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Lakhimpur Kheri News: सुहेली भी उफान पर, बाढ़ की गिरफ्त में दर्जनों गांव
Fri, 11 Sep 2026 11:04 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:04 PM IST
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बझेड़ा में कटान रोधी परियोजना के किनारे को काटती शारदा नदी। स्रोत ग्रामीण
निघासन। शारदा और सुहेली नदियों के उफान से निघासन क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। शारदा का बढ़ता जलस्तर दर्जनों गांवों तक पहुंच गया है। खेत-खलिहान जलमग्न होने से सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित हुई है। कई प्रमुख मार्गों पर पानी भरने से आवागमन बाधित है।
निघासन-झंडी मार्ग पर करीब 500 मीटर तक सड़क पर लगभग एक फुट पानी बह रहा है। निघासन-पलिया और निघासन-रकेहटी मार्ग के आसपास खेत-खलिहान और कई घर बाढ़ की चपेट में हैं। कई सरकारी विद्यालयों में भी पानी भर गया है। लालपुर स्थित डॉ. भीमराव तराई किसान महाविद्यालय समेत कई विद्यालयों तक पहुंचने वाले रास्ते भी जलमग्न हो गए हैं।
शारदा नदी के उफान से कुर्मिनपुरवा, देवीदीनपुरवा, बस्तीपुरवा, छीटन पुरवा, बिहारी पुरवा, करमूपुरवा, बरोठा, लांघनिया पुरवा, त्रिकौलिया, बिनौरा, मोहबतियाबेहड़, मिर्जागंज, महुआ, सुक्खन पुरवा, धर्मपुरवा, मदनापुर, लालबोझी, रानीगंज, ठाकुरपुरवा, बैलहाडीह, मटहिया, मिठुई, झंडी, टॉपरपुरवा, लोनियनपुरवा, नया पुरैना, पुराना पुरैना, सेमरा पुरवा, दौलतापुर, बोटनपुरवा, सुरजीपुरवा, नौगवां, हुलासीपुरवा, यादवपुरवा, बिचपरी, छेदुई पतिया और बल्लीपुर समेत दर्जनों गांव प्रभावित हैं।
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राहत कार्य के लिए आगे आए समाजसेवी
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए समाजसेवियों ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। रकेहटी कस्बे के दिग्विजय गुप्ता, देवेंद्र पांडे और निघासन के अंशुल दीक्षित समेत अन्य समाजसेवी ट्रैक्टर-ट्रॉली और नावों से बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंच रहे हैं। वे ग्रामीणों को राहत किट और लंच पैकेट वितरित कर रहे हैं।
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बाढ़ कटानरोधी परियोजना का बड़ा हिस्सा धंसने लगा
बिजुआ। शारदा नदी का जलस्तर घटते ही बझेड़ा में कटान ने 6.23 करोड़ रुपये की बाढ़ कटानरोधी परियोजना की पोल खोल दी है। नदी की धार परियोजना के डौले को तेजी से काट रही है। इसका एक बड़ा हिस्सा शारदा में धंसने लगा है।
हालात यही रहे तो बझेड़ा, कुंवरपुर और रेवतीपुरवा समेत करीब आधा दर्जन गांवों पर बाढ़ का संकट गहरा सकता है। परियोजना का किनारा नदी में समाने से ग्रामीण चिंतित हैं। उनका कहना है कि डौला टूटा तो शारदा का पानी खेतों से होता हुआ आबादी तक पहुंच सकता है। हजारों बीघा फसल और घरों पर संकट खड़ा हो जाएगा। कटान की रफ्तार को देखते हुए ग्रामीण रात-दिन परियोजना की निगरानी कर रहे हैं।
बुधवार को एसडीएम युगांतर त्रिपाठी ने मौके पर पहुंचकर परियोजना का निरीक्षण किया था। डौले की गंभीर स्थिति देखकर उन्होंने सिंचाई विभाग को तत्काल सुधार कार्य कराने के निर्देश दिए। इसके बावजूद अब तक प्रभावी बचाव कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
मौजूदा ग्राम प्रधान/प्रशासक चरनसिंह ने बताया कि पश्चिम तरफ शारदा नदी कटानरोधी परियोजना को काटने लगी है।
