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समाज को करनी होगी नारी को सशक्त बनाने की पहल

Wed, 14 Sep 2016 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो    लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो    लखीमपुर खीरी। Updated Wed, 14 Sep 2016 11:54 PM IST
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Society will have to take the initiative to empower women
संगोष्ठी - फोटो : अमर उजाला
नारी शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान विषय पर अमर उजाला का आयोजन
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 नारी शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने अंधविश्वास से दूरी, तार्किक समाज की स्थापना और निर्णय में नारियों की सहभागिता पर बल दिया। उत्तर प्रदेश सरकार और अमर उजाला की संयुक्त पहल पर बुधवार को आयोजित संगोष्ठी में ज्वांइट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर सैमुअल पाल (आईएएस बतौर) मुख्य अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भगवानदीन आर्यकन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निरुपमा अशोक ने की। 
मुख्य अतिथि सैमुअल पाल ने महिलाओं को सुपर पावर बताते हुए राजनीतिक और सामाजिक रूप से उनके सशक्तीकरण पर बल दिया। कहा महिलाएं समाज में कभी कमजोर नहीं रहीं हैं। उनकी सोच और आत्मविश्वास में कमी उन्हें कमजोर होने का अहसास कराती हैं। आत्मविश्वास जगाने के लिए प्रदेश सरकार महिलाओं को सशक्त और स्वावलंबी बनाने के लिए अनेक योजनाएं चला रही हैं। गोष्ठी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त डॉ. अजय पांडेय ने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सरकार की ओर से चल रही योजनाओं के बारे में बताया। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी डॉ. प्रियंका अवस्थी ने महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर बल दिया। भगवानदीन आर्यकन्या डिग्री कॉलेज की प्रवक्ता डॉ. शशिप्रभा बाजपेयी ने लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए 1090 की उपयोगिता को रेखांकित किया। डिप्टी सीएमओ डॉ. वीबी राम ने महिलाओं के नई सोच अपनाने पर बल दिया। राज किशोर पांडेय ने महिलाओं के सम्मान में मुक्तक सुनाए। भगवानदीन आर्यकन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में नारी सम्मान पर हुई इस गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि ने विशिष्ट अतिथि एएसपी डीएन चौधरी, पीडी वीरेंद्र यादव, शिवचंद्र सिंह, गोष्ठी अध्यक्ष डॉ. निरुपमा अशोक और मुख्य वक्ता डॉ. एससी मिश्र के साथ दीप जलाकर किया। संचालन डॉ वीनारानी गुप्ता ने किया।
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बेटियों ने प्रस्तुत की सरस्वती वंदना
आर्य कन्या महाविद्यालय की छात्राओं कृति अवस्थी, अनामिका और कीर्ति महेंद्र आदि ने अपनी सखियों के साथ सरस्वती वंदना पेश की। बेटियों की सरस्वती वंदना खूब सराही गई।
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इनकी भी रही मौजूदगी
संगोष्ठी में गरिमा सिंह, डॉ सुरचना त्रिवेदी, डॉ सुशीला, डॉ गीता शुक्ला, डॉ पुष्पा मलिक, रूपम तिवारी, जिला सूचना कार्यालय से दिव्या निगम और लोकेश गुप्ता सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
 
बोले वक्ता

1090 और डॉयल 100 से पैदा हुआ आत्मविश्वास
विशिष्ट अतिथि एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने कहा कि सरकार की डायल 1090 और डायल 100 से लड़कियों और महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है। डायल 100 दो अक्तूबर से शुरू हो रही है। इसके तहत जिले को 64 गाड़ियां मिली हैं। 100 नंबर पर शिकायत मिलते ही 10 से 20 मिनट के अंदर पुलिस मौके पर पहुंच जाएगी। 
 
निर्णय में सहभागिता के बिना सशक्तीकरण संभव नहीं 

मुख्यवक्ता डॉ. एससी मिश्र ने कहा कि नारियों को हमेशा कमजोर साबित करने की कोशिश की जाती रही है। जब तक निर्णय में नारियों की सहभागिता नहीं होती तब तक नारी सशक्तीकरण संभव नहीं हो सकता। महिलाओं में भी सशक्त होने का नजरिया होना जरूरी है। अंधविश्वास से दूर हटकर एक तार्किक समाज बनाना होगा।  
 
सम्मान पाने के लिए स्वाभिमान पैदा करना जरूरी
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए भगवानदीन आर्यकन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निरुपमा अशोक ने कहा कि सम्मान पाने के लिए अपने अंदर स्वाभिमान पैदा करना जरूरी है। महिलाएं स्वस्थ जीवन शैली, उच्च मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता, काम के प्रति निष्ठा का भाव पैदाकर अपने को अधिक सशक्त बना सकती हैं।  
 
