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ये है लखीमपुर का प्लेटफार्म, न पानी, न बैठने की व्यवस्था
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 22 Feb 2016 07:06 PM IST
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शहर का रेलवे स्टेशन दिन ब दिन बदहाल होता जा रहा है। यहां यात्री मुकम्मल सुविधाओं की कई साल से बांट जोह रहे हैं। लेकिन आज तक उन्हें न तो पीने का साफ पानी ही मिल पाता है और न ही प्रकाश और बैठने की उचित व्यवस्था मिलती है। हाल तो यह है कि अक्सर मुसाफिर खाली पूछताछ कक्ष देखकर मायूस होकर लौट जाते हैं। ऐसे में इस साल आने वाले रेल बजट से यात्रियों को काफी उम्मीदें हैं। रेल बजट से पहले अमर उजाला ने प्लेटफार्म पर जब यात्री सुविधाओं का हाल देखा तो ऐसी तस्वीर सामने आई-
सीन एक
गाड़ियों की नहीं मिलती जानकारी
प्लेटफार्म पर पूछताछ कक्ष के बाहर गाड़ियों की स्थिति जानने के लिए यात्री परेशान रहते हैं। खाली पूछताछ कक्ष, बंद एलसीडी न तो अप डाउन गाड़ी का पता देती है और न ही उनके समय का। इससे यात्रियों को ट्रेनों की स्थिति की सही समय पर जानकारी नहीं मिलती है।
सीन दो
यहां तो बैठने के लिए नहीं है पर्याप्त सीटें
रेलवे प्लेटफार्म पर पर्याप्त सीटें नहीं हैं, जिससे यात्रियों को जमीन पर बैठना पड़ता है। गाड़ी विलंब से होने पर यात्रियों की संख्या बढ़ती है तो सीटों की कमी और ज्यादा खलने लगती है। टिकट विंडो हाल में एक भी सीट नहीं है। मजबूरन जमीन पर ही यात्रियों को बैठना पड़ता है।
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सीन तीन
नोटिस बोर्ड में नजर आते हैं पोस्टर
यात्रियों और कर्मचारियों के लिए प्लेटफार्म पर लगाया गया नोटिस बोर्ड औचित्यहीन हैं, क्योंकि इस पर यूनियन का कब्जा है। यूनियन के पोस्टर ही इसमें लगे नजर आते हैं।
सीन चार
दो विंडो से टिकट की मारामारी
प्लेटफार्म पर चार टिकट विंडो खुलनी चाहिए, लेकिन प्रिंटर और सिस्टम की खराबी के कारण दो ही विंडो खुलती हैं, जिससे काफी भीड़ लग जाती है और विंडो पर मारामारी होने लगती है। इससे टिकट लेने वाले यात्रियों को खासी दिक्कत होती है।
सीन पांच
प्यासे रह जाते हैं यात्रियों के कंठ
प्लेटफार्म पर कहने को तो पानी की एक दर्जन से अधिक टोटियां लगी हुई हैं, लेकिन साफ पानी न आने के चलते यात्रियों के कंठ प्यासे रह जाते हैं। वहीं, प्लेटफार्म पर लगे आधे से ज्यादा नलों से दिनभर पानी बहता रहता है।
माल भाड़ा सस्ता और डिलीवरी आसान हो
लखीमपुर खीरी। भले ही ऐशबाग-पीलीभीत रेल प्रखंड पर अमान परिवर्तन होने में अभी डेढ़ से दो साल का वक्त हो, लेकिन जिले के व्यापारियों को वित्तीय वर्ष 2016 के रेल बजट से काफी उम्मीदें हैं। व्यापारियों को रेल बजट में माल भाड़ा सस्ता होने और आसानी से तुरंत बुक कराए गए माल की डिलीवरी मिलने संबंधी अलग से नियम लागू होने की उम्मीद है।
