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नियम-कानून की पेचीदगी से संकट में ईंट उद्योग
लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 29 Jun 2015 10:51 PM IST
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खीरी ईंट निर्माता समिति ने ईंट भट्ठों के संचालन में आ रही दिक्कतों को लेकर उनके शीघ्र निस्तारण की मांग उठाई। समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन के माध्यम से बिंदुबार समस्याएं गिनाकर एडीएम एसपी सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा है कि यदि एमओईएफ (मिनिस्ट्री आफ इनवायरमेंट फारेस्ट) के प्राविधानों से ईंट-भट्ठों को मुक्त नहीं किया गया तो ईंट उद्योग बंदी की कगार पहुंच जाएगा।
समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2012 में पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल के माइनर मिनरल खनन के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस प्राप्त करने के आदेश दिए थे, जिसमें ब्रिक अर्थ या साधारण मिट्टी के खनन को भी शामिल किया गया है। इस बाध्यता के चलते ईंट-भट्ठों का सुलभ रूप से संचालन नहीं हो पा रहा है और ईंट उद्योग बंदी की स्थिति में पहुंच रहा है। हालांकि यूपी सरकार ने राज्य माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स में संशोधन करके ईंट उद्योग के लिए राहत प्रदान की थी लेकिन कुछ कथित कंसलटेंट समूहों ने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर ईंट भट्ठों के संचालन को बाधित करने की स्थिति उत्पन्न कर दी है। अध्यक्ष ने ज्ञापन के माध्यम से कहा है कि ईंट भट्ठा सीजनल उद्योग है, जिसमें सीमित तरीके से मिट्टी निकालकर कच्ची ईंटों की पथाई की जाती है। उन्होंने दावा करते हुए कहा है कि इससे पर्यावरण को हानि की संभावना नहीं होती है। एडीएम को ज्ञापन देने वालों में महामंत्री सुयश कुमार अग्रवाल, रमेश वर्मा, सुरेंद्र तोलानी, शंभूनाथ वर्मा, सुशील अग्रवाल, सुनील तोलानी आदि शामिल रहे।
200 ईंट भट्ठों पर मिल रहा हजारों को रोजगार
जिले में करीब 200 ईंट भट्ठा संचालित हैं, जिन पर हजारों गरीबों को रोजगार मिलता है। अनुमान है कि एक ईंट भट्ठे से करीब 400 श्रमिकों को रोजगार प्राप्त होता है। इस लिहाज से ईंट उद्योग के बाधित होने पर हजारों लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट पैदा हो सकता है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में ईंट-भट्ठा ही एकमात्र उद्योग संचालित है।
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समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2012 में पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल के माइनर मिनरल खनन के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस प्राप्त करने के आदेश दिए थे, जिसमें ब्रिक अर्थ या साधारण मिट्टी के खनन को भी शामिल किया गया है। इस बाध्यता के चलते ईंट-भट्ठों का सुलभ रूप से संचालन नहीं हो पा रहा है और ईंट उद्योग बंदी की स्थिति में पहुंच रहा है। हालांकि यूपी सरकार ने राज्य माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स में संशोधन करके ईंट उद्योग के लिए राहत प्रदान की थी लेकिन कुछ कथित कंसलटेंट समूहों ने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर ईंट भट्ठों के संचालन को बाधित करने की स्थिति उत्पन्न कर दी है। अध्यक्ष ने ज्ञापन के माध्यम से कहा है कि ईंट भट्ठा सीजनल उद्योग है, जिसमें सीमित तरीके से मिट्टी निकालकर कच्ची ईंटों की पथाई की जाती है। उन्होंने दावा करते हुए कहा है कि इससे पर्यावरण को हानि की संभावना नहीं होती है। एडीएम को ज्ञापन देने वालों में महामंत्री सुयश कुमार अग्रवाल, रमेश वर्मा, सुरेंद्र तोलानी, शंभूनाथ वर्मा, सुशील अग्रवाल, सुनील तोलानी आदि शामिल रहे।
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200 ईंट भट्ठों पर मिल रहा हजारों को रोजगार
जिले में करीब 200 ईंट भट्ठा संचालित हैं, जिन पर हजारों गरीबों को रोजगार मिलता है। अनुमान है कि एक ईंट भट्ठे से करीब 400 श्रमिकों को रोजगार प्राप्त होता है। इस लिहाज से ईंट उद्योग के बाधित होने पर हजारों लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट पैदा हो सकता है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में ईंट-भट्ठा ही एकमात्र उद्योग संचालित है।
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