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सूर्यग्रहण के कारण दोपहर 12 बजे खुले मंदिरों के कपाट
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पूजन अर्चन के बाद भगवान का लगाया गया भोग
लखीमपुर खीरी-गोला गोकर्णनाथ। आसमान में छाए बादलों के बीच लोगों को साल का आखिरी कुंडलाकार सूर्यग्रहण देखने को नहीं मिल सका। गुरुवार सुबह 8.17 से 10.57 बजे तक इस अद्भुत खगोलीय घटना को लेकर मंदिरों से लेकर घरों तक पूजन अर्चन नहीं किया गया। दोपहर में सूतक समाप्त होते ही मंदिरों के पट खोले गए और पूजन अर्चन हुआ। सूर्यग्रहण के दौरान अधिकांश लोग घरों में ही रहे।
गुरुवार को सूर्य ग्रहण होने के कारण शहर के जंगली नाथ महादेव मंदिर, संकटा देवी मंदिर, भुहित पोरवा शिवजी के मंदिर, त्रिलोटी नाथ मंदिर, देवकली तीर्थ सहित अन्य मंदिरों में सुबह पूजन नहीं हुआ। दोपहर में सूतक समाप्त होते ही मंदिर के कपाट खोले गए और भगवान का पूजन अर्चन के बाद आरती की गई।
उधर, गोला नगर के पौराणिक शिव मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, मां मंगला देवी मंदिर, नारायणी देवी मंदिर, संकट मोचन हनुमान मंदिर के कपाट सूर्यग्रहण के बाद दोपहर 12 बजे भक्तों के दर्शनार्थ खोले गए। पुजारी दिनेश मिश्र ने बताया कि बुधवार रात आठ बजे श्रृंगार पूजा के बाद पौराणिक शिव मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। गुरुवार को 12 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और भगवान सत्यनारायण की कथा सुन दान पुण्य किया।
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लखीमपुर खीरी-गोला गोकर्णनाथ। आसमान में छाए बादलों के बीच लोगों को साल का आखिरी कुंडलाकार सूर्यग्रहण देखने को नहीं मिल सका। गुरुवार सुबह 8.17 से 10.57 बजे तक इस अद्भुत खगोलीय घटना को लेकर मंदिरों से लेकर घरों तक पूजन अर्चन नहीं किया गया। दोपहर में सूतक समाप्त होते ही मंदिरों के पट खोले गए और पूजन अर्चन हुआ। सूर्यग्रहण के दौरान अधिकांश लोग घरों में ही रहे।
गुरुवार को सूर्य ग्रहण होने के कारण शहर के जंगली नाथ महादेव मंदिर, संकटा देवी मंदिर, भुहित पोरवा शिवजी के मंदिर, त्रिलोटी नाथ मंदिर, देवकली तीर्थ सहित अन्य मंदिरों में सुबह पूजन नहीं हुआ। दोपहर में सूतक समाप्त होते ही मंदिर के कपाट खोले गए और भगवान का पूजन अर्चन के बाद आरती की गई।
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उधर, गोला नगर के पौराणिक शिव मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, मां मंगला देवी मंदिर, नारायणी देवी मंदिर, संकट मोचन हनुमान मंदिर के कपाट सूर्यग्रहण के बाद दोपहर 12 बजे भक्तों के दर्शनार्थ खोले गए। पुजारी दिनेश मिश्र ने बताया कि बुधवार रात आठ बजे श्रृंगार पूजा के बाद पौराणिक शिव मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। गुरुवार को 12 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और भगवान सत्यनारायण की कथा सुन दान पुण्य किया।
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