व्यापारी मान रहे हैं कि अगर माल भाड़ा बढ़ा तो इसका सीधा असर फुटकर व्यापार पर पड़ेगा और रोजमर्रा की वस्तुएं और महंगी होंगी। रेल बजट में लखीमपुर के व्यापारिक गतिविधियों को देने के लिए यहां मालगोदाम के निर्माण का प्रावधान किए जाने की भी मांग की जा रही है। हालांकि ज्यादातर व्यापारियों का कहना है ऐशबाग से पीलीभीत तक अमान परिवर्तन का कार्य रफ्तार पकड़ने के बाद ही जिले की व्यापारिक गतिविधियां जोर पकड़ पाएंगी।
बड़ी लाइन के निर्माण की रफ्तार बढ़ाई जाए
सबसे पहली जरूरत बड़ी रेल के निर्माण की रफ्तार बढ़ाने की है, इसके बाद ही हम मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे। सरकार यात्री किराया पहले ही बढ़ा चुकी है। बजट में माल भाड़ा न बढ़ाया जाए।
-अशोक गुप्ता, जिला महामंत्री व्यापार मंडल कंछल गुट
आरक्षण में निश्चित हो व्यापारियों का कोटा
इस बार रेल बजट में आरक्षण में व्यापारियों का कोटा निश्चित किया जाना चाहिए। माल भाड़ा सस्ता हो और डिलीवरी तुरंत मिले। लखीमपुर से 10 किलोमीटर के इर्द-गिर्द मालगोदाम का निर्माण कराया जाए। ताकि यहां के व्यापारी सीधे महानगरों से व्यापार कर सकें।
-राकेश मिश्रा, जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल मिश्रा गुट
रेल बजट में शामिल हो लखीमपुर का मालगोदाम
बड़ी रेल लाइन के निर्माण से उम्मीद थी कि यहां मालगोदाम का निर्माण कर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन रेलवे ने मालगोदाम खत्म कर दिया है। इससे जिले का व्यापार चौपट हो जाएगा।
- प्रेमशंकर अग्रवाल, व्यापारी एवं समाजसेवी
रेल बजट से दिक्कतों के समाधान की उम्मीद
यहां से मालगोदाम के खत्म करने से परेशानी और बढ़ेगी। हर रेल बजट से व्यापारियों को उनके दिक्कतों के समाधान की उम्मीद रहती है, लेकिन कभी भी ऐसा नहीं हुआ। जरूरत है कि यहां मालगोदाम को फिर से शुरू किया जाए।
- श्रवण अग्रवाल, दाल व्यापारी
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सीन एक
गाड़ियों की नहीं मिलती जानकारी
प्लेटफार्म पर पूछताछ कक्ष के बाहर गाड़ियों की स्थिति जानने के लिए यात्री परेशान रहते हैं। खाली पूछताछ कक्ष, बंद एलसीडी न तो अप डाउन गाड़ी का पता देती है और न ही उनके समय का। इससे यात्रियों को ट्रेनों की स्थिति की सही समय पर जानकारी नहीं मिलती है।
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सीन दो
यहां तो बैठने के लिए नहीं है पर्याप्त सीटें
रेलवे प्लेटफार्म पर पर्याप्त सीटें नहीं हैं, जिससे यात्रियों को जमीन पर बैठना पड़ता है। गाड़ी विलंब से होने पर यात्रियों की संख्या बढ़ती है तो सीटों की कमी और ज्यादा खलने लगती है। टिकट विंडो हाल में एक भी सीट नहीं है। मजबूरन जमीन पर ही यात्रियों को बैठना पड़ता है।
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सीन तीन
नोटिस बोर्ड में नजर आते हैं पोस्टर
यात्रियों और कर्मचारियों के लिए प्लेटफार्म पर लगाया गया नोटिस बोर्ड औचित्यहीन हैं, क्योंकि इस पर यूनियन का कब्जा है। यूनियन के पोस्टर ही इसमें लगे नजर आते हैं।
