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सठ तो सुधर सकता है पर खल नहीं
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 15 Oct 2016 11:55 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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रामलीला मेला के सांस्कृतिक मंच पर हुई रामायण संगोष्ठी
जिले के ऐतिहासिक दशहरे मेले में रामायण संगोष्ठी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज हो गया। डीएम आकाशदीप ने फीता काटकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। साथ ही दीप प्रज्ज्वलित कर रामायण संगोष्ठी का शुभारंभ किया। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने दशहरा मेला के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।
राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक ने वाणी वंदना पेश कर रामायण संगोष्ठी की शुरुआत की। इसके बाद कृष्ण कुमार गौड़, शैलेंद्र शुक्ल, उमा शंकर मिश्र और साध्वी संत कुमारी ने प्रवचन दिया। शैलेंद्र शुक्ल ने कहा कि सठ तो सुधर सकता है लेकिन खल नहीं। इसीलिए प्रभु श्रीराम ने इंद्र पुत्र जयंत की एक आंख फोड़ कर छोड़ दिया। चूंकि खल का सुधार संभव नहीं इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने 101 वीं गाली पर शिशुपाल का वध कर दिया।
उमाशंकर मिश्र ने कहा कि रस की लोभी मछली, रूप के लोभी पतंगे और संगीत के लोभी मृग तथा स्पर्श के लोभी मृग तथा स्पर्श के लोभी हाथी को अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ता है। साध्वी संत कुमारी ने कहा कि जिसके हृदय में श्रीराम निवास करते हैं सज्जनों की सभा में वे ही सम्मान पाते हैं।
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इस मौके पर अधिशासी अधिकारी अवनींद्र कुमार, मेलाधिकारी जितेंद्र सिंह मेलाध्यक्ष मुन्नी गुप्ता, संयोजक मंडल सदस्य नीलम रस्तोगी, बबिता पाल के अलावा डॉ. दयानंद शुक्ला, शिवकांत मिश्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी मौजूद रहे। संचालन राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक ने किया।
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जिले के ऐतिहासिक दशहरे मेले में रामायण संगोष्ठी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज हो गया। डीएम आकाशदीप ने फीता काटकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। साथ ही दीप प्रज्ज्वलित कर रामायण संगोष्ठी का शुभारंभ किया। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने दशहरा मेला के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।
राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक ने वाणी वंदना पेश कर रामायण संगोष्ठी की शुरुआत की। इसके बाद कृष्ण कुमार गौड़, शैलेंद्र शुक्ल, उमा शंकर मिश्र और साध्वी संत कुमारी ने प्रवचन दिया। शैलेंद्र शुक्ल ने कहा कि सठ तो सुधर सकता है लेकिन खल नहीं। इसीलिए प्रभु श्रीराम ने इंद्र पुत्र जयंत की एक आंख फोड़ कर छोड़ दिया। चूंकि खल का सुधार संभव नहीं इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने 101 वीं गाली पर शिशुपाल का वध कर दिया।
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उमाशंकर मिश्र ने कहा कि रस की लोभी मछली, रूप के लोभी पतंगे और संगीत के लोभी मृग तथा स्पर्श के लोभी मृग तथा स्पर्श के लोभी हाथी को अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ता है। साध्वी संत कुमारी ने कहा कि जिसके हृदय में श्रीराम निवास करते हैं सज्जनों की सभा में वे ही सम्मान पाते हैं।
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इस मौके पर अधिशासी अधिकारी अवनींद्र कुमार, मेलाधिकारी जितेंद्र सिंह मेलाध्यक्ष मुन्नी गुप्ता, संयोजक मंडल सदस्य नीलम रस्तोगी, बबिता पाल के अलावा डॉ. दयानंद शुक्ला, शिवकांत मिश्र, राज किशोर पांडेय प्रहरी मौजूद रहे। संचालन राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक ने किया।