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वादे वही पुराने, समस्याएं भी वही
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 10 Jan 2017 11:12 PM IST
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सूरत-ए-हाल: पलिया विधानसभा क्षेत्र
बाढ़ और कटान से जूझते क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का भी बुरा हाल
कभी यहां हवाई पट्टी थी, जो विधायकों की उदासीनता से हो गई बंद
नेपाल के सीमावर्ती विधानसभा क्षेत्र पलिया का यह दूसरा विधानसभा चुनाव है। वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले इस विधानसभा क्षेत्र का सृजन हुआ था। विधानसभा क्षेत्र भले नया है लेकिन समस्याएं वही पुरानी हैं। शारदा और सुहेली नदियों के अलावा नेपाली नदी मोहाना की बाढ़ से क्षेत्र को हर साल भारी तबाही झेलनी पड़ रही है। प्रदेश का इकलौता राष्ट्रीय उद्यान दुधवा नेशनल पार्क इसी क्षेत्र में है लेकिन पर्यटन का उतना विकास नहीं हो पाया जैसी कि उम्मीद की जाती है। सड़कों की दुर्दशा, चीनी मिल से प्रदूषण और गन्ना भुगतान का समय से न होना यहां की प्रमुख समस्याएं हैं।
विधानसभा क्षेत्र निघासन और पैला को काटकर बनाए गए इस नए विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2012 में हुआ पहला विधानसभा चुनाव बसपा के रोमी साहनी जीत कर विधायक बने थे। उन्होंने सपा के कृष्ण गोपाल पटेल को पराजित किया था। तृणमूल कांग्रेस के बीएम सिंह तीसरे और कांग्रेस के डॉ. विनोद तिवारी चौथे नंबर पर रहे थे। निघासन और पैला विधानसभा क्षेत्रों में रहते इस क्षेत्र की जो समस्याएं थीं वह अब भी जैसी की तैसी है।
चुनाव के फैक्टर
पलिया विधानसभा क्षेत्र के 95 फीसदी मतदाता किसान हैं। एक दशक से गन्ना भुगतान की समस्या के अलावा बाढ़ कटान से प्रभावित होने वाले किसान केवल उन्हीं उम्मीदवारों को तरजीह देते हैं जो गन्ना किसानों की समस्याओं और बाढ़ कटान की समस्याओं को गंभीरता से लेते हैं। जाति के समीकरण चुनाव पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं डालते।
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मतदाताओं की संख्या
कुल मतदाता.............................340517
पुरुष मतदाता.............................182234
महिला मतदाता..........................158276
अन्य मतदाता..................................07
विधानसभा चुनाव- 2012
कुल मतदान 203083
रोमी साहनी, बसपा (निर्वाचित) 55460
कृष्ण गोपाल पटेल, सपा 49541
रामकुमार वर्मा, भाजपा 23500
वीएम सिंह, तृणमूल कांग्रेस 23047
डॉ. विनोद तिवारी, कांग्रेस 20593
लोकसभा चुनाव 2014 में मत विभाजन
भाजपा......36.93 प्रतिशत बसपा......29.49 प्रतिशत
कांग्रेस......14.58 प्रतिशत सपा.........14.43 प्रतिशत
पलिया विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुददे
-पलिया को जिला बनाना
-बाढ़ और कटान से मुक्ति दिलाना
-उच्च शिक्षा का अभाव
-संपूर्णानगर को ब्लाक, भीरा को नगर पंचायत का दर्जा
-उपनिवेशन योजना के तहत बसे किसानों को भूमिधर अधिकार दिलाना
-स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
-हवाई पट्टी शुरू कराना
-रोडवेज डिपो की स्थापना
-पलिया को बड़ी रेल लाइन से जोड़ना
क्या कहते हैं मतदाता
समाजसेवी व यथार्थ सेवा समिति की अध्यक्ष बीना गुप्ता कहती हैं कि पलिया का विकास जिला बनने के बाद ही संभव है। निघासन से पलिया जुड़ा था तब भी यही हाल था और जब अलग होकर भी वही हाल है।
पलिया बार एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश दीक्षित एडवोकेट कहते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में पलिया काफी पिछड़ा है। बालिकाओं के लिए तो विकल्प काफी कम हैं। यह विधानसभा क्षेत्र बस चुनावी वादों में घिर कर रह गया है।
कारोबारी मोहम्मद फईम कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों ने बाढ़ और कटान को रोकने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाए जो एक बड़ी समस्या है और इलाके के पिछड़ेपन के लिए जिम्मेदार है। बाढ़ और कटान एक बड़ा मुददा है।
समाजसेवी आलोक मिश्रा कहते हैं पलिया जिला बने तो विकास निश्चित है और इसके लिए पलिया पालिका सीमा भी बढ़नी आवश्यक है। अर्से से जिले की मांग हो रही है लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया।
विधायक बोले
plk 15
इलाके को रोशन किया, अब सेहत सुधारेंगे
अपने पांच साल के कार्यकाल में उन गांवों को रोशन किया जो आजादी के बाद से बिजली से महरूम थे। इन गांवों की तादाद 86 है। हमने इतने बड़े पैमाने पर अपनी निधि का सदुपयोग करते हुए विद्युतीकरण कराया है। मुझे पांच वर्षों में जो वेतन और डीजल के रूप में 50 लाख रुपया मिला वह भी मैने गरीबों की जरूरतों को देखते उनको दे दिया। हर जाति धर्म के लोगों की मदद की। पांच वर्ष के कार्यकाल में मैने जो भी किया है वह इतिहास के पन्नों में दर्ज किया जाएगा। इस बार चुना गया तो क्षेत्र में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दूंगा।
