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प्राकृतिक पौधों को संरक्षण दिया जाए : डॉ. प्रवीण
Thu, 02 Oct 2025 12:08 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 02 Oct 2025 12:08 AM IST
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पसगवां। इंडियन फाॅरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार वर्मा और डॉ. आशीष सिंह चौहान ने गोमती नदी के वन क्षेत्र के पौधों और उनकी प्रजातियों का जिओ टैगिंग सर्वे किया। इस कार्य में गोमती एवं पर्यावरण मित्र हरेंद्र वर्मा ने उनका सहयोग किया।
यह सर्वे बरबर क्षेत्र के बरुआ घाट, अमरी देवी घाट, जंगली नाथ, इमलिया घाट और जमुनिया घाट के आसपास जंगल में हुआ। गोमती मित्र हरेंद्र वर्मा के पूछने पर वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार वर्मा ने बताया कि लखीमपुर में गोमती के आसपास बहुत ही दुर्लभ प्रजाति के पौधे दिखाई दिए हैं।
उनके संरक्षण की आवश्यकता है। यहां की वनस्पतियां बहुत विविधता लिए हुए हैं। डॉ. प्रवीण कुमार वर्मा ने बताया कि अभी तक यहां के पौधों की जिओ टैगिंग नहीं हुई है जो पहली बार हो रही है।
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उन्होंने कहा कि गोमती के जंगल शोध का विषय हैं। यहां की जैवविविधता और पारिस्थितिकी बहुत समृद्ध है। वे इसके लिए प्रयास करेंगे कि गोमती और उसके पारिस्थितिकी तंत्र पर शोधकार्य हो। गोमती नदी का महत्व देश और दुनिया के सामने आए। संवाद
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यह सर्वे बरबर क्षेत्र के बरुआ घाट, अमरी देवी घाट, जंगली नाथ, इमलिया घाट और जमुनिया घाट के आसपास जंगल में हुआ। गोमती मित्र हरेंद्र वर्मा के पूछने पर वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार वर्मा ने बताया कि लखीमपुर में गोमती के आसपास बहुत ही दुर्लभ प्रजाति के पौधे दिखाई दिए हैं।
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उनके संरक्षण की आवश्यकता है। यहां की वनस्पतियां बहुत विविधता लिए हुए हैं। डॉ. प्रवीण कुमार वर्मा ने बताया कि अभी तक यहां के पौधों की जिओ टैगिंग नहीं हुई है जो पहली बार हो रही है।
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उन्होंने कहा कि गोमती के जंगल शोध का विषय हैं। यहां की जैवविविधता और पारिस्थितिकी बहुत समृद्ध है। वे इसके लिए प्रयास करेंगे कि गोमती और उसके पारिस्थितिकी तंत्र पर शोधकार्य हो। गोमती नदी का महत्व देश और दुनिया के सामने आए। संवाद