फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Private Kovid Hospital is charging more than the fixed rate

तय रेट से ज्यादा वसूल रहे निजी कोविड अस्पताल

Mon, 10 May 2021 11:41 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 10 May 2021 11:41 PM IST
विज्ञापन
Private Kovid Hospital is charging more than the fixed rate
एसडीएम ने सौंपी जांच रिपोर्ट, जांच में अधिकांश आरोप सही मिले
विज्ञापन

बीते दिनों वायरल हुआ था तय रेट से ज्यादा पैसे वसूलने का एक ऑडियो
लखीमपुर खीरी। जिला प्रशासन ने कोविड के काउंटर के लिए सरकारी अस्पताल नकहा के जगसड़ के साथ-साथ इस साल लखीमपुर के निजी अस्पताल, शिखर अस्पताल को भी कोविड अस्पताल बनाया है। पहले से ही विवादित रहे इस अस्पताल का बीते दिनों कोविड के इलाज के लिए तय रेट से ज्यादा पैसे वसूलने का एक ऑडियो सामने आया था। इस मामले में एसडीएम सदर ने जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, आरोप सही पाए गए हैं।
कोविड के इलाज के लिए तीमारदार बेहतर इलाज की उम्मीद में अपने मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती करवा रहे हैं। जहां पर बेहतर इलाज का दावा कर तीमारदारों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। इसमें आईसीसीयू, वेंटिलेटर एवं बेड के नाम पर रोजाना 30 से 40 हजार रुपये का बिल बनाया जा रहा है। पिछले दिनों ऐसे ही ऑडियो और विडियो सामने आए, जिसमें अस्पताल कर्मी इलाज के लिए तय रकम से ज्यादा बता रहे थे। मामले के तूल पकड़ने के बाद रविवार को डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने एसडीएम सदर डॉ. अरुण कुमार सिंह की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम बनाकर जांच सौंपी थी, जिसकी रिपोर्ट सोमवार को डीएम को सौंप दी गई है।
विज्ञापन

जांच रिपोर्ट में क्या है यह अभी डीएम ने नहीं बताया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि अस्पताल में भर्ती मरीजों ने बयान में स्वीकारा है कि हर दिन मरीजों से 30 से 40 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। वहीं इस मामले में अस्पताल के मालिक का कहना है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए 10 हजार रुपये प्रति बेड की दर निर्धारित है, लेकिन ज्यादा पैसा मरीजों की दूसरी बीमारियों का इलाज करने पर लिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


केस- एक
खमरिया निवासी पंकज गुप्ता ने सांस लेने में परेशानी होने पर छोटे भाई को शिखर हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। पांच दिन उसका इलाज चला। पंकज बताते हैं कि ऑक्सीजन, बेड एवं दवाइयों सहित कुल मिलाकर रोज 55 हजार रुपये का खर्च आता था। पांच दिन इलाज चला, जिसका बिल करीब ढाई लाख रुपये बना। फायदा न होने पर लखनऊ लेकर गए, जहां इलाज के दौरान भाई की मौत हो गई।

केस- दो
पिछले दिनों एक तीमारदार ने अपने मरीज को भर्ती कराने के लिए अस्पताल कर्मी के पास जब फोन कर इलाज पर आने वाले खर्च के बारे में पूछा तो अस्पताल कर्मी ने 30 हजार रुपये प्रतिदिन का चार्ज बताया। इसमें 15 हजार रुपये बेड का और पांच हजार रुपये एक सिलिंडर का चार्ज बताया, जबकि दवाएं अलग से। मामले का ऑडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें अस्पताल के संचालक ने छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि चार मई से अस्पताल को वह नहीं, बल्कि लखनऊ का एसी हॉस्पिटल संचालित कर रहा है।

कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए जो रेट लिस्ट मिली थी, उसमें 10 हजार रुपये प्रति बेड की दर निर्धारित थी। कोविड नियमों के तहत संक्रमितों का इलाज किया गया। कई मरीज ऐसे थे, जो संक्रमण के साथ दूसरी बीमारियों से ग्रसित थे, जिसका भी इलाज हुआ। मरीजों से स्टाफ ने जो शुल्क लिया गया, उसकी रसीद दी।

- रमेश अग्रवाल, प्रबंधक शिखर हॉस्पिटल

शिखर अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के इलाज में तय रेट से ज्यादा पैसे लिये जाने की शिकायत थी। मामले की जांच एसडीएम सदर को सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट मिल गई है, लेकिन व्यस्तता की वजह से अध्ययन नहीं कर सका हूं। रिपोर्ट देखकर टिप्पणी की जाएगी।
- शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed