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क्रशर और कोल्हू के बंद होने से किसान परेशान, मिल ने भी नहीं किया गन्ने का भुगतान
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गोला गोकर्णनाथ। कोरोना के चलते क्षेत्र के गन्ना क्रशर और गुड़ कोल्हू बंद हैं। वहीं बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड चीनी मिल गन्ना किसानों से खरीदे गन्ने का भुगतान नहीं कर रही है, ऐसे में किसान गन्ना भुगतान को लेकर परेशान हैं।
बता दें कि बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड चीनी मिल ने अपना वर्तमान गन्ना पेराई सत्र तीन नवंबर को शुरू किया था तब से अब तक लगातार लाखों क्विंटल गन्ना पराई कर चीनी का उत्पादन कर चुकी है, किंतु किसानों को सिर्फ 10 नवंबर तक का ही भुगतान किया है जबकि अब तक गन्ना पेराई के 10 पखवाड़े बीत चुके हैं। सिर्फ दो पखवाड़े शेष हैं। वैसे तो किसान गन्ना क्रशर और गुड़ कोल्हू पर अपना गन्ना बेचकर भुगतान ले लेता था किंतु अब कोरोना के प्रकोप के चलते सरकार के आदेश से गन्ना क्रशर और गुड़ बनाने वाले कोल्हू बंद हैं। गन्ना आयुक्त के आदेश से चीनी मिल चलाई जा रही है किंतु गन्ने का भुगतान न हो पाने से किसान अपने खर्च और फसल में लगने वाली लागत को लेकर परेशान है।
विधायक से किया वायदा भी नहीं हुआ पूरा
क्षेत्रीय भाजपा विधायक अरविंद गिरि ने होली के समय गन्ना किसानों की समस्या को लेकर बजाज चीनी के अधिकारियों को घेरा था। जिस पर अधिकारियों ने प्रत्येक गन्ना किसान को एक-एक पर्ची का भुगतान करने का आश्वासन विधायक को दिया था। किंतु किसानों को भुगतान वायदे के मुताबिक नहीं किया गया।
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बता दें कि बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड चीनी मिल ने अपना वर्तमान गन्ना पेराई सत्र तीन नवंबर को शुरू किया था तब से अब तक लगातार लाखों क्विंटल गन्ना पराई कर चीनी का उत्पादन कर चुकी है, किंतु किसानों को सिर्फ 10 नवंबर तक का ही भुगतान किया है जबकि अब तक गन्ना पेराई के 10 पखवाड़े बीत चुके हैं। सिर्फ दो पखवाड़े शेष हैं। वैसे तो किसान गन्ना क्रशर और गुड़ कोल्हू पर अपना गन्ना बेचकर भुगतान ले लेता था किंतु अब कोरोना के प्रकोप के चलते सरकार के आदेश से गन्ना क्रशर और गुड़ बनाने वाले कोल्हू बंद हैं। गन्ना आयुक्त के आदेश से चीनी मिल चलाई जा रही है किंतु गन्ने का भुगतान न हो पाने से किसान अपने खर्च और फसल में लगने वाली लागत को लेकर परेशान है।
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विधायक से किया वायदा भी नहीं हुआ पूरा
क्षेत्रीय भाजपा विधायक अरविंद गिरि ने होली के समय गन्ना किसानों की समस्या को लेकर बजाज चीनी के अधिकारियों को घेरा था। जिस पर अधिकारियों ने प्रत्येक गन्ना किसान को एक-एक पर्ची का भुगतान करने का आश्वासन विधायक को दिया था। किंतु किसानों को भुगतान वायदे के मुताबिक नहीं किया गया।
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