सीन चार
दो विंडो से टिकट की मारामारी
प्लेटफार्म पर चार टिकट विंडो खुलनी चाहिए, लेकिन प्रिंटर और सिस्टम की खराबी के कारण दो ही विंडो खुलती हैं, जिससे काफी भीड़ लग जाती है और विंडो पर मारामारी होने लगती है। इससे टिकट लेने वाले यात्रियों को खासी दिक्कत होती है।
सीन पांच
प्यासे रह जाते हैं यात्रियों के कंठ
प्लेटफार्म पर कहने को तो पानी की एक दर्जन से अधिक टोटियां लगी हुई हैं, लेकिन साफ पानी न आने के चलते यात्रियों के कंठ प्यासे रह जाते हैं। वहीं, प्लेटफार्म पर लगे आधे से ज्यादा नलों से दिनभर पानी बहता रहता है।
माल भाड़ा सस्ता और डिलीवरी आसान हो
लखीमपुर खीरी। भले ही ऐशबाग-पीलीभीत रेल प्रखंड पर अमान परिवर्तन होने में अभी डेढ़ से दो साल का वक्त हो, लेकिन जिले के व्यापारियों को वित्तीय वर्ष 2016 के रेल बजट से काफी उम्मीदें हैं। व्यापारियों को रेल बजट में माल भाड़ा सस्ता होने और आसानी से तुरंत बुक कराए गए माल की डिलीवरी मिलने संबंधी अलग से नियम लागू होने की उम्मीद है।
व्यापारी मान रहे हैं कि अगर माल भाड़ा बढ़ा तो इसका सीधा असर फुटकर व्यापार पर पड़ेगा और रोजमर्रा की वस्तुएं और महंगी होंगी। रेल बजट में लखीमपुर के व्यापारिक गतिविधियों को देने के लिए यहां मालगोदाम के निर्माण का प्रावधान किए जाने की भी मांग की जा रही है। हालांकि ज्यादातर व्यापारियों का कहना है ऐशबाग से पीलीभीत तक अमान परिवर्तन का कार्य रफ्तार पकड़ने के बाद ही जिले की व्यापारिक गतिविधियां जोर पकड़ पाएंगी।
बड़ी लाइन के निर्माण की रफ्तार बढ़ाई जाए
सबसे पहली जरूरत बड़ी रेल के निर्माण की रफ्तार बढ़ाने की है, इसके बाद ही हम मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे। सरकार यात्री किराया पहले ही बढ़ा चुकी है। बजट में माल भाड़ा न बढ़ाया जाए।
-अशोक गुप्ता, जिला महामंत्री व्यापार मंडल कंछल गुट
आरक्षण में निश्चित हो व्यापारियों का कोटा
इस बार रेल बजट में आरक्षण में व्यापारियों का कोटा निश्चित किया जाना चाहिए। माल भाड़ा सस्ता हो और डिलीवरी तुरंत मिले। लखीमपुर से 10 किलोमीटर के इर्द-गिर्द मालगोदाम का निर्माण कराया जाए। ताकि यहां के व्यापारी सीधे महानगरों से व्यापार कर सकें।
-राकेश मिश्रा, जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल मिश्रा गुट
रेल बजट में शामिल हो लखीमपुर का मालगोदाम
बड़ी रेल लाइन के निर्माण से उम्मीद थी कि यहां मालगोदाम का निर्माण कर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन रेलवे ने मालगोदाम खत्म कर दिया है। इससे जिले का व्यापार चौपट हो जाएगा।
- प्रेमशंकर अग्रवाल, व्यापारी एवं समाजसेवी
रेल बजट से दिक्कतों के समाधान की उम्मीद
यहां से मालगोदाम के खत्म करने से परेशानी और बढ़ेगी। हर रेल बजट से व्यापारियों को उनके दिक्कतों के समाधान की उम्मीद रहती है, लेकिन कभी भी ऐसा नहीं हुआ। जरूरत है कि यहां मालगोदाम को फिर से शुरू किया जाए।
- श्रवण अग्रवाल, दाल व्यापारी