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करोड़ों खर्च फिर भी स्कूलों की बत्ती गुल
लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 04 Jan 2015 11:29 PM IST
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परिषदीय स्कूलों में आंतरिक वायरिंग से लेकर विद्युत कनेक्शन के नाम
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पर करोड़ों की धनराशि खर्च हो चुकी है, लेकिन विद्युतीकरण से आच्छादित
विद्यालयों की बत्ती गुल है।
सिर्फ एक बार शिक्षा विभाग द्वारा 641 विद्यालयों का बिजली बिल जमा कराया गया था, जिसके बाद लंबा समय बीत गया। अब न तो बिजली बिल आ रहे और न ही शिक्षा विभाग की ओर से जमा किया गया। 2012-13 में 138 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन कराने के लिए बिजली विभाग को प्रति विद्यालय 3500 की दर से 4.83 लाख रुपये दिए गए, जिसका मामला ऑडिट में फंस गया है।
बता दें कि सरकार ने स्कूलों में विद्युतीकरण कराने के लिए आदेश दिए थे, जिस पर अमल भी हुआ। 2009-10 में 1139 विद्यालयों में आंतरिक वायरिंग, पंखा, ट्यूबलाइट लगाने के लिए प्रत्येक विद्यालय को 26,988 रुपये दिए गए। जबकि बिजली कनेक्शन के लिए प्रति विद्यालय 3500 रुपये और छह माह का अग्रिम बिल के तौर पर प्रति विद्यालय 1800 रुपये दिए गए।
इसके बाद करीब छह सौ विद्यालयों में विद्युतीकरण के लिए इसी तरह धनराशि जारी हुई। करीब 1739 विद्यालयों में विद्युतीकरण होने के बाद भी मामला जस का तस बना हुआ है। अधिकांश विद्यालयों से पंखे-ट्यूबलाइट गायब हैं या फिर चोरी हो गए।
दिलचस्प मामला यह है कि जिन विद्यालयों में बिजली कनेक्शन कराया गया, उनकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास भी नहीं है। तो बिजली विभाग भी जानकारी नहीं दे पा रहा है। आडिट में फसने के बाद बीएसए डॉ ओपी राय ने विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधिशाषी अभियंता से 2012-13 में 138 विद्यालयों में कराए गए बिजली कनेक्शन का उपभोग प्रमाण पत्र मांगा है, जिसमें उन्होंने भुगतान के लिए बिजली बिल का भी ब्यौरा मांगा है।
दो विभागों के बीच कंफ्यूजन में योजना फेल!
परिषदीय विद्यालयों में विद्युतीकरण दो विभागों के बीच कंफ्यूजन की वजह भी बन गया है, जिसके सहारे अधिकारी खुद को बचाने में मशगूल है। मसलन आंतरिक वायरिंग के लिए प्रधानाध्यापकों को पैसा दिया गया, जबकि बिजली कनेक्शन की धनराशि सीधे बिजली विभाग को दी गई। अब शिक्षा विभाग बिजली विभाग से सूचनाएं न प्राप्त होने का हवाला दे रहा है।
कंप्यूटर शिक्षा पर भी सवालिया निशान
विद्युतीकरण में हुई घपलेबाजी का असर कंप्यूटर शिक्षा पर भी पड़ा है, जिससे उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा परवान नहीं चढ़ सकी है। हालात यह है कि अधिकांश विद्यालयों से कंप्यूटर सिस्टम ही नदारद हैं।
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इसीलिए परिषदीय विद्यालयों में ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया गया है, जिससे विद्यालयों की सही तस्वीर सामने आएगी। इसके साथ ही बिजली की बदहाल स्थिति के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध जांच कराई जाएगी और विभागों की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई होगी।
- गौरव दयाल, जिलाधिकारी
सिर्फ एक बार शिक्षा विभाग द्वारा 641 विद्यालयों का बिजली बिल जमा कराया गया था, जिसके बाद लंबा समय बीत गया। अब न तो बिजली बिल आ रहे और न ही शिक्षा विभाग की ओर से जमा किया गया। 2012-13 में 138 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन कराने के लिए बिजली विभाग को प्रति विद्यालय 3500 की दर से 4.83 लाख रुपये दिए गए, जिसका मामला ऑडिट में फंस गया है।
बता दें कि सरकार ने स्कूलों में विद्युतीकरण कराने के लिए आदेश दिए थे, जिस पर अमल भी हुआ। 2009-10 में 1139 विद्यालयों में आंतरिक वायरिंग, पंखा, ट्यूबलाइट लगाने के लिए प्रत्येक विद्यालय को 26,988 रुपये दिए गए। जबकि बिजली कनेक्शन के लिए प्रति विद्यालय 3500 रुपये और छह माह का अग्रिम बिल के तौर पर प्रति विद्यालय 1800 रुपये दिए गए।
इसके बाद करीब छह सौ विद्यालयों में विद्युतीकरण के लिए इसी तरह धनराशि जारी हुई। करीब 1739 विद्यालयों में विद्युतीकरण होने के बाद भी मामला जस का तस बना हुआ है। अधिकांश विद्यालयों से पंखे-ट्यूबलाइट गायब हैं या फिर चोरी हो गए।
दिलचस्प मामला यह है कि जिन विद्यालयों में बिजली कनेक्शन कराया गया, उनकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास भी नहीं है। तो बिजली विभाग भी जानकारी नहीं दे पा रहा है। आडिट में फसने के बाद बीएसए डॉ ओपी राय ने विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधिशाषी अभियंता से 2012-13 में 138 विद्यालयों में कराए गए बिजली कनेक्शन का उपभोग प्रमाण पत्र मांगा है, जिसमें उन्होंने भुगतान के लिए बिजली बिल का भी ब्यौरा मांगा है।
दो विभागों के बीच कंफ्यूजन में योजना फेल!
परिषदीय विद्यालयों में विद्युतीकरण दो विभागों के बीच कंफ्यूजन की वजह भी बन गया है, जिसके सहारे अधिकारी खुद को बचाने में मशगूल है। मसलन आंतरिक वायरिंग के लिए प्रधानाध्यापकों को पैसा दिया गया, जबकि बिजली कनेक्शन की धनराशि सीधे बिजली विभाग को दी गई। अब शिक्षा विभाग बिजली विभाग से सूचनाएं न प्राप्त होने का हवाला दे रहा है।
कंप्यूटर शिक्षा पर भी सवालिया निशान
विद्युतीकरण में हुई घपलेबाजी का असर कंप्यूटर शिक्षा पर भी पड़ा है, जिससे उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा परवान नहीं चढ़ सकी है। हालात यह है कि अधिकांश विद्यालयों से कंप्यूटर सिस्टम ही नदारद हैं।
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इसीलिए परिषदीय विद्यालयों में ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया गया है, जिससे विद्यालयों की सही तस्वीर सामने आएगी। इसके साथ ही बिजली की बदहाल स्थिति के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध जांच कराई जाएगी और विभागों की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई होगी।
- गौरव दयाल, जिलाधिकारी