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...अब बाघिन ने बनाया गाय को निवाला
ब्यूरो पलियाकलां।
Updated Tue, 19 Apr 2016 10:50 PM IST
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गाय बनाया निवाला
- फोटो : अमर उजाला
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खेत बचाने को लगा पुतला भी ले गई उठाकर, शव वाले स्थान पर छोड़ा
रविवार की शाम को बिहारीपुरवा के ग्रामीण अंजनी को मारने के बाद सोमवार को बाघिन ने एक गाय को अपना निवाला बना लिया। इतना ही नहीं बाघिन एक खेत में लगे पुतले को भी उठा ले गई और उसे उसी स्थान पर डाल दिया, जहां उसने अंजनी को खाया था। इस घटना से लोग मान रहे हैं कि बाघिन आदमखोर हो चुकी है, इसी कारण वह पुतले को इंसान समझकर उठा ले ग गई।
गौरतलब है कि गांव बिहारीपुरवा निवासी अधेड़ अंजनी रविवार को दुधवा नेशनल पार्क के दक्षिण में सोनारीपुर रेंज से सटे जंगल के पास स्थित खेत में भूसा देखने के लिए गया था। रविवार की रात तक वह वापस घर नहीं आया तो सोमवार की सुबह घरवालों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। इसी दौरान जंगल के पास एक बाघिन और उसके दो शावक अंजनी के अधखाए शव के पास बैठे मिले। ग्रामीणों ने शोर शराबा कर बाघिन को खदेड़ा और शव को वहां से उठाया। इसी क्रम में बाघिन वहां एक बार फिर आई और वहां चर रही एक गाय को अपना निवाला बना लिया। इतना ही नहीं बाघिन खेत की रखवाली के लिए लगाए गए एक पुतले को भी उठा ले गए और उसी स्थान पर डाल दिया जहां उसने अंजनी को मारा था। पुतला उठा ले जाने की घटना से ग्रामीणों ने बाघिन को अब पूरी तरह से आदमखोर मान लिया है।
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
पलियाकलां में बाघिन का निवाला बने बिहारीपुरवा निवासी किसान अंजनी का शव जब पोस्टमार्टम के बाद शाम को घर पहुंचा तो वहां कोहराम मच गया। पूरा कुनबा दहाड़े मारकर रोने चीखने लगा। जिससे वहां पहुंचे लोगों की आंखें भी नम हो गईं। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और मृतक के घर लोगों का तांता लगा हुआ है।
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गांव वालों पर भारी है बाघिन का खौफ
पलियाकलां में अंजनी की मौत के बाद ग्रामीण काफी भयभीत हैं। अमर उजाला संवाददाता जब गांव पहुंचा तो ग्रामीण एक चौराहे पर पेड़ के नीचे बैठे थे और चर्चा कर रहे थे। ग्रामीण जसवंत, कल्लू, दौलतराम, सुंदरलाल आदि काफी खौफजदा दिखे। उन्होंने बताया कि वे इस समय खेतों की ओर नहीं जा रहे हैं। जिससे खेती के काम रुक गया है। इसके अलावा बच्चों के भी इधर उधर जाने पर नजर रखी जा रही है। सुंदरलाल ने कहा कि बाघिन ने बहुत पहले उन पर हमला बोला था लेकिन वह बाल बाल बच निकले थे। इंसान पर हमले के बाद बाघिन और भी खूंखार हो गई है और उसके गांव तक आने का भी खतरा बना हुआ है। यहां बता दें कि गांव और घटनास्थल में काफी दूरी नहीं है।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने दी सहायता
घटना के बाद पहुंचे डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन और वनक्षेत्राधिकारी ने मृतक के परिवारिजनों को दस हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। यह सहायता तात्कालिक है। इसके बाद भी मुआवजा दिया जाएगा।
पार्क कर्मियों ने की कांबिंग
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क की दक्षिण सोनारीपुर रेंज के कर्मियों ने उस स्थान की हाथी के साथ कांबिंग की जहां बाघिन ने अंजनी को अपना शिकार बनाया था। हालांकि कांबिंग में बाघिन की कोई लोकेशन नहीं मिल पाई। जिससे टीम वापस हो ली। पार्क अधिकारियों और कर्मियों ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने की अपील करते हुए उधर न जाने की सलाह दी है।