रोमी साहनी, विधायक पलिया
बाढ़ और कटान से जूझते क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का भी बुरा हाल
कभी यहां हवाई पट्टी थी, जो विधायकों की उदासीनता से हो गई बंद
नेपाल के सीमावर्ती विधानसभा क्षेत्र पलिया का यह दूसरा विधानसभा चुनाव है। वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले इस विधानसभा क्षेत्र का सृजन हुआ था। विधानसभा क्षेत्र भले नया है लेकिन समस्याएं वही पुरानी हैं। शारदा और सुहेली नदियों के अलावा नेपाली नदी मोहाना की बाढ़ से क्षेत्र को हर साल भारी तबाही झेलनी पड़ रही है। प्रदेश का इकलौता राष्ट्रीय उद्यान दुधवा नेशनल पार्क इसी क्षेत्र में है लेकिन पर्यटन का उतना विकास नहीं हो पाया जैसी कि उम्मीद की जाती है। सड़कों की दुर्दशा, चीनी मिल से प्रदूषण और गन्ना भुगतान का समय से न होना यहां की प्रमुख समस्याएं हैं।
विधानसभा क्षेत्र निघासन और पैला को काटकर बनाए गए इस नए विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2012 में हुआ पहला विधानसभा चुनाव बसपा के रोमी साहनी जीत कर विधायक बने थे। उन्होंने सपा के कृष्ण गोपाल पटेल को पराजित किया था। तृणमूल कांग्रेस के बीएम सिंह तीसरे और कांग्रेस के डॉ. विनोद तिवारी चौथे नंबर पर रहे थे। निघासन और पैला विधानसभा क्षेत्रों में रहते इस क्षेत्र की जो समस्याएं थीं वह अब भी जैसी की तैसी है।
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चुनाव के फैक्टर
पलिया विधानसभा क्षेत्र के 95 फीसदी मतदाता किसान हैं। एक दशक से गन्ना भुगतान की समस्या के अलावा बाढ़ कटान से प्रभावित होने वाले किसान केवल उन्हीं उम्मीदवारों को तरजीह देते हैं जो गन्ना किसानों की समस्याओं और बाढ़ कटान की समस्याओं को गंभीरता से लेते हैं। जाति के समीकरण चुनाव पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं डालते।
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मतदाताओं की संख्या
कुल मतदाता.............................340517
पुरुष मतदाता.............................182234
महिला मतदाता..........................158276
अन्य मतदाता..................................07
विधानसभा चुनाव- 2012
कुल मतदान 203083
रोमी साहनी, बसपा (निर्वाचित) 55460
कृष्ण गोपाल पटेल, सपा 49541
रामकुमार वर्मा, भाजपा 23500
वीएम सिंह, तृणमूल कांग्रेस 23047
डॉ. विनोद तिवारी, कांग्रेस 20593
लोकसभा चुनाव 2014 में मत विभाजन
भाजपा......36.93 प्रतिशत बसपा......29.49 प्रतिशत
कांग्रेस......14.58 प्रतिशत सपा.........14.43 प्रतिशत
पलिया विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुददे
-पलिया को जिला बनाना
-बाढ़ और कटान से मुक्ति दिलाना
-उच्च शिक्षा का अभाव
-संपूर्णानगर को ब्लाक, भीरा को नगर पंचायत का दर्जा
-उपनिवेशन योजना के तहत बसे किसानों को भूमिधर अधिकार दिलाना
-स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
-हवाई पट्टी शुरू कराना
-रोडवेज डिपो की स्थापना
-पलिया को बड़ी रेल लाइन से जोड़ना
क्या कहते हैं मतदाता
समाजसेवी व यथार्थ सेवा समिति की अध्यक्ष बीना गुप्ता कहती हैं कि पलिया का विकास जिला बनने के बाद ही संभव है। निघासन से पलिया जुड़ा था तब भी यही हाल था और जब अलग होकर भी वही हाल है।
पलिया बार एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश दीक्षित एडवोकेट कहते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में पलिया काफी पिछड़ा है। बालिकाओं के लिए तो विकल्प काफी कम हैं। यह विधानसभा क्षेत्र बस चुनावी वादों में घिर कर रह गया है।
कारोबारी मोहम्मद फईम कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों ने बाढ़ और कटान को रोकने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाए जो एक बड़ी समस्या है और इलाके के पिछड़ेपन के लिए जिम्मेदार है। बाढ़ और कटान एक बड़ा मुददा है।
समाजसेवी आलोक मिश्रा कहते हैं पलिया जिला बने तो विकास निश्चित है और इसके लिए पलिया पालिका सीमा भी बढ़नी आवश्यक है। अर्से से जिले की मांग हो रही है लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया।
विधायक बोले
plk 15
इलाके को रोशन किया, अब सेहत सुधारेंगे
अपने पांच साल के कार्यकाल में उन गांवों को रोशन किया जो आजादी के बाद से बिजली से महरूम थे। इन गांवों की तादाद 86 है। हमने इतने बड़े पैमाने पर अपनी निधि का सदुपयोग करते हुए विद्युतीकरण कराया है। मुझे पांच वर्षों में जो वेतन और डीजल के रूप में 50 लाख रुपया मिला वह भी मैने गरीबों की जरूरतों को देखते उनको दे दिया। हर जाति धर्म के लोगों की मदद की। पांच वर्ष के कार्यकाल में मैने जो भी किया है वह इतिहास के पन्नों में दर्ज किया जाएगा। इस बार चुना गया तो क्षेत्र में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दूंगा।
रोमी साहनी, विधायक पलिया