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यूक्रेन से आए परिंदों की जिंदगी के लिए दुआ मांग रहे लोग
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झादीताल में विदेशी परिंदे।
गर्मी शुरू होते ही ठंडे देशों से आए प्रवासी परिंदों की वापसी हुई शुरू
बांकेगंज। गर्मी का मौसम शुरू होते ही ठंडे देशों से आए प्रवासी परिंदों की वापसी शुरू हो गई है। इन पक्षियों की वापसी शुरू होने पर लोगों की चिंता, खासकर यूक्रेन से आने वाले पक्षियों को लेकर है। युद्ध की विभीषिका के चलते वहां का वायुमंडल जहरीला हो चुका है और रेडिएशन भी काफी बढ़ गया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज के अंतर्गत नगरिया झील और किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल समेत जिले के विभिन्न जलाशयों, झीलों और नदियों में मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे देशों से बड़ी संख्या में परिंदे सर्दियों के मौसम में यहां आकर प्रवास करते है। जिन यूरोपीय देशों से यह पक्षी आते हैं, उनमें यूक्रेन भी शामिल है। मौसम बदलने के साथ ही अब इन पक्षियों की भी वापसी शुरू हो गई है, लेकिन यूक्रेन का वातावरण बमों के धमाकों के कारण बेहद जहरीला हो चुका है। रेडिएशन भी वहां काफी बढ़ गया है। ऐसे में वहां परिंदों का जीवित बचना मुश्किल प्रतीत हो रहा है।
दुधवा नेशनल पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर का कहना है कि यूक्रेन में जो हालत हैं और वहां का वायुमंडल जिस तरह विषैला हुआ है इंसानों के स्वास्थ्य पर बुरा असर तो पड़ ही रहा है। ऐसे में ये नन्हें परिंदे जीवित भी रह पाएंगे, इसमें संदेह हैं। स्थानीय पक्षी प्रेमी विनोद गोयल ,जय गोयल, हरीकिशन अग्रवाल आदि अगले साल इनकी सकुशल वापसी के लिए दुआएं कर रहे हैं।
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चार माह के प्रवास के दौरान चूजे हो चुके हैं उड़ने लायक
प्रवासी पक्षी तराई में यहां करीब चार माह तक प्रवास के दौरान प्रजनन कर बच्चों को जन्म देते हैं। जब इनके चूजे उड़ने लायक हो जाते हैं तो वे इन्हें साथ लेकर अपने वतन रवाना होते हैं। यह बच्चे बड़े होकर अगले साल फिर तराई के जलाशयों में आकर प्रवास करते हैं। पर्यावरण प्रेमियों की चिंता इस बात को लेकर है कि इन नन्हें परिंदों का यहां वापस आ पाना मुश्किल होगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व के जलाशयों में यूक्रेन, साइबेरिया आदि यूरोपीय देशों के अलावा मध्य एशिया से बड़ी संख्या में यहां प्रवास के लिए आते हैं। अब इन पक्षियों की वापसी शुरू हो गई है। यूक्रेन के हालत देखते हुए इन पक्षियों के जीवन पर संकट है। यह युद्ध मानव के लिए ही नहीं वन्यजीवों के लिए भी विनाशकारी साबित होगा।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
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बांकेगंज। गर्मी का मौसम शुरू होते ही ठंडे देशों से आए प्रवासी परिंदों की वापसी शुरू हो गई है। इन पक्षियों की वापसी शुरू होने पर लोगों की चिंता, खासकर यूक्रेन से आने वाले पक्षियों को लेकर है। युद्ध की विभीषिका के चलते वहां का वायुमंडल जहरीला हो चुका है और रेडिएशन भी काफी बढ़ गया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज के अंतर्गत नगरिया झील और किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल समेत जिले के विभिन्न जलाशयों, झीलों और नदियों में मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे देशों से बड़ी संख्या में परिंदे सर्दियों के मौसम में यहां आकर प्रवास करते है। जिन यूरोपीय देशों से यह पक्षी आते हैं, उनमें यूक्रेन भी शामिल है। मौसम बदलने के साथ ही अब इन पक्षियों की भी वापसी शुरू हो गई है, लेकिन यूक्रेन का वातावरण बमों के धमाकों के कारण बेहद जहरीला हो चुका है। रेडिएशन भी वहां काफी बढ़ गया है। ऐसे में वहां परिंदों का जीवित बचना मुश्किल प्रतीत हो रहा है।
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दुधवा नेशनल पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर का कहना है कि यूक्रेन में जो हालत हैं और वहां का वायुमंडल जिस तरह विषैला हुआ है इंसानों के स्वास्थ्य पर बुरा असर तो पड़ ही रहा है। ऐसे में ये नन्हें परिंदे जीवित भी रह पाएंगे, इसमें संदेह हैं। स्थानीय पक्षी प्रेमी विनोद गोयल ,जय गोयल, हरीकिशन अग्रवाल आदि अगले साल इनकी सकुशल वापसी के लिए दुआएं कर रहे हैं।
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चार माह के प्रवास के दौरान चूजे हो चुके हैं उड़ने लायक
प्रवासी पक्षी तराई में यहां करीब चार माह तक प्रवास के दौरान प्रजनन कर बच्चों को जन्म देते हैं। जब इनके चूजे उड़ने लायक हो जाते हैं तो वे इन्हें साथ लेकर अपने वतन रवाना होते हैं। यह बच्चे बड़े होकर अगले साल फिर तराई के जलाशयों में आकर प्रवास करते हैं। पर्यावरण प्रेमियों की चिंता इस बात को लेकर है कि इन नन्हें परिंदों का यहां वापस आ पाना मुश्किल होगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व के जलाशयों में यूक्रेन, साइबेरिया आदि यूरोपीय देशों के अलावा मध्य एशिया से बड़ी संख्या में यहां प्रवास के लिए आते हैं। अब इन पक्षियों की वापसी शुरू हो गई है। यूक्रेन के हालत देखते हुए इन पक्षियों के जीवन पर संकट है। यह युद्ध मानव के लिए ही नहीं वन्यजीवों के लिए भी विनाशकारी साबित होगा।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व