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Lakhimpur Kheri News: शिक्षामित्र ने लगाया आरोप, निजी अस्पताल ने दो लाख रुपये लेकर भी पैर नहीं किया ठीक
Thu, 02 Oct 2025 12:12 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 02 Oct 2025 12:12 AM IST
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घायल अवस्था में शिक्षामित्र अलीमुद्दीन।संवाद
निघासन। सड़क हादसे में घायल हुए एक शिक्षामित्र का जीवन एक निजी अस्पताल की लापरवाही से और भी कठिन हो गया है। महेवागंज स्थित नियो हॉस्पिटल में दो लाख रुपये खर्च करने के बाद भी उसका पैर ठीक होने की बजाय और खराब हो गया। अब आर्थिक तंगी के कारण वह घर की देहरी पर अपंग स्थिति में पड़ा है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
लुधौरी निवासी शिक्षामित्र अलीमुद्दीन ने बताया कि मई में सड़क हादसे में उसका पैर टूट गया था। इलाज के लिए परिजन उसे महेवागंज के नियो हॉस्पिटल ले गए। यहां डॉ. आशुतोष वर्मा व डॉ. मुनाफ खान ने उसका इलाज किया। करीब दो लाख रुपये भी जमा कराए गए। इसकी कुछ रसीदें उनके पास मौजूद हैं।
आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से पैर का गुल्ला गड़बड़ हो गया। इसके बाद उसकी हालत पहले से ज्यादा बिगड़ गई। अलीमुद्दीन ने बताया कि पांच महीने बीत जाने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने आगे का इलाज करने से मना कर दिया।
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आर्थिक तंगी और अपंगता के कारण अब परिवार पर संकट गहराता जा रहा है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले में सीएमओ संतोष गुप्ता ने बताया कि उन्हें शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, डाक्टरों ने कुछ सावधानियां बताई होंगी, जिन्हें नजरंदाज किया गया होगा। मेडिकल साइंस में इलाज की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती है।
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संबंधित मरीज का पैर दो जगह से टूटा था, जिसका रॉड डालकर सफल ऑपरेशन किया गया। उसे आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह देकर डिस्चार्ज कर दिया गया था। इसके बाद मरीज के पैर में संक्रमण हो गया, जिससे पस बन गया और पैर तीसरी जगह से भी टूट गया। दो लाख रुपये लेने की बात पूरी तरह गलत और निराधार है। मरीज द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
डॉ. आशुतोष वर्मा, नियो हॉस्पिटल
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लुधौरी निवासी शिक्षामित्र अलीमुद्दीन ने बताया कि मई में सड़क हादसे में उसका पैर टूट गया था। इलाज के लिए परिजन उसे महेवागंज के नियो हॉस्पिटल ले गए। यहां डॉ. आशुतोष वर्मा व डॉ. मुनाफ खान ने उसका इलाज किया। करीब दो लाख रुपये भी जमा कराए गए। इसकी कुछ रसीदें उनके पास मौजूद हैं।
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आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से पैर का गुल्ला गड़बड़ हो गया। इसके बाद उसकी हालत पहले से ज्यादा बिगड़ गई। अलीमुद्दीन ने बताया कि पांच महीने बीत जाने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने आगे का इलाज करने से मना कर दिया।
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आर्थिक तंगी और अपंगता के कारण अब परिवार पर संकट गहराता जा रहा है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले में सीएमओ संतोष गुप्ता ने बताया कि उन्हें शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, डाक्टरों ने कुछ सावधानियां बताई होंगी, जिन्हें नजरंदाज किया गया होगा। मेडिकल साइंस में इलाज की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती है।
संबंधित मरीज का पैर दो जगह से टूटा था, जिसका रॉड डालकर सफल ऑपरेशन किया गया। उसे आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह देकर डिस्चार्ज कर दिया गया था। इसके बाद मरीज के पैर में संक्रमण हो गया, जिससे पस बन गया और पैर तीसरी जगह से भी टूट गया। दो लाख रुपये लेने की बात पूरी तरह गलत और निराधार है। मरीज द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
डॉ. आशुतोष वर्मा, नियो हॉस्पिटल