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बजट का अभाव : 2139 नौनिहालों को सरकारी इमदाद का इंतजार

Fri, 07 Feb 2025 11:39 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2025 11:39 PM IST
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Lack of budget: 2139 children waiting for government help
लखीमपुर खीरी। यूपी सरकार की महत्वपूर्ण स्पॉन्सरशिप योजना बजट न मिल पाने से जिले में थम गई है। इस योजना के तहत बेसहारा बच्चों को जीवन यापन करने और पढ़ाई-लिखाई के लिए चार हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाने थे, लेकिन कई माह से बजट न होने के कारण दो हजार से अधिक बच्चों को सहायता राशि मिलने का इंतजार है।
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निराश्रित बच्चों के लिए पिछले साल यूपी सरकार द्वारा स्पॉन्सरशिप योजना को अमलीजामा पहनाया गया था। इस योजना के तहत बेसहारा बच्चों को उनकी शिक्षा व पालन-पोषण के लिए बालिग होने तक चार हजार रुपये प्रतिमाह देने थे। सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि अनाथ बच्चे के खाते में जाती है। इसमें वैध अभिभावक ही पैसे निकाल सकते हैं।
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जिन बच्चों के माता-पिता में कोई एक जीवित है, वो संरक्षक के तहत पैसे निकाल सकते हैं। पहले चरण में जिले के करीब 95 बच्चों को इस योजना का लाभ दिया गया था। हालांकि धीरे-धीरे विभाग के पास करीब 2295 आवेदन हो गए। विभाग द्वारा 1875 छात्रों का चयन भी कर लिया गया, लेकिन अभी तक इस योजना का लाभ सिर्फ 156 बच्चों को ही दिया जा रहा है। विभाग के पास एक वर्ष से बजट न होने के कारण 2139 बच्चे अभी भी मदद का इंतजार कर रहे हैं।
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इन बच्चों को मिलना है योजना का लाभ
-वे बच्चे, जिनके माता-पिता की मौत हो गई हो, मां तलाकशुदा या परिवार से अलग हो गई हो।
-जिनके माता-पिता या उनमें से कोई एक गंभीर अथवा जानेलवा बीमारी से ग्रसित हो।
-ऐसे बच्चे, जो बेघर हैं, निराश्रित हैं या विस्थापित परिवार के साथ रह रहे हैं।
-जो कानून से संघर्षरत हैं, जिन्हें बाल तस्करी, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया हो।
-ऐसे बच्चे जो किसी प्राकृतिक आपदा के शिकार हों, दिव्यांग, लापता या घर से भागे हुए हैं।
-जिनके माता-पिता या उनमें से एक कारागार में निरुद्ध हैं या एचआइवी एड्स से ग्रसित बच्चे।
-जिन बच्चों के माता-पिता आर्थिक, शारीरिक या मानसिक रूप से देखभाल में असमर्थ हों।
-वे बच्चे, जिनको सहायता एवं पुनर्वास की आवश्यकता हो।
-जो बच्चे फुटपाथ पर जीवनयापन कर रहे, प्रताड़ित, उत्पीड़ित या शोषित हों।
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इतनी होनी चाहिए अभिभावकों की आय
इस योजना के तहत चार हजार रुपये प्रति माह दिए जाने का प्रावधान है। योजना के अंतर्गत अभिभावकों की आय ग्रामीण क्षेत्रों में 72 हजार रुपये वार्षिक, जबकि शहरी क्षेत्रों में 96 हजार रुपये वार्षिक से अधिक नहीं होनी चाहिए। पात्र बच्चे या उनके अभिभावक आवेदन पत्र के साथ आधार कार्ड, आय तथा आयु प्रमाणपत्र, अभिभावक का मृत्यु प्रमाणपत्र एवं शिक्षण संस्थान में पंजीयन के प्रमाणपत्र के साथ जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में जमा करना होता है।
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बजट की कुछ राशि मिल गई है, जिन्हें लाभार्थियों के खाते में भेजा गया है। मार्च तक पूरा बजट आते ही लाभार्थियों के खाते में सहायता राशि भेज दी जाएगी।
लवकुश भार्गव, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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