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पार्क प्रशासन ने छह और कैमरे लगवाए
अमर उजाला ब्यूरो/मझगईं।
Updated Mon, 19 Sep 2016 11:31 PM IST
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tiger
- फोटो : amar ujala
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कैमरों की संख्या हुई दस, चौथे दिन दिखाई पड़े बाघ के पगमार्क
बेला में चौथे दिन एक खेत में बाघ के पगचिह्न दिखाई पड़े है। पार्क कर्मी और वार्डन ने पगचिह्नों को देखा और उनकी नपाई की तथा 6 कैमरे और लगवाए गए। बाघ के पगचिह्न मिलने से लोगों में दहशत और बढ़ गई है। पार्क अधिकारी बराबर निगरानी कर रहे हैं।
मालूम हो शुक्रवार को खैराहना निवासी किसान भिखारी राना को बेला में खेत की रखवाली करने के दौरान एक बाघ ने मार डाला था। घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए पार्क और नार्थ खीरी के अधिकारी चार कैमरों तथा दो हाथियों से बराबर निगरानी कर रहे हैं। घटना के अगले दिन से बाघ की कोई लोकेशन नहीं मिल रही थी। चौथे दिन बिरजू के खेत में वनाधिकारियों को बाघ के पगचिह्न नजर आए मगर कैमरों में बाघ की तस्वीर कैद नहीं हो सकी। सोमवार सुबह पहुंचे वार्डन एन के उपाध्याय, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी रोहित रवि, रेंजर कलीम अहमद, रेंजर राधेश्याम ने मौका मुआयना किया और पगचिह्नों की नपाई की। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम ने बताया छह कैमरे और लगाए गए हैं कैमरों की संख्या अब दस हो गई है। बराबर बाघ की मॉनीटिरिंग की जा रही है। गांव वालों से सतर्कता बरतने को कहा गया है। दरोगा वीर बहादुर सिंह, अमरपाल, कलाम , प्रहलाद सहित पार्क और नार्थ खीरी के वनकर्मी रात दिन बेला में ही डेरा डालकर बाघ की लोकेशन के साथ निगरानी कर रहे हैं। सोमवार बाघ के पगचिह्न दिखाई पड़ने से लोगों के होश उड़ गए हैं।
अलियापुर गांव के पास फिर दिखा बाघ, दहशत
हैरमखेड़ा। मैगलगंज थाना क्षेत्र के अलियापुर गांव में रविवार रात फिर बाघ दिखाई दिया। इससे क्षेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं। बताते चलें कि कुछ दिन पहले सेमराघाट निवासी कुलविंदर सिंह ने बाघ को अपने झाले के सामने खेत में देखा था। शोर मचाने पर गांव के लोग मौके पर आ गए। भीड़ देख बाघ पास के गन्ने के खेत में घुस गया।
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अगले दिन सुबह करीब पांच बजे डंडौरा गांव में खेत की रखवाली कर रहे अवधेश को बाघ दिखाई दिया। बाघ कई दिनों तक इसी इलाके में चहलकदमी करता रहा। रात में एक गाय को बाध ने अपना निवाला बना लिया था। इसकी सूचना पाते ही मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने कांबिंग की लेकिन बाघ की लोकेशन नहीं मिल पाई।
बाघ कई दिनों तक गन्ने के खेत में रहा है। उसके बाद बाघ ढखौरा निजामपुर, बाईकुआं, डंडौरा में कई दिनों तक आतंक फैलाता रहा जिससे ग्रामीण शाम होते ही अपने घरों में दुबक जाते थे। रविवार रात फिर सेमराघाट गांव के लोगों ने बाघ को खेतों में देखा जिससे ग्रामीण फिर दहशत में आ गए और इसकी सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दे दी है।
बाघ ने बछिया को निवाला बनाया
बांकेगंज। मैलानी रेंज के महुरेना बीट में जंगल से बाहर घास चर रहे मवेशियों के झुंड से बाघ ने बछिया को खींचकर निवाला बना लिया। बांकेपुर गांव निवासी राम दुलारे वर्मा की बछिया जंगल से बाहर मवेशियों से झुंड में चर रही थी। इसी बीच झाड़ियों से निकला एक बाघ बछिया को उठा ले गया और अपना निवाला बना लिया। घटना की सूचना वन विभाग को दी गई है।
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बेला में चौथे दिन एक खेत में बाघ के पगचिह्न दिखाई पड़े है। पार्क कर्मी और वार्डन ने पगचिह्नों को देखा और उनकी नपाई की तथा 6 कैमरे और लगवाए गए। बाघ के पगचिह्न मिलने से लोगों में दहशत और बढ़ गई है। पार्क अधिकारी बराबर निगरानी कर रहे हैं।
मालूम हो शुक्रवार को खैराहना निवासी किसान भिखारी राना को बेला में खेत की रखवाली करने के दौरान एक बाघ ने मार डाला था। घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए पार्क और नार्थ खीरी के अधिकारी चार कैमरों तथा दो हाथियों से बराबर निगरानी कर रहे हैं। घटना के अगले दिन से बाघ की कोई लोकेशन नहीं मिल रही थी। चौथे दिन बिरजू के खेत में वनाधिकारियों को बाघ के पगचिह्न नजर आए मगर कैमरों में बाघ की तस्वीर कैद नहीं हो सकी। सोमवार सुबह पहुंचे वार्डन एन के उपाध्याय, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी रोहित रवि, रेंजर कलीम अहमद, रेंजर राधेश्याम ने मौका मुआयना किया और पगचिह्नों की नपाई की। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम ने बताया छह कैमरे और लगाए गए हैं कैमरों की संख्या अब दस हो गई है। बराबर बाघ की मॉनीटिरिंग की जा रही है। गांव वालों से सतर्कता बरतने को कहा गया है। दरोगा वीर बहादुर सिंह, अमरपाल, कलाम , प्रहलाद सहित पार्क और नार्थ खीरी के वनकर्मी रात दिन बेला में ही डेरा डालकर बाघ की लोकेशन के साथ निगरानी कर रहे हैं। सोमवार बाघ के पगचिह्न दिखाई पड़ने से लोगों के होश उड़ गए हैं।
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अलियापुर गांव के पास फिर दिखा बाघ, दहशत
हैरमखेड़ा। मैगलगंज थाना क्षेत्र के अलियापुर गांव में रविवार रात फिर बाघ दिखाई दिया। इससे क्षेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं। बताते चलें कि कुछ दिन पहले सेमराघाट निवासी कुलविंदर सिंह ने बाघ को अपने झाले के सामने खेत में देखा था। शोर मचाने पर गांव के लोग मौके पर आ गए। भीड़ देख बाघ पास के गन्ने के खेत में घुस गया।
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अगले दिन सुबह करीब पांच बजे डंडौरा गांव में खेत की रखवाली कर रहे अवधेश को बाघ दिखाई दिया। बाघ कई दिनों तक इसी इलाके में चहलकदमी करता रहा। रात में एक गाय को बाध ने अपना निवाला बना लिया था। इसकी सूचना पाते ही मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने कांबिंग की लेकिन बाघ की लोकेशन नहीं मिल पाई।
बाघ कई दिनों तक गन्ने के खेत में रहा है। उसके बाद बाघ ढखौरा निजामपुर, बाईकुआं, डंडौरा में कई दिनों तक आतंक फैलाता रहा जिससे ग्रामीण शाम होते ही अपने घरों में दुबक जाते थे। रविवार रात फिर सेमराघाट गांव के लोगों ने बाघ को खेतों में देखा जिससे ग्रामीण फिर दहशत में आ गए और इसकी सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दे दी है।
बाघ ने बछिया को निवाला बनाया
बांकेगंज। मैलानी रेंज के महुरेना बीट में जंगल से बाहर घास चर रहे मवेशियों के झुंड से बाघ ने बछिया को खींचकर निवाला बना लिया। बांकेपुर गांव निवासी राम दुलारे वर्मा की बछिया जंगल से बाहर मवेशियों से झुंड में चर रही थी। इसी बीच झाड़ियों से निकला एक बाघ बछिया को उठा ले गया और अपना निवाला बना लिया। घटना की सूचना वन विभाग को दी गई है।