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Lakhimpur Kheri News: कथाव्यास ने जामवंती और सत्यभामा के विवाह की कथा सुनाई
Mon, 04 Aug 2025 11:55 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 04 Aug 2025 11:55 PM IST
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धौरहरा। क्षेत्र के नारायणेश्वर नाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन पुराणाचार्य नारायण दत्त अवस्थी ने स्यमंतक मणि की कथा सुनाई।
कथाव्यास ने कहा, सत्राजित की तपस्या से प्रसन्न हुए भगवान सूर्य ने उन्हें स्यमंतक मणि दी थी। सत्राजित का भाई प्रसेनजित उस मणि को पहनकर शिकार के लिए जंगल में गया। वहां एक शेर ने प्रसेनजित को मार दिया। सत्राजित ने बिना जांच किए श्रीकृष्ण पर मणि चोरी और प्रसेनजित की हत्या का आरोप लगाया। इसकी जानकारी होने पर श्रीकृष्ण जंगल में मणि को खोजने गए। वहां उन्हें प्रसेनजित का शव और मृत शेर के अलावा भालू के पदचिह्न दिखे। पदचिह्नों के अनुसार आगे बढ़ने पर वह एक विशाल गुफा में चले गए। वहां जामवंत की बेटी जामवंती मणि से खेल रही थीं। इसके बाद जामवंत और श्रीकृष्ण के बीच भीषण युद्ध हुआ। इसमें जामवंत परास्त हो गए। इससे जामवंत को श्रीहरि के अवतार का ज्ञान हुआ और उन्होंने जामवंती का विवाह श्रीकृष्ण से कराकर मणि भेंट में दे दी। श्रीकृष्ण ने वह मणि सत्राजित को दी। चोरी के आरोप लगाने से लज्जित सत्राजित ने अपनी बेटी सत्यभामा का विवाह श्रीकृष्ण से किया और क्षमा मांगी।
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कथाव्यास ने कहा, सत्राजित की तपस्या से प्रसन्न हुए भगवान सूर्य ने उन्हें स्यमंतक मणि दी थी। सत्राजित का भाई प्रसेनजित उस मणि को पहनकर शिकार के लिए जंगल में गया। वहां एक शेर ने प्रसेनजित को मार दिया। सत्राजित ने बिना जांच किए श्रीकृष्ण पर मणि चोरी और प्रसेनजित की हत्या का आरोप लगाया। इसकी जानकारी होने पर श्रीकृष्ण जंगल में मणि को खोजने गए। वहां उन्हें प्रसेनजित का शव और मृत शेर के अलावा भालू के पदचिह्न दिखे। पदचिह्नों के अनुसार आगे बढ़ने पर वह एक विशाल गुफा में चले गए। वहां जामवंत की बेटी जामवंती मणि से खेल रही थीं। इसके बाद जामवंत और श्रीकृष्ण के बीच भीषण युद्ध हुआ। इसमें जामवंत परास्त हो गए। इससे जामवंत को श्रीहरि के अवतार का ज्ञान हुआ और उन्होंने जामवंती का विवाह श्रीकृष्ण से कराकर मणि भेंट में दे दी। श्रीकृष्ण ने वह मणि सत्राजित को दी। चोरी के आरोप लगाने से लज्जित सत्राजित ने अपनी बेटी सत्यभामा का विवाह श्रीकृष्ण से किया और क्षमा मांगी।
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