रविवार की शाम को बिहारीपुरवा के ग्रामीण अंजनी को मारने के बाद सोमवार को बाघिन ने एक गाय को अपना निवाला बना लिया। इतना ही नहीं बाघिन एक खेत में लगे पुतले को भी उठा ले गई और उसे उसी स्थान पर डाल दिया, जहां उसने अंजनी को खाया था। इस घटना से लोग मान रहे हैं कि बाघिन आदमखोर हो चुकी है, इसी कारण वह पुतले को इंसान समझकर उठा ले ग गई।
गौरतलब है कि गांव बिहारीपुरवा निवासी अधेड़ अंजनी रविवार को दुधवा नेशनल पार्क के दक्षिण में सोनारीपुर रेंज से सटे जंगल के पास स्थित खेत में भूसा देखने के लिए गया था। रविवार की रात तक वह वापस घर नहीं आया तो सोमवार की सुबह घरवालों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। इसी दौरान जंगल के पास एक बाघिन और उसके दो शावक अंजनी के अधखाए शव के पास बैठे मिले। ग्रामीणों ने शोर शराबा कर बाघिन को खदेड़ा और शव को वहां से उठाया। इसी क्रम में बाघिन वहां एक बार फिर आई और वहां चर रही एक गाय को अपना निवाला बना लिया। इतना ही नहीं बाघिन खेत की रखवाली के लिए लगाए गए एक पुतले को भी उठा ले गए और उसी स्थान पर डाल दिया जहां उसने अंजनी को मारा था। पुतला उठा ले जाने की घटना से ग्रामीणों ने बाघिन को अब पूरी तरह से आदमखोर मान लिया है।
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गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
पलियाकलां में बाघिन का निवाला बने बिहारीपुरवा निवासी किसान अंजनी का शव जब पोस्टमार्टम के बाद शाम को घर पहुंचा तो वहां कोहराम मच गया। पूरा कुनबा दहाड़े मारकर रोने चीखने लगा। जिससे वहां पहुंचे लोगों की आंखें भी नम हो गईं। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और मृतक के घर लोगों का तांता लगा हुआ है।
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गांव वालों पर भारी है बाघिन का खौफ
पलियाकलां में अंजनी की मौत के बाद ग्रामीण काफी भयभीत हैं। अमर उजाला संवाददाता जब गांव पहुंचा तो ग्रामीण एक चौराहे पर पेड़ के नीचे बैठे थे और चर्चा कर रहे थे। ग्रामीण जसवंत, कल्लू, दौलतराम, सुंदरलाल आदि काफी खौफजदा दिखे। उन्होंने बताया कि वे इस समय खेतों की ओर नहीं जा रहे हैं। जिससे खेती के काम रुक गया है। इसके अलावा बच्चों के भी इधर उधर जाने पर नजर रखी जा रही है। सुंदरलाल ने कहा कि बाघिन ने बहुत पहले उन पर हमला बोला था लेकिन वह बाल बाल बच निकले थे। इंसान पर हमले के बाद बाघिन और भी खूंखार हो गई है और उसके गांव तक आने का भी खतरा बना हुआ है। यहां बता दें कि गांव और घटनास्थल में काफी दूरी नहीं है।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने दी सहायता
घटना के बाद पहुंचे डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन और वनक्षेत्राधिकारी ने मृतक के परिवारिजनों को दस हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। यह सहायता तात्कालिक है। इसके बाद भी मुआवजा दिया जाएगा।
पार्क कर्मियों ने की कांबिंग
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क की दक्षिण सोनारीपुर रेंज के कर्मियों ने उस स्थान की हाथी के साथ कांबिंग की जहां बाघिन ने अंजनी को अपना शिकार बनाया था। हालांकि कांबिंग में बाघिन की कोई लोकेशन नहीं मिल पाई। जिससे टीम वापस हो ली। पार्क अधिकारियों और कर्मियों ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने की अपील करते हुए उधर न जाने की सलाह दी है।