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Lakhimpur Kheri News: बढ़ने लगे तेज सिरदर्द, माइग्रेन के मरीज, रहें सावधान
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जिला अस्पताल में मरीज देखते मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला। संवाद
ओयल। मौसम में बदलाव के साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मौसमी बीमारियाें के अलावा तेज सिरदर्द यानी माइग्रेन के मरीज भी बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शुक्ला ने माइग्रेन के बारे में सावधान रहने की सलाह दी है। डाॅ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि गर्मियों में अक्सर लोगों में तेज सिरदर्द की समस्या बढ़ जाती है।
कारण तेज धूप, तेज रोशनी, तेज आवाज, तनाव, थकान, पूरी नींद न लेना, धूल-धुएं-गंध-दुर्गंध से एलर्जी, दवाओं की ओवरडोज, ज्यादा शराब पीना व पानी की कमी आदि से भी कई बार लोगों के आधे सिर में रुक-रुक कर असहनीय पीड़ा होती है। इन्हीं लक्ष्णों को माइग्रेन कहा जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि बार-बार ऐसी दिक्कतें सामने आने पर स्वयं पेनकिलर खाने से बचें और अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा प्रशिक्षित डॉक्टर से परामर्श लें। उन्होंने ओपीडी में 125 मरीज देखे। इसमें करीब 35 प्रतिशत मरीज सिरदर्द के थे।
माइग्रेन के लक्षण
आधे सिर में तेज दर्द होना, आंखों के सामने काले धब्बे दिखाई देना, कमजोरी महसूस होना। देखने में परेशानी, गुस्सा या चिड़चिड़ापन बढ़ना। गैस बनना, जी मतली या उल्टी होना। तेज रोशन/ आवाज से परेशानी होना आदि।
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बचाव के उपाय
प्रतिदिन 30 मिनट व्यायाम, योग या प्राणायाम करें। 10 मिनट तक मेडिटेशन करें। तेज धूप में बाहर निकलते समय छाते व धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें। निर्जलीकरण से बचने के लिए प्रतिदिन 8 से 10 ग्लास पानी अवश्य पीयें। फल और हरी सब्जियों का खूब सेवन करें। तनाव कम करने के लिए सुबह में घास पर नंगे पांव टहलने जाएं।
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कारण तेज धूप, तेज रोशनी, तेज आवाज, तनाव, थकान, पूरी नींद न लेना, धूल-धुएं-गंध-दुर्गंध से एलर्जी, दवाओं की ओवरडोज, ज्यादा शराब पीना व पानी की कमी आदि से भी कई बार लोगों के आधे सिर में रुक-रुक कर असहनीय पीड़ा होती है। इन्हीं लक्ष्णों को माइग्रेन कहा जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि बार-बार ऐसी दिक्कतें सामने आने पर स्वयं पेनकिलर खाने से बचें और अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा प्रशिक्षित डॉक्टर से परामर्श लें। उन्होंने ओपीडी में 125 मरीज देखे। इसमें करीब 35 प्रतिशत मरीज सिरदर्द के थे।
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माइग्रेन के लक्षण
आधे सिर में तेज दर्द होना, आंखों के सामने काले धब्बे दिखाई देना, कमजोरी महसूस होना। देखने में परेशानी, गुस्सा या चिड़चिड़ापन बढ़ना। गैस बनना, जी मतली या उल्टी होना। तेज रोशन/ आवाज से परेशानी होना आदि।
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बचाव के उपाय
प्रतिदिन 30 मिनट व्यायाम, योग या प्राणायाम करें। 10 मिनट तक मेडिटेशन करें। तेज धूप में बाहर निकलते समय छाते व धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें। निर्जलीकरण से बचने के लिए प्रतिदिन 8 से 10 ग्लास पानी अवश्य पीयें। फल और हरी सब्जियों का खूब सेवन करें। तनाव कम करने के लिए सुबह में घास पर नंगे पांव टहलने जाएं।