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Lakhimpur Kheri News: निजी बसें राैंद रहीं नियम... मानक के विपरीत ले जा रहे यात्री और ढो रहीं सामान
Wed, 29 Oct 2025 11:57 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 29 Oct 2025 11:57 PM IST
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मोहम्मदी में स्लीपर बस को सीज करते हुए प्रवर्तन अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र।
लखीमपुर खीरी। जिले में निजी बसों के संचालक नियम तोड़ रहे हैं। परमिट के विपरीत लोगों को बैठाकर यात्रा कराई जा रही है, जबकि नियमत: इन्हें सिर्फ बुकिंग के लिए चला सकते हैं। शाम होते ही शहर के साथ कस्बों के चाैराहों पर बस संचालकों के कर्मी दिल्ली, मुंबई और राजस्थान ले जाने के लिए आवाजें लगाने लगते हैं। साथ ही रोडवेज से कम किराये पर ले जाने के लिए यात्रियों को कई बार जबरदस्ती बसों में बैठा लिया जाता है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो परिवहन विभाग में ऑल इंडिया परमिट की 170 स्लीपर बसें पंजीकृत हैं, लेकिन यहां से दिल्ली, हरिद्वार, पंजाब, जयपुर, रुद्रपुर, हरियाणा, मध्यप्रदेश आदि अलग-अलग शहरों के लिए 300 से अधिक बसें धड़ल्ले से दौड़ती हैं। लंबी दूरी की यह यह स्लीपर बसें दिन में नहीं, बल्कि शाम के समय रवाना होती हैं, ताकि यह कार्रवाई से बच सकें। स्टैज कैरिज की 250 और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज की बसें 150 पंजीकृत हैं। स्टैज कैरिज व कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसें भी खूब दौड़ाई जाती हैं।
स्लीपर व अन्य बसें सबसे ज्यादा नेपाल बॉर्डर के गौरीफंटा, चंदनचौकी, तिकुनिया, संपूर्णानगर से रवाना होती हैं। धौराहरा, निघासन, मैगलगंज, मोहम्मदी से भी काफी बसें रवाना होती हैं। यह बसें सड़क किनारे मनमाना स्टैंड बनाकर क्षमता से अधिक सवारियां बैठाती हैं। सवारियों के साथ ही समान भी लादा जाता है। सवारियों को एकत्र करने के लिए एजेंट सक्रिय रहते हैं, जो सवारियों की खोज करते हैं।
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जिले में स्लीपर बसों से सफर के नाम पर नियमों की अनदेखी और यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार ठोस कदम नहीं उठा पाते। जबकि इससे कहीं अधिक बसें जिले से संचालित होती हैं।
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जहां चाहते, वहां खोल देते बुकिंग काउंटर
जिले में काफी बसें अवैध तरीके से संचालित होती है। यह बस संचालक मनमाने तरीके से जहां चाहते हैं, वहां टिकट बुकिंग का काउंटर खोल देते हैं। फोन से भी टिकटों की बुकिंग करते हैं, जो नियमों की एक बड़ी अनदेखी है। लंबी दूरी की इन बसों से अधिक मजदूर वर्ग के लोग जाते हैं। ठेकेदार मजदूरों को एकत्र करते हैं और एजेंट के माध्यम से प्रति सवारी के हिसाब से बुकिंंग कगाते हैं। इन बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भी बिठाई जाती हैं। दिवाली, भैयादूज व छठ पूजा पर यह बसें धड़ल्ले से दौड़ती नजर आईं। भीड़ अधिक होने पर इन बसों ने किराया भी अधिक बढ़ा दिया था। क्षमता से अधिक सवारियों को भी बिठाया। त्योहार के दिनों में मनमाने तरीके से बसों का संचालन किया गया।
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मोहम्मदी में कई दिनों से चल रहा विवाद
मोहम्मदी कस्बे में सवारियों को लेकर बसों के दो गुटों में कई दिनों से विवाद चल रहा है। दोनों गुट आए दिन मारपीट करते हैं, जिन पर अब कार्रवाई भी की जा चुकी है। मोहम्मदी से स्लीपर बसें शाम होते ही दिल्ली के लिए रवाना होने लगती है। सवारियों को लेकर दोनों गुटों में अक्सर विवाद होता है। कभी-कभी यह लोग सवारियों के साथ भी मारपीट करते हैं। विवाद बढ़ता देख मंगलवार की शाम प्रवर्तन अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र ने चार स्लीपर बसों को सीज किया किया।
