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तालाब को पाटकर खेती कर रहे भूमाफिया
टीएन अवस्थी लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 10 Dec 2017 11:40 PM IST
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भूमाफिया
- फोटो : अमर उजाला
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- डेढ़ दशक में डेढ़ किलोमीटर लंबे इस तालाब का वजूद भूमाफिया ने कर दिया है खत्म
- लेखपालों और ग्राम प्रधानों पर है अवैध कब्जेदारों से साठगांठ का आरोप
निघासन तहसील में भूमाफिया ने सुप्रीम कोर्ट की परवाह किए बिना डेढ़ किलोमीटर लंबे तालाब के वजूद को मिटा दिया। राजस्वकर्मियों और प्रधानों की शह मिलने से करीब डेढ़ दशक से इस पर खेती हो रही है, लेकिन राजस्व अधिकारी जानकर भी अनजान हैं।
भूगर्भ जलस्तर को स्थिर रखने में सहायक और पर्यावरण सुरक्षा के लिए जरूरी तालाब-पोखर भूमाफिया के निशाने पर हैं। तालाबों और अन्य जलाशयों को सुरक्षित रखने की शीर्ष अदालत की हिदायत और सरकार की एंटी भूमाफिया टीमें गठित होने के बावजूद यह तालाब कब्जे से मुक्त नहीं हो पाया है। दुधवा टाइगर रिजर्व से सटे गांव महाराजनगर के बाहर 15.6380 हेक्टेयर का तालाब है, जिसकी खतौनी पर खाता संख्या 00119 दर्ज है। यह तालाब रनवास तालाब से गांव महाराजनगर तक करीब डेढ़ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसे छोटी भूहर और बड़ी भूहर के नाम से भी जाना जाता है।
तालाब कब्जाने में हल्का लेखपाल और प्रधान भी शामिल
जंगल से सटा होने के कारण इस तालाब का पानी जंगली जानवरों और पालतू जानवरों के पीने के काम आता था। बरसात में गांव और खेतों का पानी भी इसी तालाब में एकत्र होता था। यह तालाब जलीय जैव विविधता से संपन्न था। करीब 10 साल पहले भू-माफियाओं ने इस तालाब को पाटना शुरू कर दिया। अब यह पटकर मैदान बन चुका है। आज हालत यह है कि इस पर कई भू-माफिया धान-गेहूं, गन्ने आदि की खेती कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो यह कब्जा हल्का लेखपाल और प्रधान से मिलीभगत से हुआ है, जिसमें हर साल लाखों की फसल उगाई जा रही है, जिसका हिस्सा राजस्वकर्मियों तक भी जाता है।
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एंटी भूमाफिया टीम ने भी इधर नहीं किया रुख
तालाबों, पोखरों और सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए बनाई गई एंटी भूमाफिया टीम ने भी कभी इस विशालकाय तालाब की ओर रुख नहीं किया। बताते हैं कि एंटी भूमाफिया टीम में भी राजस्व के वही लोग शामिल हैं जो इन अवैध कब्जों के जिम्मेदार हैं। शायद यही वजह है कि राजस्व विभाग इस कब्जे से अंजान है।
नाले पर भी हो रहा कब्जा
गांव महाराजनगर के पास से करीब चार मीटर चौड़ा नाला निकला हुआ है, जो रनवास ताल में जाकर मिलता है। इस नाले को भी भूमाफिया ने कई जगहों पर पाटकर उसे खेत में मिला लिया है, इससे पानी का निकास पूरी तरह से रुक गया है। पानी का निकास न होने के कारण बरसात में फसलें कई दिनों तक रहने वाले जलभराव से बर्बाद होती हैं।
निघासन तहसील क्षेत्र में तालाब पर भूमाफिया के कब्जे की जानकारी अमर उजाला से मिली है। तालाब को पाटकर खेत बनाने की घटना गंभीर है। संबंधित एसडीएम से मामले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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- लेखपालों और ग्राम प्रधानों पर है अवैध कब्जेदारों से साठगांठ का आरोप
निघासन तहसील में भूमाफिया ने सुप्रीम कोर्ट की परवाह किए बिना डेढ़ किलोमीटर लंबे तालाब के वजूद को मिटा दिया। राजस्वकर्मियों और प्रधानों की शह मिलने से करीब डेढ़ दशक से इस पर खेती हो रही है, लेकिन राजस्व अधिकारी जानकर भी अनजान हैं।
भूगर्भ जलस्तर को स्थिर रखने में सहायक और पर्यावरण सुरक्षा के लिए जरूरी तालाब-पोखर भूमाफिया के निशाने पर हैं। तालाबों और अन्य जलाशयों को सुरक्षित रखने की शीर्ष अदालत की हिदायत और सरकार की एंटी भूमाफिया टीमें गठित होने के बावजूद यह तालाब कब्जे से मुक्त नहीं हो पाया है। दुधवा टाइगर रिजर्व से सटे गांव महाराजनगर के बाहर 15.6380 हेक्टेयर का तालाब है, जिसकी खतौनी पर खाता संख्या 00119 दर्ज है। यह तालाब रनवास तालाब से गांव महाराजनगर तक करीब डेढ़ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसे छोटी भूहर और बड़ी भूहर के नाम से भी जाना जाता है।
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तालाब कब्जाने में हल्का लेखपाल और प्रधान भी शामिल
जंगल से सटा होने के कारण इस तालाब का पानी जंगली जानवरों और पालतू जानवरों के पीने के काम आता था। बरसात में गांव और खेतों का पानी भी इसी तालाब में एकत्र होता था। यह तालाब जलीय जैव विविधता से संपन्न था। करीब 10 साल पहले भू-माफियाओं ने इस तालाब को पाटना शुरू कर दिया। अब यह पटकर मैदान बन चुका है। आज हालत यह है कि इस पर कई भू-माफिया धान-गेहूं, गन्ने आदि की खेती कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो यह कब्जा हल्का लेखपाल और प्रधान से मिलीभगत से हुआ है, जिसमें हर साल लाखों की फसल उगाई जा रही है, जिसका हिस्सा राजस्वकर्मियों तक भी जाता है।
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एंटी भूमाफिया टीम ने भी इधर नहीं किया रुख
तालाबों, पोखरों और सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए बनाई गई एंटी भूमाफिया टीम ने भी कभी इस विशालकाय तालाब की ओर रुख नहीं किया। बताते हैं कि एंटी भूमाफिया टीम में भी राजस्व के वही लोग शामिल हैं जो इन अवैध कब्जों के जिम्मेदार हैं। शायद यही वजह है कि राजस्व विभाग इस कब्जे से अंजान है।
नाले पर भी हो रहा कब्जा
गांव महाराजनगर के पास से करीब चार मीटर चौड़ा नाला निकला हुआ है, जो रनवास ताल में जाकर मिलता है। इस नाले को भी भूमाफिया ने कई जगहों पर पाटकर उसे खेत में मिला लिया है, इससे पानी का निकास पूरी तरह से रुक गया है। पानी का निकास न होने के कारण बरसात में फसलें कई दिनों तक रहने वाले जलभराव से बर्बाद होती हैं।
निघासन तहसील क्षेत्र में तालाब पर भूमाफिया के कब्जे की जानकारी अमर उजाला से मिली है। तालाब को पाटकर खेत बनाने की घटना गंभीर है। संबंधित एसडीएम से मामले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम