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बकाया भुगतान के लिए मिल प्रबंधन से मुलाकात
पलियाकलां
Updated Thu, 21 May 2015 07:13 PM IST
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जल्द गन्ना भुगतान के लिए किसान नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने चीनी मिल अधिकारियों से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में किसानाें को दी जा रही चीनी के दाम में 50 रुपये और कम करने की मांग की।
ब्लाक प्रमुख गुरुप्रीत सिंह जार्जी, सहकारी गन्ना विकास समिति अध्यक्ष और सपा नेता विकास कपूर, समिति के उपाध्यक्ष फरजंद अली बिंदु मियां, डायरेक्टर गुरुदेव सिंह, टाइगर कृषक क्लब के अध्यक्ष शेर सिंह सेखों, अवतार सिंह, अवधेश, इंद्रजीत सिंह फुलवरिया आदि तमाम किसान नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल पलिया चीनी मिल पहुंचा और वहां यूनिट हेड राकेश यादव, जीएम केन ओपी चौहान से वार्ता की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि चीनी देना तो वैकल्पिक व्यवस्था है, जरूरी है कि जल्द से जल्द किसानाें का बकाया भुगतान कराया जाए।
किसान नेताओं ने कहा कि अभी तक महज 23 दिसंबर तक का ही भुगतान हुआ है जो कि काफी कम है। भुगतान न होने के कारण किसानों को मजबूरन चीनी लेकर घाटे में बेचनी पड़ रही है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की किसानाें को दा जा रही चीनी के मूल्य में 50 रुपये और कम किए जाएं। उन्होंने कहा कि इस समय चीनी मिल और व्यापारी दोनाें ही मुनाफा कमा रहे हैं और नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है। चीनी मिल भुगतान नहीं कर पा रही है तो ऐसे में उसे अपना मुनाफा खत्म कर देना चाहिए ताकि किसान भी घाटे से बच सकें।
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मिल अधिकारियों ने कहा जल्द ही उच्च प्रबंधन को अवगत करा कर समस्या समाधान करा दिया जाएगा। केन सोसायटी अध्यक्ष के मुताबिक मिल ने दस क्विंटल तक चीनी लेने वाले किसानों के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था की है। साथ ही उन्होंने बताया कि जब तक मिल बंद हुई है उस तिथि तक जितना भी बकाया किसानाें का है वह पूरी चीनी ले सकता है। उन्होंने कहा है कि हमारी प्राथमिकता में नकद भुगतान है।
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ब्लाक प्रमुख गुरुप्रीत सिंह जार्जी, सहकारी गन्ना विकास समिति अध्यक्ष और सपा नेता विकास कपूर, समिति के उपाध्यक्ष फरजंद अली बिंदु मियां, डायरेक्टर गुरुदेव सिंह, टाइगर कृषक क्लब के अध्यक्ष शेर सिंह सेखों, अवतार सिंह, अवधेश, इंद्रजीत सिंह फुलवरिया आदि तमाम किसान नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल पलिया चीनी मिल पहुंचा और वहां यूनिट हेड राकेश यादव, जीएम केन ओपी चौहान से वार्ता की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि चीनी देना तो वैकल्पिक व्यवस्था है, जरूरी है कि जल्द से जल्द किसानाें का बकाया भुगतान कराया जाए।
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किसान नेताओं ने कहा कि अभी तक महज 23 दिसंबर तक का ही भुगतान हुआ है जो कि काफी कम है। भुगतान न होने के कारण किसानों को मजबूरन चीनी लेकर घाटे में बेचनी पड़ रही है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की किसानाें को दा जा रही चीनी के मूल्य में 50 रुपये और कम किए जाएं। उन्होंने कहा कि इस समय चीनी मिल और व्यापारी दोनाें ही मुनाफा कमा रहे हैं और नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है। चीनी मिल भुगतान नहीं कर पा रही है तो ऐसे में उसे अपना मुनाफा खत्म कर देना चाहिए ताकि किसान भी घाटे से बच सकें।
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मिल अधिकारियों ने कहा जल्द ही उच्च प्रबंधन को अवगत करा कर समस्या समाधान करा दिया जाएगा। केन सोसायटी अध्यक्ष के मुताबिक मिल ने दस क्विंटल तक चीनी लेने वाले किसानों के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था की है। साथ ही उन्होंने बताया कि जब तक मिल बंद हुई है उस तिथि तक जितना भी बकाया किसानाें का है वह पूरी चीनी ले सकता है। उन्होंने कहा है कि हमारी प्राथमिकता में नकद भुगतान है।