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Lakhimpur Kheri News: न दवा और न दुष्प्रभाव, दर्द में मरहम बन रहा फिजियोथेरेपी
Sun, 07 Sep 2025 11:22 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 07 Sep 2025 11:22 PM IST
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जिला अस्पताल में थेरेपी करते फिजियोथेरेपिस्ट विवेक तिवारी। स्राेत : अस्पताल प्रशासन
लखीमपुर खीरी। घुटनों के दर्द, पीठ की तकलीफ और स्ट्रोक के बाद की स्थिति में अब लोग दवा के बजाय फिजियोथेरेपी पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। इससे न केवल दर्द से राहत मिलती है, बल्कि लंबे समय तक इसके दुष्प्रभाव भी नहीं होते।
यही कारण है कि मरीज लगातार ऑपरेशन और दवाओं से बचते हुए फिजियोथेरेपी को प्राथमिकता दे रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजियोथेरिपिस्ट विवेक तिवारी ने बताया कि मरीजों का रुझान बढ़ना सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में फिजियोथेरेपी आधुनिक चिकित्सा पद्धति का अहम हिस्सा बनकर सामने आएगी।
फिजियोथेरेपी विभाग में प्रतिदिन करीब 15-20 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इसमें कंधा जाम, घुटनों की जकड़न, रीढ़ की हड्डी का दर्द, लकवा और खेलकूद से जुड़ी चोटों के मरीज शामिल हैं, जिन्हें बेहतर परिणाम भी मिले हैं।
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उन्होंने बताया कि लगातार दवाइयों के सेवन से शरीर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जबकि फिजियोथेरेपी प्राकृतिक तरीके से दर्द को नियंत्रित करती है और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। फिजियोथेरेपी सबसे सुरक्षित विकल्प है। इसके जरिये मरीज न केवल अपनी दैनिक गतिविधियां सामान्य रूप से कर पाते हैं, बल्कि लंबे समय तक चलने-फिरने की क्षमता भी बनाए रखते हैं।
बर्न वार्ड से लेकर पैरालाइसिस के मरीजों को दी जा रही सुविधा
जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट विवेक तिवारी ने बताया कि अस्पताल में ओपीडी के अलावा वार्ड में भी मरीजों को फिजियोथेरेपी कराई जा रही है। बर्न वार्ड से लेकर पैरालाइसिस की चपेट में आकर भर्ती होने वाले मरीजों को भी वार्ड में जाकर उन्हें थेरेपी का लाभ दिया जा रहा है।
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कमर में काफी दिनों से दर्द था। दवा खाने तक तो आराम रहा, लेकिन बंद करते ही फिर दर्द होने लगा। कुछ महीनों से फिजियोथेरेपी की मदद ली। बताए गए व्यायाम कर रहे हैं। पहले से काफी आराम मिला है।
नीलम, लखीमपुर
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सर्वाइकल की समस्या होने पर कई अस्पतालों से दवा लाए। तुरंत तो दर्द से आराम मिल जाता था, लेकिन बाद में फिर वही स्थिति हो जाती थी। जिला अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट ने जो एक्सरसाइज बताई, वही कर रहे हैं। इससे आराम तो मिला है।
आशीष, बेहजम
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कंधा जाम होने पर इन बातों का रखें ध्यान
-बैठते या खड़े होते समय कंधों को सीधा रखें। कंधा जाम होने पर गर्म पानी या आइस थैली से 15 मिनट तक सिकाई करें। चिकित्सक की सलाह पर ही दर्द की दवा खाएं। प्रभावित हाथ से अधिक वजह का सामान न उठाएं। दर्द और जकड़न होने पर चिकित्सक या फिजियोथेरिपिस्ट से सलाह लें।
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यही कारण है कि मरीज लगातार ऑपरेशन और दवाओं से बचते हुए फिजियोथेरेपी को प्राथमिकता दे रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजियोथेरिपिस्ट विवेक तिवारी ने बताया कि मरीजों का रुझान बढ़ना सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में फिजियोथेरेपी आधुनिक चिकित्सा पद्धति का अहम हिस्सा बनकर सामने आएगी।
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फिजियोथेरेपी विभाग में प्रतिदिन करीब 15-20 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इसमें कंधा जाम, घुटनों की जकड़न, रीढ़ की हड्डी का दर्द, लकवा और खेलकूद से जुड़ी चोटों के मरीज शामिल हैं, जिन्हें बेहतर परिणाम भी मिले हैं।
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उन्होंने बताया कि लगातार दवाइयों के सेवन से शरीर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जबकि फिजियोथेरेपी प्राकृतिक तरीके से दर्द को नियंत्रित करती है और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। फिजियोथेरेपी सबसे सुरक्षित विकल्प है। इसके जरिये मरीज न केवल अपनी दैनिक गतिविधियां सामान्य रूप से कर पाते हैं, बल्कि लंबे समय तक चलने-फिरने की क्षमता भी बनाए रखते हैं।
बर्न वार्ड से लेकर पैरालाइसिस के मरीजों को दी जा रही सुविधा
जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट विवेक तिवारी ने बताया कि अस्पताल में ओपीडी के अलावा वार्ड में भी मरीजों को फिजियोथेरेपी कराई जा रही है। बर्न वार्ड से लेकर पैरालाइसिस की चपेट में आकर भर्ती होने वाले मरीजों को भी वार्ड में जाकर उन्हें थेरेपी का लाभ दिया जा रहा है।
कमर में काफी दिनों से दर्द था। दवा खाने तक तो आराम रहा, लेकिन बंद करते ही फिर दर्द होने लगा। कुछ महीनों से फिजियोथेरेपी की मदद ली। बताए गए व्यायाम कर रहे हैं। पहले से काफी आराम मिला है।
नीलम, लखीमपुर
सर्वाइकल की समस्या होने पर कई अस्पतालों से दवा लाए। तुरंत तो दर्द से आराम मिल जाता था, लेकिन बाद में फिर वही स्थिति हो जाती थी। जिला अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट ने जो एक्सरसाइज बताई, वही कर रहे हैं। इससे आराम तो मिला है।
आशीष, बेहजम
कंधा जाम होने पर इन बातों का रखें ध्यान
-बैठते या खड़े होते समय कंधों को सीधा रखें। कंधा जाम होने पर गर्म पानी या आइस थैली से 15 मिनट तक सिकाई करें। चिकित्सक की सलाह पर ही दर्द की दवा खाएं। प्रभावित हाथ से अधिक वजह का सामान न उठाएं। दर्द और जकड़न होने पर चिकित्सक या फिजियोथेरिपिस्ट से सलाह लें।