मा बीमारी के लक्षण
Sat, 26 Jul 2025 11:37 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 26 Jul 2025 11:37 PM IST
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लखीमपुर खीरी। त्वचा से संबंधित स्क्लेरोडर्मा नाम की गंभीर बीमारी के मरीज अब जिले में भी सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल में इस रोग से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। त्वचा में खिंचाव व अंगुलियों में सूजन इसके लक्षण हैं। चिकित्सकों कहना है कि लापरवाही बरतने पर बीमारी घातक रूप ले सकती है।
ओपीडी में त्वचा रोग के करीब 150-200 मरीज प्रतिदिन पहुंचते हैं। इसमें तीन-चार मरीज स्क्लेरोडर्मा के होते हैं। जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम ने बताया कि यह बीमारी पूर्व में बहुत कम लोगों को होती थी। अचानक से मरीजों की संख्या बढ़ी है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह रोग अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
दवा और फिजियोथेरेपी से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। डाॅ. दीपेंद्र ने बताया कि स्क्लेरोडर्मा एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर की इम्यून प्रणाली खुद ही त्वचा और अंगों पर हमला करने लगती है। इससे त्वचा सख्त और कसी हुई हो जाती है। यह बीमारी केवल त्वचा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि फेफड़े, हृदय, पाचन तंत्र और जोड़ों को भी प्रभावित कर सकती है।
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सांस लेने में हो रही थी तकलीफ
-शहर के 35 वर्षीय एक युवक ने बताया कि इस बीमारी के बारे में उन्हें पूर्व से कोई जानकारी नहीं थी। उनकी अंगुलियों में सूजन, त्वचा में खिंचाव रहता था। साथ ही सांस लेने में तकलीफ और जोड़ों में दर्द की शिकायत थी। चिकित्सक को दिखाने पर पता चला कि यह बीमारी हुई है, तब से जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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बीमारी से बचाव के उपाय
-धूम्रपान न करें। -ठंड में बाहर जाते समय गर्म कपड़े पहनें, खासकर दस्ताने और मोजे। -त्वचा को हाइड्रेटेड रखने के लिए नियमित रूप से मॉइस्चराइजर का उपयोग करें। -धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन का उपयोग करें। -तनाव कम करें। -नियमित व्यायाम करें। -फलों, सब्जियों और साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार लें।
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ओपीडी में त्वचा रोग के करीब 150-200 मरीज प्रतिदिन पहुंचते हैं। इसमें तीन-चार मरीज स्क्लेरोडर्मा के होते हैं। जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम ने बताया कि यह बीमारी पूर्व में बहुत कम लोगों को होती थी। अचानक से मरीजों की संख्या बढ़ी है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह रोग अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
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दवा और फिजियोथेरेपी से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। डाॅ. दीपेंद्र ने बताया कि स्क्लेरोडर्मा एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर की इम्यून प्रणाली खुद ही त्वचा और अंगों पर हमला करने लगती है। इससे त्वचा सख्त और कसी हुई हो जाती है। यह बीमारी केवल त्वचा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि फेफड़े, हृदय, पाचन तंत्र और जोड़ों को भी प्रभावित कर सकती है।
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सांस लेने में हो रही थी तकलीफ
-शहर के 35 वर्षीय एक युवक ने बताया कि इस बीमारी के बारे में उन्हें पूर्व से कोई जानकारी नहीं थी। उनकी अंगुलियों में सूजन, त्वचा में खिंचाव रहता था। साथ ही सांस लेने में तकलीफ और जोड़ों में दर्द की शिकायत थी। चिकित्सक को दिखाने पर पता चला कि यह बीमारी हुई है, तब से जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बीमारी से बचाव के उपाय
-धूम्रपान न करें। -ठंड में बाहर जाते समय गर्म कपड़े पहनें, खासकर दस्ताने और मोजे। -त्वचा को हाइड्रेटेड रखने के लिए नियमित रूप से मॉइस्चराइजर का उपयोग करें। -धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन का उपयोग करें। -तनाव कम करें। -नियमित व्यायाम करें। -फलों, सब्जियों और साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार लें।