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एंबुलेंस से लाई गर्भवती और घर छोड़ी गईं प्रसूताओं के नाम-पते निकले फर्जी

Tue, 07 Jun 2022 01:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 01:03 AM IST
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Names and addresses of pregnant and abandoned mothers brought from ambulance turned out to be fake
अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस।
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6 एलकेएच 12
जांच में एंबुलेंस सेवा में मिला घोटाला
एंबुलेंस से लाई गर्भवती और घर छोड़ी गईं प्रसूताओं के नाम-पते निकले फर्जी
- शासन के निर्देश पर 108, 102 एवं एएलएस एंबुलेंस सेवा की शुरू हुई जांच
- मरीजों को लाने-ला जाने के लिए जिले में कुल 98 दौड़ रहीं एंबुलेंस
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। शासन के निर्देश पर 108, 102 एवं एएलएस एंबुलेंस से अस्पताल लाए गए मरीजों का सत्यापन शुरू हो गया है। जांच टीम ने महिला अस्पताल और सात सीएचसी पर प्रसव के लिए आईं गर्भवती महिलाएं और वापस घर छोड़ी गईं प्रसूताओं के नाम, पता एवं मोबाइल नंबर का सत्यापन किया। शुरूआती जांच में ही मोबाइल नंबर और पते फर्जी मिले हैं। इस पर टीम ने घर पर जाकर भौतिक सत्यापन करने की रणनीति बनाई है।
सोमवार को सीएमओ कार्यालय सभागार में 102 एंबुलेंस सेवा की जांच शुरू हुई। इसके लिए महिला अस्पताल सहित सात सीएचसी की स्टाफ नर्स, नर्स मेंटर, फार्मासिस्ट, डाटा इंट्री ऑपरेटर, मेडिकल अफसर एवं एंबुलेंस प्रभारी को तलब किया गया था। जांच टीम ने प्रदेश मुख्यालय से भेजे गए गर्भवती महिलाओं के डाटा की जब क्रॉस चेकिंग की तो मामले चौकाने वाले सामने आए। जांच टीम के अनुसार, प्रदेश मुख्यालय से गर्भवती महिलाओं के मिले दस्तावेजों पर अंकित मोबाइल नंबर जब मिलाए गए तो वह आशा वर्कर से लेकर एंबुलेंस के चालक और ईएमटी के निकले।
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एंबुलेंस पहुंची नहीं, फिर भी बना दिया केस
जांच टीम के मुताबिक, कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें फोन करने के बावजूद गर्भवती महिला को एंबुलेंस नहीं मिली। मगर, एंबुलेंस स्टाफ ने रजिस्टर पर नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज कर अस्पताल ले जाना दिखा दिया, जबकि फोन करने पर तमाम महिलाओं के नाम, पते और मोबाइल नंबर गलत मिले हैं। इस पर टीम ने मौके पर जाकर सत्यापन करने का निर्णय लिया है।
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एक चक्कर का मिलता है 4500 रुपये
जांच के दौरान गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल तक लाने इसके बाद प्रसूता को घर तक छोड़ने के बदले सरकार की ओर से एंबुलेंस को 4500 रुपये का भुगतान किया जाता है। सूत्रों की मानें तो भुगतान अधिक बने, इसलिए एंबुलेंस स्टाफ पर केस ज्यादा करने का दबाव बनाया जाता है। इसलिए स्टाफ फर्जी नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज कर केस बना देते हैं और कंपनी को केस संख्या के अनुसार पेमेंट मिल जाता है।

पहले दिन 102 एंबुलेंस की जांच पड़ताल की गई। इसके लिए सात सीएचसी सहित महिला अस्पताल स्टाफ एवं एंबुलेंस सेवा प्रभारी को तलब किया गया था। आठ सीएचसी के लोगों को मंगलवार को बुलाया गया। इसके बाद 108 एवं एएलएस से आए मरीजों की जांच होगी।
- डॉ. धनीराम, डिप्टी सीएमओ
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