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तैरना आता नहीं था, उतर गए गहरे पानी में, चली गई जान
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 24 May 2017 11:44 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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नादानी में पांच बच्चों की जान चली गई। नदी में नहाने गए सातों लड़कों को तैरना नहीं आता था। फिर भी मौज मस्ती करने नदी में उतर गए और गहरे पानी में जाने से जिंदगी गंवा बैठे। बड़े हादसे की एक वजह यह भी रही कि वहां कोई खतरे का निशान नहीं था। संभव है उसे देखकर वे आगे न बढ़ते और जान न जाती।
मोहल्ला गोकुलपुरी निवासी हिमांशु मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, प्रियांशु गुप्ता, अंकित वर्मा, आकाश दीक्षित, प्रथम मिश्रा, आकाश दीक्षित, प्रथम मिश्रा और शांतिनगर निवासी निशांत आपस में गहरे दोस्त थे। सभी दोस्त होनहार और खुशमिजाज थे। अमूमन वे सभी सुबह क्रिकेट खेलने के लिए घर से निकलते थे। मंगलवार को सभी का प्लान नहाने का बन गया और बुधवार की सुबह। एक-एक कर सातों अपने घरों से साइकिल से निकले और नदी किनारे पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दो छात्र पुल से छलांग लगाकर स्टंट कर रहे थे। जब उनके साथी डूबने लगे और उन्हें बचाने वे कूदे तो उन्हें देखकर लगा कि वे तैरना नहीं जानते। इस बात की पुष्टि मृतकों के घर वालों ने भी की। उनका कहना है कि वे सभी घर से बिना बताए नहाने निकले थे। यदि बताते तो उन्हें जाने न दिया जाता।
स्टंट कर रहे छात्रों को रोका गया, माने नहीं
शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर महेवागंज पुलिस चौकी के अंतर्गत उल्ल नदी का रपटा पुल है। यहां प्रतिदिन सुबह चार-छह लड़के आते हैं और छलांग लगाकर नहाने के साथ मौजमस्ती करते हैं। बताते हैं कि यदि कोई इन युवाओं को टोकता है तो ये लोग झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। इसलिए लोग टोकाटोकी करने से परहेज करते हैं। बताते हैं कि आने-जाने वाले लोगों ने इन सात दोस्तों में भी स्टंट कर रहे दो छात्रों टोका था, लेकिन वे नहीं माने।
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यहां तो गांव वाले निपटते हैं हादसों से
मिदनियां गढ़ी-सैधरी मार्ग पर बने उल्ल नदी के रपटा पुल पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यदि कोई घटना हो जाए तो आसपास के ग्रामीण और दूरदराज से गोताखोर को बुलाया जाता है। यहां पर न तो कोई सुरक्षा है और न ही पानी की गहराई को लेकर कोई संकेतक या निशान लगे हैं। यदि खतरे का निशान लगा होता या फिर सुरक्षा की दृष्टि से वहां कोई इंतजाम होते तो शायद युवकों की जान नहीं जाती।
युवक जहां पर डूबे वहां पर रेत खनन होने से गहरा था पानी
ग्रामीणों की माने तो जिस स्थान पर पांचों युवकों की डूबकर मौत हुई, वहां भारी मात्रा में अवैध बालू का खनन होता है। इससे वहां नदी काफी गहरी हो गई है।
एक ही मोहल्ले में चार मौत, मातमी सन्नाटा
किसे मालूम था कि दिन भर साथ गुजारने वाले पांच दोस्तों को एक साथ दुनिया छोड़ना पड़ेगी, लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता है। उल्ल नदी में मोहल्ला गोकुलपुरी के चार और शांतिनगर मोहल्ले के एक छात्र के उल्ल नदी में डूबने की मनहूस खबर जब आई तो मोहल्ले के लोग और छात्रों के परिवार वाले घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। देखते ही देखते मौके पर लोगी की खासी भीड़ जुट गई। जब एक के बाद एक शव मिलने शुरू हुए तो परिवार वाले बिलख पड़े। मौके पर चीखपुकार मच गई। जवान पांच दोस्तों की मौत की सूचना जब मोहल्ले में पहुंची तो गोकुलपुरी के लोग स्तब्ध रह गए।
‘कोई मेरे लाल को उठाओ नाश्ता करा दूं’
महेवागंज। बुधवार सुबह अंकित वर्मा ने घरवालों से क्रिकेट खेलने जाने की बात कही थी। उसकी मां ने नाश्ता करने को कहा, लेकिन खेल की धुन के आगे उसने नाश्ता नहीं किया।
मृतक अंकित की मां सुनीता ने चीखते हुए कहा कि मेरा बेटा भूखा है। कोई उसे खाना खिला दो। वही हिमांशू की मां आशारानी रुंधे गले से बोली कि मेरा लाल बगैर कुछ खाए पिए घर से निकला था, मेरे लाल को जगा दो तो उसे नाश्ता करा दूं।
अफसरों के साथ नेताओं ने भी बंधाया ढाढ़स
