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Lakhimpur Kheri News: ‘हैरिटेज लाइन घोषित कर न्यायालय के आदेशों की हुई है अवहेलना’
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पलिया में प्रेस वार्ता के दौरान कागज दिखाते राजेश भारतीय। संवाद
पलियाकलां। मैलानी से नानपारा रेल लाइन के हैरिटेज घोषित होने के बाद रेल संचालन व आमान परिवर्तन की कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे राजेश भारतीय ने रेलवे पर कोर्ट की अवहेलना करने का आरोप लगाया है। राजेश भारतीय का कहना है कि रेलवे द्वारा साजिश के तहत यहां से आमान परिवर्तन के बजाय रेलवे का संचालन बंद करने की ठान ली गई है। इसी का नतीजा है कि अब इसको हैरिटेज लाइन घोषित किया गया है।
बलदेव वैदिक इंटर काॅलेज में प्रेसवार्ता करते हुए राजेश भारतीय ने कहा कि रेलवे ने अपनी पहले घोषित नानपारा से रायबोझा व भीरा से मैलानी तक आमान परिवर्तन की कार्ययोजना को भी धता बता दिया है। रेलवे द्वारा लिया गया यह फैसला जनता के हित में भी नहीं है और रेलवे द्वारा वर्ष 2007 में कोर्ट में दिए गए शपथपत्र के भी विपरीत है।
रेल को चलवाने के लिए न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे राजेश भारतीय ने इसे रेलवे की सोची समझी रेल बंद करने की रणनीति बताई है। उन्होंने कहा कि बिली अर्जन सिंह बनाम भारत सरकार के हाईकोर्ट में चल रहे मामले में विगत महीने कोर्ट ने रेलवे को आदेश दिया था कि वह स्थानीय जनता की बात सुनकर कोई निर्णय ले, लेकिन रेलवे ने बिना सुने ही रेललाइन को मनाने तरीके से हैरिटेज लाइन घोषित कर दिया, जो न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है।
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कहा कि वर्ष 2007 में रेलवे ने हाईकोर्ट ने शपथपत्र देकर कहा है कि मैलानी-गोंडा रेल लाइन उसके लिए पूर्वोत्तर का सबसे शाॅर्टकट रास्ता है, रेलवे करीब पांच लाख यात्रियों को हर साल लाती ले जाती है। इसके अलावा नेपाल बाॅर्डर पास होने के कारण यह रेल लाइन अति संवेदनशील है। इसके साथ रेलवे ने अपने शपथ पत्र में यह भी कहा है कि यदि रेल लाइन बंद की गई तो क्षेत्र का विकास व दुधवा का टूरिज्म सब बंद हो जाएगा।
इस शपथ पत्र के बावजूद रेलवे ने हैरिटेज लाइन घोषित करने में जल्दबाजी की है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में इसको चुनौती देने का काम करेंगे। चंदनचैकी व गौरीफंटा जाने वाली रेललाइन को रेलवे ने बेहतर करने का आश्वासन कई सालों पूर्व दिया था। अब अगर रेलवे हैरिटेज लाइन बनाना चाहे तो इस रूट पर वह हैरिटेज लाइन बना सकती है।
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बलदेव वैदिक इंटर काॅलेज में प्रेसवार्ता करते हुए राजेश भारतीय ने कहा कि रेलवे ने अपनी पहले घोषित नानपारा से रायबोझा व भीरा से मैलानी तक आमान परिवर्तन की कार्ययोजना को भी धता बता दिया है। रेलवे द्वारा लिया गया यह फैसला जनता के हित में भी नहीं है और रेलवे द्वारा वर्ष 2007 में कोर्ट में दिए गए शपथपत्र के भी विपरीत है।
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रेल को चलवाने के लिए न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे राजेश भारतीय ने इसे रेलवे की सोची समझी रेल बंद करने की रणनीति बताई है। उन्होंने कहा कि बिली अर्जन सिंह बनाम भारत सरकार के हाईकोर्ट में चल रहे मामले में विगत महीने कोर्ट ने रेलवे को आदेश दिया था कि वह स्थानीय जनता की बात सुनकर कोई निर्णय ले, लेकिन रेलवे ने बिना सुने ही रेललाइन को मनाने तरीके से हैरिटेज लाइन घोषित कर दिया, जो न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है।
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कहा कि वर्ष 2007 में रेलवे ने हाईकोर्ट ने शपथपत्र देकर कहा है कि मैलानी-गोंडा रेल लाइन उसके लिए पूर्वोत्तर का सबसे शाॅर्टकट रास्ता है, रेलवे करीब पांच लाख यात्रियों को हर साल लाती ले जाती है। इसके अलावा नेपाल बाॅर्डर पास होने के कारण यह रेल लाइन अति संवेदनशील है। इसके साथ रेलवे ने अपने शपथ पत्र में यह भी कहा है कि यदि रेल लाइन बंद की गई तो क्षेत्र का विकास व दुधवा का टूरिज्म सब बंद हो जाएगा।
इस शपथ पत्र के बावजूद रेलवे ने हैरिटेज लाइन घोषित करने में जल्दबाजी की है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में इसको चुनौती देने का काम करेंगे। चंदनचैकी व गौरीफंटा जाने वाली रेललाइन को रेलवे ने बेहतर करने का आश्वासन कई सालों पूर्व दिया था। अब अगर रेलवे हैरिटेज लाइन बनाना चाहे तो इस रूट पर वह हैरिटेज लाइन बना सकती है।