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Lakhimpur Kheri News: गैंडों को आजादी मिलने में अभी कुछ और महीने लगेंगे

Thu, 30 Nov 2023 12:38 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 30 Nov 2023 12:38 AM IST
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It will take a few more months for the rhinos to get freedom
दुध्वा नेशनल पार्क में अपने बच्चे के साथ  गैंडा                         स्रो: वन विभाग
लखीमपुर खीरी। दुधवा नेशनल पार्क में चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना से कुछ गैंडों को स्वच्छंद विचरण के लिए जंगल में छोड़ने में अभी कुछ महीने और लगेंगे। गैंडों की आजादी में कॉलर आईडी उपलब्ध न होना रोड़ा बन गया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार से भी अभी इसकी अनुमति लंबित है।
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दुधवा नेशनल पार्क में वर्ष 1984 में गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू की गई थी। इन गैंडों को सौर ऊर्जा चालित बाड़ में रखा गया था। अब इन गैंडों को जंगल में स्वच्छंद विचरण करने के लिए छोड़ने की योजना बनाई गई है। पिछले एक साल से गैंडों को आजाद करने की कवायद चल रही है। जिन गैंडों को आजादी मिलनी है, उन्हें कॉलर आईडी लगाई जानी है लेकिन कॉलर आईडी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इससे इन गैंडों की आजादी में रोड़ा अटक गया है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार वर्मा ने अभी केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार से अनुमति नहीं मिल पाई है। उन्होंने बताया कि स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़े जाने वाले चार गैंडों में मादा गैंडा भी शामिल होगी। यह कदम प्रयोग के तौर पर उठाया जा रहा है। प्रयोग कामयाब हुआ तो इसे दुधवा में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
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दुधवा में वर्ष 1984 में शुरू हुई थी गैंडा पुनर्वासन योजना
दुधवा नेशनल पार्क में अप्रैल 1984 में आसाम के जंगलों से पांच गैंडे लाकर गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू की गई थी। 39 साल से गैंडों का परिवार सौर ऊर्जा चालित बाड़ के बंधन में है। पांच गैंडों से शुरू हुई इस पुनर्वासन योजना में मौजूदा समय में 46 गैंडे हैं। गैंडों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चार साल पहले दुधवा के ही बेलरायां रेंज में गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 के तहत 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सौर ऊर्जा चालित बाड़ से घेर कर गैंडों के लिए नया घर बनाया गया था। 40 गैंडे फेज-1 में और छह गैंडे फेज-2 में हैं।
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