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सिर्फ तीन चीनी मिलें नहीं कर रहीं भुगतान
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 01 Jan 2015 05:35 PM IST
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जिले की नौ चीनी मिलों में छह मिलें ही किसानों को भुगतान कर रहीं हैं, लेकिन तीन मिलों ने अब तक एक पैसे का भुगतान नहीं किया है। लिहाजा तीन मिलों पर फिर एक अरब से अधिक बकाया हो गया है। इनमें से गोला मिल पर पिछले पेराई सत्र की 34 करोड़ देनदारी शेष है। कोर्ट के सख्त आदेश के बावजूद पिछले सत्र का बकाया भुगतान करने में देरी की जा रही है। प्रशासन इस मसले पर मौन साधे है।
2013-14 पेराई सत्र में किसानों को भुगतान पाने के लिए काफी मशक्कत उठानी पड़ी थी। ठीक वैसे ही हालात इस बार भी तीन चीनी मिलों ने बना दिए हैं, जोकि बजाज ग्रुप की हैं। पेराई सत्र 2014-15 में ऐरा मिल ने 15 दिसंबर 2014 तक खरीदे गए गन्ना मूल्य के सापेक्ष 18.82 करोड़ भुगतान कर दिया है। इसी तरह अजबापुर मिल ने 19 दिसंबर 2014 तक, कुंभी और गुलरिया मिल ने 20 दिसंबर तक, बेलरायां मिल ने 10 दिसंबर और संपूर्णानगर मिल ने सात दिसंबर 2014 तक खरीदे गए गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया है। जबकि गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलों ने अब तक किसानों को भुगतान के नाम पर एक धेला तक नहीं दिया है। गन्ना विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक गोला मिल पर 14 दिन पूर्व तक के हिसाब से 40 करोड़, पलिया मिल पर 34 करोड़ और खंभारखेड़ा मिल पर 36 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। जबकि 14 दिन के अंदर खरीदे गए गन्ना मूल्य का बकाया अलग है। इन तीनों मिलों पर 110 करोड़ बकाया होने के अलावा गोला मिल पर पिछले पेराई सत्र का 34 करोड़ बकाया है। इस लिहाज से किसानों का 1.44 अरब रुपये तीन मिलों पर बाकी है। विभाग या प्रशासन की ओर से भुगतान की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र्र यादव ने बताया कि चीनी बिक्री से पूरा भुगतान नहीं हो पाया था, लिहाजा मिल प्रबंधन अन्य स्रोतों से पैसे की व्यवस्था कर रहा है। छह जनवरी तक गोला मिल ने पिछला भुगतान करने का आश्वासन दिया है। नवीन पेराई सत्र का भुगतान सात जनवरी से करने की बात बजाज ग्रुप ने कही है। इसके बाद सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
स्टाक खत्म, फिर भी नहीं हो सका भुगतान
दिलचस्प बात यह है कि गोला मिल की पिछले पेराई सत्र का चीनी स्टाक निल हो चुका है, फिर भी किसानों का पूरा भुगतान नहीं किया गया। जबकि कोर्ट ने जिला प्रशासन की निगरानी में स्टाक की बिक्री कर भुगतान के आदेश दिए थे।
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2013-14 पेराई सत्र में किसानों को भुगतान पाने के लिए काफी मशक्कत उठानी पड़ी थी। ठीक वैसे ही हालात इस बार भी तीन चीनी मिलों ने बना दिए हैं, जोकि बजाज ग्रुप की हैं। पेराई सत्र 2014-15 में ऐरा मिल ने 15 दिसंबर 2014 तक खरीदे गए गन्ना मूल्य के सापेक्ष 18.82 करोड़ भुगतान कर दिया है। इसी तरह अजबापुर मिल ने 19 दिसंबर 2014 तक, कुंभी और गुलरिया मिल ने 20 दिसंबर तक, बेलरायां मिल ने 10 दिसंबर और संपूर्णानगर मिल ने सात दिसंबर 2014 तक खरीदे गए गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया है। जबकि गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलों ने अब तक किसानों को भुगतान के नाम पर एक धेला तक नहीं दिया है। गन्ना विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक गोला मिल पर 14 दिन पूर्व तक के हिसाब से 40 करोड़, पलिया मिल पर 34 करोड़ और खंभारखेड़ा मिल पर 36 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। जबकि 14 दिन के अंदर खरीदे गए गन्ना मूल्य का बकाया अलग है। इन तीनों मिलों पर 110 करोड़ बकाया होने के अलावा गोला मिल पर पिछले पेराई सत्र का 34 करोड़ बकाया है। इस लिहाज से किसानों का 1.44 अरब रुपये तीन मिलों पर बाकी है। विभाग या प्रशासन की ओर से भुगतान की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
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जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र्र यादव ने बताया कि चीनी बिक्री से पूरा भुगतान नहीं हो पाया था, लिहाजा मिल प्रबंधन अन्य स्रोतों से पैसे की व्यवस्था कर रहा है। छह जनवरी तक गोला मिल ने पिछला भुगतान करने का आश्वासन दिया है। नवीन पेराई सत्र का भुगतान सात जनवरी से करने की बात बजाज ग्रुप ने कही है। इसके बाद सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
स्टाक खत्म, फिर भी नहीं हो सका भुगतान
दिलचस्प बात यह है कि गोला मिल की पिछले पेराई सत्र का चीनी स्टाक निल हो चुका है, फिर भी किसानों का पूरा भुगतान नहीं किया गया। जबकि कोर्ट ने जिला प्रशासन की निगरानी में स्टाक की बिक्री कर भुगतान के आदेश दिए थे।
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