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Lakhimpur Kheri News: ग्रंट नंबर 12 में हालात बदतर, अब तक 35 घरों को निगल चुकी शारदा
Wed, 03 Sep 2025 11:03 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 03 Sep 2025 11:03 PM IST
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पुरैना गांव में घुसा बाढ़ का पानी। संवाद
निघासन। शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर से तहसील क्षेत्र के गांव ग्रंट नंबर 12 की स्थिति भयावह बनी हुई है। शारदा नदी पूरे गांव के अस्तित्व को मिटाने पर तुली हुई है। अभी तक इस गांव में करीब 35 घर शारदा नदी की धारा में समा चुके है। गांव के लोगों को आस्था से जोड़ने वाले दो प्राचीन मंदिर भी शारदा बहा ले गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष आई बाढ़ से अधिकारियों को सबक लेना चाहिए था। पिछले वर्ष आई बाढ़ के बाद कटान तेजी से होने लगा। इसे रोकने के लिए खुद ग्रामीणों ने बीड़ा उठाया और 10 हजार बोरियां एकत्रित करके जमीन व घरों को बचाने की मशक्कत की, लेकिन नदी के विकराल रुख ने मेहनत पर पानी फेर दिया।
ग्रंट 12 के ग्रामीणों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन अधिकारियों की तरफ से आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला है। फूलबेहड़ और निघासन की सीमा पर बसा ग्रंट नंबर 12 गांव जंगली इलाके से जुड़ा है। दोनों सीमाओं के बीच बह रही शारदा नदी में अवैध खनन चरम सीमा पर किया गया।
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ग्रामीणों ने बताया कि नदी के रुख को मोड़ने में खनन माफिया ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। अवैध खनन ग्रंट नंबर 12 के लिए खतरा बन गया। यहां की बालू डंपर और ट्रकों में भरी जाती रही। पूछने पर अधिकारियों के आदेश होने की बात कही गई। कुछ माह पहले श्रीनगर के मीलपुरवा के टापू स्थानों पर बालू की खेप लगाकर बिक्री की जाती थी।
नौ कटान पीड़ितों को मिल चुका मुआवजा
कटान से उजड़े आशियानों के मामले में शासन ने अब तक नौ पीड़ितों को राहत पहुंचाई है। उन्हें राहत स्वरूप 1,20,000 रुपये पक्के मकान के लिए मुआवजा मिला है। कटान पीड़ितों का कहना है कि जब गांव ही नहीं रहेगा तो मकान कहां बनवाया जाएगा। तहसीलदार मुकेश वर्मा ने बताया कि नौ कटान पीड़ितों को 1,20,000 की धनराशि खातों में भेजी जा चुकी है। अन्य जो पीड़ित हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। उन्हें भी लाभान्वित किया जाएगा।
नहीं मिला जवाब तो खुद ही उठाया कदम
पिछले साल बाढ़ के दौरान हर जगह से हारकर समस्या का कोई निस्तारण न मिलने पर ग्रामीणों ने खुद ही कटान रोकने के लिए प्रयास शुरू किए थे। तीन घर और कुछ जमीन को निगल चुकी शारदा के विकराल रूप को देख ग्रंट नंबर 12 के कटान पीड़ित यह समझ चुके थे कि अब गांव की स्थिति भविष्य में भी दयनीय होगी। यहां के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से लेकर तहसील प्रशासन तक कटान रोकने की मांग की, लेकिन प्रशासन एक साल पहले भी नहीं चेता। प्रशासन के इस ढीले रवैया को कैलाश शुक्ल, अनुज मिश्र, विजय कुमार, पप्पू, उमेश कौशल जसपाल यादव आदि ग्रामीणों ने मिलकर 10 हजार बोरियां लगाकर नदी के कटान का रुख मोड़ने की तैयारी में मशक्कत की। नतीजतन, दोबारा बाढ़ आने के बाद मिट्टी से भरी बोरियां भी नदी में समा गई।
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ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष आई बाढ़ से अधिकारियों को सबक लेना चाहिए था। पिछले वर्ष आई बाढ़ के बाद कटान तेजी से होने लगा। इसे रोकने के लिए खुद ग्रामीणों ने बीड़ा उठाया और 10 हजार बोरियां एकत्रित करके जमीन व घरों को बचाने की मशक्कत की, लेकिन नदी के विकराल रुख ने मेहनत पर पानी फेर दिया।
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ग्रंट 12 के ग्रामीणों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन अधिकारियों की तरफ से आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला है। फूलबेहड़ और निघासन की सीमा पर बसा ग्रंट नंबर 12 गांव जंगली इलाके से जुड़ा है। दोनों सीमाओं के बीच बह रही शारदा नदी में अवैध खनन चरम सीमा पर किया गया।
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ग्रामीणों ने बताया कि नदी के रुख को मोड़ने में खनन माफिया ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। अवैध खनन ग्रंट नंबर 12 के लिए खतरा बन गया। यहां की बालू डंपर और ट्रकों में भरी जाती रही। पूछने पर अधिकारियों के आदेश होने की बात कही गई। कुछ माह पहले श्रीनगर के मीलपुरवा के टापू स्थानों पर बालू की खेप लगाकर बिक्री की जाती थी।
नौ कटान पीड़ितों को मिल चुका मुआवजा
कटान से उजड़े आशियानों के मामले में शासन ने अब तक नौ पीड़ितों को राहत पहुंचाई है। उन्हें राहत स्वरूप 1,20,000 रुपये पक्के मकान के लिए मुआवजा मिला है। कटान पीड़ितों का कहना है कि जब गांव ही नहीं रहेगा तो मकान कहां बनवाया जाएगा। तहसीलदार मुकेश वर्मा ने बताया कि नौ कटान पीड़ितों को 1,20,000 की धनराशि खातों में भेजी जा चुकी है। अन्य जो पीड़ित हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। उन्हें भी लाभान्वित किया जाएगा।
नहीं मिला जवाब तो खुद ही उठाया कदम
पिछले साल बाढ़ के दौरान हर जगह से हारकर समस्या का कोई निस्तारण न मिलने पर ग्रामीणों ने खुद ही कटान रोकने के लिए प्रयास शुरू किए थे। तीन घर और कुछ जमीन को निगल चुकी शारदा के विकराल रूप को देख ग्रंट नंबर 12 के कटान पीड़ित यह समझ चुके थे कि अब गांव की स्थिति भविष्य में भी दयनीय होगी। यहां के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से लेकर तहसील प्रशासन तक कटान रोकने की मांग की, लेकिन प्रशासन एक साल पहले भी नहीं चेता। प्रशासन के इस ढीले रवैया को कैलाश शुक्ल, अनुज मिश्र, विजय कुमार, पप्पू, उमेश कौशल जसपाल यादव आदि ग्रामीणों ने मिलकर 10 हजार बोरियां लगाकर नदी के कटान का रुख मोड़ने की तैयारी में मशक्कत की। नतीजतन, दोबारा बाढ़ आने के बाद मिट्टी से भरी बोरियां भी नदी में समा गई।

पुरैना गांव में घुसा बाढ़ का पानी। संवाद