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ऐसे तो बच्चों में खत्म नहीं हो पाएगा कुपोषण
बांकेगंज
Updated Sat, 29 Aug 2015 07:54 PM IST
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आंगनबाड़ी केंद्रों के सहारे सरकार बच्चों को कुपोषण मुक्त कराने की कवायद कर रही है। लेकिन इन केंद्रों पर जितने बच्चे पंजीकृत हैं उसके एक चौथाई भी आंगनबाड़ी केंद्रों पर नहीं आ रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सुपरवाइजर और संबधित अधिकारी इससे बेपरवाह हैं। केंद्रों पर बच्चे न आने से न उन्हें पोषाहार मिल पा रहा है और न ही उनकी नियमित जांच हो पा रही है।
बांकेगंज ब्लाक क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की नियमित जांच के लिए सीएचसी में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डॉक्टरों को जिम्मेदारी दी गई है। डॉक्टरों की टीम जब आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचती है तो वहां बच्चों की संख्या कम मिलती है। तमाम केंद्रों पर तो ताला लटका मिलता है। इससे टीम को वहां से बैरंग लौटना पड़ता है। इसके चलते कुपोषित बच्चों के सेहत की न तो जांच हो पा रही है न उन्हें आवश्यक दवाइयां ही मिल पा रहीं है।
पिछले दिनों सीडीओ नितीश कुमार सुआबोझ गांव के दौरे पर गए तो उन्हें भी कुछ ऐसी ही अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा। वहां आंगनबाड़ी केंद्र तो खुला मिला लेकिन सुपरवाइजर नदारद थी। बच्चों का नियमित वजन नहीं लिया जा रहा था। न ही उनका कोई रजिस्टर मेंटेंन था। जांच में कई बच्चे कुपोषित मिले तो सीडीओ ने उनका वजन कराया और सुपरवाइजर को निलंबन की चेतावनी देते हुए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से अपनी कार्यशैली में सुधार लाने के निर्देश दिए। करीब एक महीने बाद फिर दौरा करने पर स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आया। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी भी जताई।
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ब्लाक क्षेत्र के उन अंदरूनी हिस्सों में जहां पर अधिकारी आमतौर पर पहुंच नहीं पाते वहां तो आंगनबाड़ी केंद्र महज कागजों पर ही चल रहे हैं। ऐसे में शासन का कुपोषण से निपटने का सपना साकार हो पाएगा इसमें संदेह है। उधर इस संबध में सीडीओ नीतीश कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। सात से दस सितंबर तक कुपोषित बच्चों का वजन दिवस आयोजित किया जाएगा। इसको लेकर जिले में कुपोषित बच्चों के चिह्नीकरण करने का अभियान चलाया जा रहा है। इसमें लापरवाही मिलने पर संबधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टरों की टीम को आंगनबाड़ी केंद्रो पर लटके मिले ताले......
ब्लाक क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की नियमित जांच के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गठित टीम के डॉ विकास गिरी और सुनील वर्मा पिछले सप्ताह ग्राम पंचायत जटपुरा और कुकरा में संचालित सात आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की सेहत जांच के लिए पहुंचे। इस दौरान उन्हें पांच केंद्र तो खुले मिले जबकि दो केंद्रों पर ताला लटका मिला। डॉक्टरों ने बताया कि इसकी सूचना उन्होंने सीएचसी अधीक्षक को दी है।
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बांकेगंज ब्लाक क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की नियमित जांच के लिए सीएचसी में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डॉक्टरों को जिम्मेदारी दी गई है। डॉक्टरों की टीम जब आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचती है तो वहां बच्चों की संख्या कम मिलती है। तमाम केंद्रों पर तो ताला लटका मिलता है। इससे टीम को वहां से बैरंग लौटना पड़ता है। इसके चलते कुपोषित बच्चों के सेहत की न तो जांच हो पा रही है न उन्हें आवश्यक दवाइयां ही मिल पा रहीं है।
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पिछले दिनों सीडीओ नितीश कुमार सुआबोझ गांव के दौरे पर गए तो उन्हें भी कुछ ऐसी ही अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा। वहां आंगनबाड़ी केंद्र तो खुला मिला लेकिन सुपरवाइजर नदारद थी। बच्चों का नियमित वजन नहीं लिया जा रहा था। न ही उनका कोई रजिस्टर मेंटेंन था। जांच में कई बच्चे कुपोषित मिले तो सीडीओ ने उनका वजन कराया और सुपरवाइजर को निलंबन की चेतावनी देते हुए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से अपनी कार्यशैली में सुधार लाने के निर्देश दिए। करीब एक महीने बाद फिर दौरा करने पर स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आया। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी भी जताई।
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ब्लाक क्षेत्र के उन अंदरूनी हिस्सों में जहां पर अधिकारी आमतौर पर पहुंच नहीं पाते वहां तो आंगनबाड़ी केंद्र महज कागजों पर ही चल रहे हैं। ऐसे में शासन का कुपोषण से निपटने का सपना साकार हो पाएगा इसमें संदेह है। उधर इस संबध में सीडीओ नीतीश कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। सात से दस सितंबर तक कुपोषित बच्चों का वजन दिवस आयोजित किया जाएगा। इसको लेकर जिले में कुपोषित बच्चों के चिह्नीकरण करने का अभियान चलाया जा रहा है। इसमें लापरवाही मिलने पर संबधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टरों की टीम को आंगनबाड़ी केंद्रो पर लटके मिले ताले......
ब्लाक क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की नियमित जांच के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गठित टीम के डॉ विकास गिरी और सुनील वर्मा पिछले सप्ताह ग्राम पंचायत जटपुरा और कुकरा में संचालित सात आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की सेहत जांच के लिए पहुंचे। इस दौरान उन्हें पांच केंद्र तो खुले मिले जबकि दो केंद्रों पर ताला लटका मिला। डॉक्टरों ने बताया कि इसकी सूचना उन्होंने सीएचसी अधीक्षक को दी है।