वर्जन
दो साल पुरानी परियोजना है। जेई ने बताया है कि कोने पर एक-दो बोरी गिरी हैं, जिन्हें सुबह सही करा दिया जाएगा। यह क्षेत्र आबादी से दूर है, इसलिए डर वाली कोई बात नहीं।
-अजय कुमार, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड
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निघासन-झंडी मार्ग पर करीब 500 मीटर तक सड़क पर लगभग एक फुट पानी बह रहा है। निघासन-पलिया और निघासन-रकेहटी मार्ग के आसपास खेत-खलिहान और कई घर बाढ़ की चपेट में हैं। कई सरकारी विद्यालयों में भी पानी भर गया है। लालपुर स्थित डॉ. भीमराव तराई किसान महाविद्यालय समेत कई विद्यालयों तक पहुंचने वाले रास्ते भी जलमग्न हो गए हैं।
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शारदा नदी के उफान से कुर्मिनपुरवा, देवीदीनपुरवा, बस्तीपुरवा, छीटन पुरवा, बिहारी पुरवा, करमूपुरवा, बरोठा, लांघनिया पुरवा, त्रिकौलिया, बिनौरा, मोहबतियाबेहड़, मिर्जागंज, महुआ, सुक्खन पुरवा, धर्मपुरवा, मदनापुर, लालबोझी, रानीगंज, ठाकुरपुरवा, बैलहाडीह, मटहिया, मिठुई, झंडी, टॉपरपुरवा, लोनियनपुरवा, नया पुरैना, पुराना पुरैना, सेमरा पुरवा, दौलतापुर, बोटनपुरवा, सुरजीपुरवा, नौगवां, हुलासीपुरवा, यादवपुरवा, बिचपरी, छेदुई पतिया और बल्लीपुर समेत दर्जनों गांव प्रभावित हैं।
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राहत कार्य के लिए आगे आए समाजसेवी
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए समाजसेवियों ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। रकेहटी कस्बे के दिग्विजय गुप्ता, देवेंद्र पांडे और निघासन के अंशुल दीक्षित समेत अन्य समाजसेवी ट्रैक्टर-ट्रॉली और नावों से बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंच रहे हैं। वे ग्रामीणों को राहत किट और लंच पैकेट वितरित कर रहे हैं।
बाढ़ कटानरोधी परियोजना का बड़ा हिस्सा धंसने लगा
बिजुआ। शारदा नदी का जलस्तर घटते ही बझेड़ा में कटान ने 6.23 करोड़ रुपये की बाढ़ कटानरोधी परियोजना की पोल खोल दी है। नदी की धार परियोजना के डौले को तेजी से काट रही है। इसका एक बड़ा हिस्सा शारदा में धंसने लगा है।
हालात यही रहे तो बझेड़ा, कुंवरपुर और रेवतीपुरवा समेत करीब आधा दर्जन गांवों पर बाढ़ का संकट गहरा सकता है। परियोजना का किनारा नदी में समाने से ग्रामीण चिंतित हैं। उनका कहना है कि डौला टूटा तो शारदा का पानी खेतों से होता हुआ आबादी तक पहुंच सकता है। हजारों बीघा फसल और घरों पर संकट खड़ा हो जाएगा। कटान की रफ्तार को देखते हुए ग्रामीण रात-दिन परियोजना की निगरानी कर रहे हैं।
बुधवार को एसडीएम युगांतर त्रिपाठी ने मौके पर पहुंचकर परियोजना का निरीक्षण किया था। डौले की गंभीर स्थिति देखकर उन्होंने सिंचाई विभाग को तत्काल सुधार कार्य कराने के निर्देश दिए। इसके बावजूद अब तक प्रभावी बचाव कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
मौजूदा ग्राम प्रधान/प्रशासक चरनसिंह ने बताया कि पश्चिम तरफ शारदा नदी कटानरोधी परियोजना को काटने लगी है।
वर्जन
दो साल पुरानी परियोजना है। जेई ने बताया है कि कोने पर एक-दो बोरी गिरी हैं, जिन्हें सुबह सही करा दिया जाएगा। यह क्षेत्र आबादी से दूर है, इसलिए डर वाली कोई बात नहीं।
-अजय कुमार, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड

बझेड़ा में कटान रोधी परियोजना के किनारे को काटती शारदा नदी। स्रोत ग्रामीण