महिलाओं के लिए सरकार ने चलाईं कई योजनाएं    
विशिष्ट अतिथि परियोजना निदेशक वीरेंद्र यादव ने प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं को सम्मान देने और स्वावलंबी बनाने के लिए लोहिया ग्रामीण आवास योजना की जानकारी दी। यह आवास घर की महिला मुखिया के नाम पर दिया जा रहा है। उन्होंने कन्या विद्याधन योजना, सोलर लाइट, बायोगैस, शौचालय आदि योजनाओं का जिक्र करते हुए विस्तार से जानकारी दी।
 
नारी सशक्तीकरण की मशाल हैं महिलाएं
नारी सशक्तीकरण के लिए सरकारें फिक्रमंद हैं तो महिलाएं भी अपने अथक प्रयासों से समाज के सामने एक नजीर पेश करने में कामयाब रहीं है। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं ने अपनी धाक जमाई है, तो ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी उनसे ज्यादा पीछे नहीं है। मेहनत, लगन और हौसलों के दम पर गांजर-तराई क्षेत्र की महिलाओं ने भी लोगों को रोजी-रोटी दिलाने की बखूबी भूमिका निभा रहीं हैं। योजनाओं का लाभ गरीबों को दिलाने से लेकर आधुनिक ढंग से खेती को बढ़ावा देने में जिले की महिलाएं बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहीं हैं। नारी सम्मान समारोह में अमर उजाला ने ऐसी ही कुछ महिलाओं से बातचीत की। 
 
संसाधन संपन्न करें गरीबों की मदद
आसमानी सेना की अध्यक्ष निधि मिश्रा ने 10 महिलाओं के साथ संगठन खड़ा किया था, जिसके साथ अब तक 610 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। यह संगठन वंचितों को राशनकार्ड, गैस कनेक्शन, वृद्धावस्था पेंशन आदि योजनाओं का लाभ दिलाने के कार्य में लगा है। निधि ने कहा कि नारी सम्मान और सशक्तीकरण से ही परिवार में सुख-शांति संभव हैै। उन्होंने अपील भी कि संसाधन संपन्न लोगों को गरीबों की मदद करने के लिए आगे आना होगा।
 
हौसले के आगे टूटी पिछड़ेपन की बेड़ियां
नेपाल बार्डर स्थित चंदनचौकी निवासी एवं रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित आरती राना समाज के पिछड़े तबके अनुसूचित जनजाति (थारू) से हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर स्वयं सहायता समूह चला रहीं हैं, जिसमें शामिल करीब दो हजार महिलाएं हथकरघा, हस्तशिल्प उत्पाद बना रहीं हैं। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की मदद से आरती राना की अगुवाई में समूह गोवा महोत्सव में स्टाल लगा चुका है। इसके अलावा दिल्ली और लखनऊ में होने वाले महोत्सव में इनके उत्पाद सराहे गए। आरती राना ने बताया कि समूह को औसतन सालाना ढाई लाख रुपये की आमदनी हो रही है। इस लक्ष्य को और बढ़ाने के प्रयास है।
 
बेटी बचाओ अभियान में जुटी पूर्णिमा 
पूर्णिमा मिश्रा पेशे से नगर क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में प्रधानाध्यापक हैं, लेकिन समाजसेवा में गहरी रूचि रखती हैं। छात्राओं के माताओं के साथ बैठकें कर समाज में जागरूकता को गतिविधियां संचालित कर रही हैं। शौचालय का प्रयोग करने के लिए लोगों को प्रेरित करने के साथ ही वह बेटी बचाओ मुहिम चलाती हैं। इस समय महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए टैडी बियर बनाने और सिलाई का प्रशिक्षण दे रहीं हैं। 

 
आधुनिक खेती में कर रही मदद
निघासन क्षेत्र के गांव चखरा निवासी मंजू देवी एनआरएलएम के सहयोग से मां वैष्णो ग्राम संगठन चलाती हैं, जिसमें 460 महिलाएं जुड़कर कार्य कर रहीं हैं। यह समूह कृषि विभाग से फार्म मशीनरी बैंक योजना के तहत कृषि यंत्रों को किराए पर देने का काम कर रहा है। मंजू ने बताया कि पहले गांव में 1300 से 1500 रुपये प्रति एकड़ जुताई पड़ रही थी। उन्होंने मशीनरी बैंक स्थापित कर ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों को खरीदकर किराए पर देना शुरू किया। 10 लाख के प्रोजेक्ट पर आठ लाख रुपये अनुदान मिला है। पिछले साल समूह ने ट्रैक्टर से 1.30 लाख रुपये कमाई की है। 
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