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अवैध संचालक को लेकर लगातार कार्रवाई की जाती है। रोजाना कई बसें सीज की जाती हैं। पहले की अपेक्षा काफी हद तक लगाम भी लग चुकी है। लगातार प्रयास जारी है।
-डॉ. कौशलेंद्र, प्रवर्तन अधिकारी
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आंकड़ों पर नजर डालें तो परिवहन विभाग में ऑल इंडिया परमिट की 170 स्लीपर बसें पंजीकृत हैं, लेकिन यहां से दिल्ली, हरिद्वार, पंजाब, जयपुर, रुद्रपुर, हरियाणा, मध्यप्रदेश आदि अलग-अलग शहरों के लिए 300 से अधिक बसें धड़ल्ले से दौड़ती हैं। लंबी दूरी की यह यह स्लीपर बसें दिन में नहीं, बल्कि शाम के समय रवाना होती हैं, ताकि यह कार्रवाई से बच सकें। स्टैज कैरिज की 250 और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज की बसें 150 पंजीकृत हैं। स्टैज कैरिज व कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसें भी खूब दौड़ाई जाती हैं।
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स्लीपर व अन्य बसें सबसे ज्यादा नेपाल बॉर्डर के गौरीफंटा, चंदनचौकी, तिकुनिया, संपूर्णानगर से रवाना होती हैं। धौराहरा, निघासन, मैगलगंज, मोहम्मदी से भी काफी बसें रवाना होती हैं। यह बसें सड़क किनारे मनमाना स्टैंड बनाकर क्षमता से अधिक सवारियां बैठाती हैं। सवारियों के साथ ही समान भी लादा जाता है। सवारियों को एकत्र करने के लिए एजेंट सक्रिय रहते हैं, जो सवारियों की खोज करते हैं।
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जिले में स्लीपर बसों से सफर के नाम पर नियमों की अनदेखी और यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार ठोस कदम नहीं उठा पाते। जबकि इससे कहीं अधिक बसें जिले से संचालित होती हैं।
जहां चाहते, वहां खोल देते बुकिंग काउंटर
जिले में काफी बसें अवैध तरीके से संचालित होती है। यह बस संचालक मनमाने तरीके से जहां चाहते हैं, वहां टिकट बुकिंग का काउंटर खोल देते हैं। फोन से भी टिकटों की बुकिंग करते हैं, जो नियमों की एक बड़ी अनदेखी है। लंबी दूरी की इन बसों से अधिक मजदूर वर्ग के लोग जाते हैं। ठेकेदार मजदूरों को एकत्र करते हैं और एजेंट के माध्यम से प्रति सवारी के हिसाब से बुकिंंग कगाते हैं। इन बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भी बिठाई जाती हैं। दिवाली, भैयादूज व छठ पूजा पर यह बसें धड़ल्ले से दौड़ती नजर आईं। भीड़ अधिक होने पर इन बसों ने किराया भी अधिक बढ़ा दिया था। क्षमता से अधिक सवारियों को भी बिठाया। त्योहार के दिनों में मनमाने तरीके से बसों का संचालन किया गया।
मोहम्मदी में कई दिनों से चल रहा विवाद
मोहम्मदी कस्बे में सवारियों को लेकर बसों के दो गुटों में कई दिनों से विवाद चल रहा है। दोनों गुट आए दिन मारपीट करते हैं, जिन पर अब कार्रवाई भी की जा चुकी है। मोहम्मदी से स्लीपर बसें शाम होते ही दिल्ली के लिए रवाना होने लगती है। सवारियों को लेकर दोनों गुटों में अक्सर विवाद होता है। कभी-कभी यह लोग सवारियों के साथ भी मारपीट करते हैं। विवाद बढ़ता देख मंगलवार की शाम प्रवर्तन अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र ने चार स्लीपर बसों को सीज किया किया।
अवैध संचालक को लेकर लगातार कार्रवाई की जाती है। रोजाना कई बसें सीज की जाती हैं। पहले की अपेक्षा काफी हद तक लगाम भी लग चुकी है। लगातार प्रयास जारी है।
-डॉ. कौशलेंद्र, प्रवर्तन अधिकारी