लखीमपुर खीरी। शहर के पांच लड़कों की डूबकर हुई मौत से पूरा शहर आहत है। भाजपा जिलाध्यक्ष शरद वाजपेई, रमेश चंद्र मिश्रा, सपा जिलाध्यक्ष अनुराग पटेल, एमएलसी शशांक यादव, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश बाजपेई, मोहन बाजपेई, नीरू पुरी आदि मोरचरी पहुंचे। रोते-बिलखते परिवारों के लोगों को ढांढस बंधाया को यथासंभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया।
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मोहल्ला गोकुलपुरी निवासी हिमांशु मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, प्रियांशु गुप्ता, अंकित वर्मा, आकाश दीक्षित, प्रथम मिश्रा, आकाश दीक्षित, प्रथम मिश्रा और शांतिनगर निवासी निशांत आपस में गहरे दोस्त थे। सभी दोस्त होनहार और खुशमिजाज थे। अमूमन वे सभी सुबह क्रिकेट खेलने के लिए घर से निकलते थे। मंगलवार को सभी का प्लान नहाने का बन गया और बुधवार की सुबह। एक-एक कर सातों अपने घरों से साइकिल से निकले और नदी किनारे पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दो छात्र पुल से छलांग लगाकर स्टंट कर रहे थे। जब उनके साथी डूबने लगे और उन्हें बचाने वे कूदे तो उन्हें देखकर लगा कि वे तैरना नहीं जानते। इस बात की पुष्टि मृतकों के घर वालों ने भी की। उनका कहना है कि वे सभी घर से बिना बताए नहाने निकले थे। यदि बताते तो उन्हें जाने न दिया जाता।
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स्टंट कर रहे छात्रों को रोका गया, माने नहीं
शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर महेवागंज पुलिस चौकी के अंतर्गत उल्ल नदी का रपटा पुल है। यहां प्रतिदिन सुबह चार-छह लड़के आते हैं और छलांग लगाकर नहाने के साथ मौजमस्ती करते हैं। बताते हैं कि यदि कोई इन युवाओं को टोकता है तो ये लोग झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। इसलिए लोग टोकाटोकी करने से परहेज करते हैं। बताते हैं कि आने-जाने वाले लोगों ने इन सात दोस्तों में भी स्टंट कर रहे दो छात्रों टोका था, लेकिन वे नहीं माने।
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यहां तो गांव वाले निपटते हैं हादसों से
मिदनियां गढ़ी-सैधरी मार्ग पर बने उल्ल नदी के रपटा पुल पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यदि कोई घटना हो जाए तो आसपास के ग्रामीण और दूरदराज से गोताखोर को बुलाया जाता है। यहां पर न तो कोई सुरक्षा है और न ही पानी की गहराई को लेकर कोई संकेतक या निशान लगे हैं। यदि खतरे का निशान लगा होता या फिर सुरक्षा की दृष्टि से वहां कोई इंतजाम होते तो शायद युवकों की जान नहीं जाती।
युवक जहां पर डूबे वहां पर रेत खनन होने से गहरा था पानी
ग्रामीणों की माने तो जिस स्थान पर पांचों युवकों की डूबकर मौत हुई, वहां भारी मात्रा में अवैध बालू का खनन होता है। इससे वहां नदी काफी गहरी हो गई है।
एक ही मोहल्ले में चार मौत, मातमी सन्नाटा
किसे मालूम था कि दिन भर साथ गुजारने वाले पांच दोस्तों को एक साथ दुनिया छोड़ना पड़ेगी, लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता है। उल्ल नदी में मोहल्ला गोकुलपुरी के चार और शांतिनगर मोहल्ले के एक छात्र के उल्ल नदी में डूबने की मनहूस खबर जब आई तो मोहल्ले के लोग और छात्रों के परिवार वाले घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। देखते ही देखते मौके पर लोगी की खासी भीड़ जुट गई। जब एक के बाद एक शव मिलने शुरू हुए तो परिवार वाले बिलख पड़े। मौके पर चीखपुकार मच गई। जवान पांच दोस्तों की मौत की सूचना जब मोहल्ले में पहुंची तो गोकुलपुरी के लोग स्तब्ध रह गए।
‘कोई मेरे लाल को उठाओ नाश्ता करा दूं’
महेवागंज। बुधवार सुबह अंकित वर्मा ने घरवालों से क्रिकेट खेलने जाने की बात कही थी। उसकी मां ने नाश्ता करने को कहा, लेकिन खेल की धुन के आगे उसने नाश्ता नहीं किया।
मृतक अंकित की मां सुनीता ने चीखते हुए कहा कि मेरा बेटा भूखा है। कोई उसे खाना खिला दो। वही हिमांशू की मां आशारानी रुंधे गले से बोली कि मेरा लाल बगैर कुछ खाए पिए घर से निकला था, मेरे लाल को जगा दो तो उसे नाश्ता करा दूं।
अफसरों के साथ नेताओं ने भी बंधाया ढाढ़स
लखीमपुर खीरी। शहर के पांच लड़कों की डूबकर हुई मौत से पूरा शहर आहत है। भाजपा जिलाध्यक्ष शरद वाजपेई, रमेश चंद्र मिश्रा, सपा जिलाध्यक्ष अनुराग पटेल, एमएलसी शशांक यादव, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश बाजपेई, मोहन बाजपेई, नीरू पुरी आदि मोरचरी पहुंचे। रोते-बिलखते परिवारों के लोगों को ढांढस बंधाया को यथासंभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया।