{"_id":"64ece1f296d4f6cc7703a187","slug":"health-workers-are-not-reaching-to-feed-medicines-lakhimpur-news-c-120-1-sbly1018-4644-2023-08-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: दवाई खिलाने नहीं पहुंच रहे स्वास्थ्यकर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: दवाई खिलाने नहीं पहुंच रहे स्वास्थ्यकर्मी
विज्ञापन
गोला पीएचसी पर जानकारी देते राज्य कार्यक्रम अधिकारी।
गोला गोकर्णनाथ। सोमवार दोपहर बाद फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी अपनी टीम के साथ 15 दिवसीय अभियान की समीक्षा करने गोला पहुंचे। पता चला कि घर-घर दवाई खिलाने के अभियान में स्वास्थ्य कर्मी और आशा काफी स्थानों पर पहुंचे ही नहीं। हकीकत जानकर अधिकारी दंग रह गए।
प्रथम चरण में 10 से 27 अगस्त के बीच 27 जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चलाया गया। जिसमें लखीमपुर खीरी भी शामिल है। सोमवार को कार्यक्रम की समीक्षा करने के लिए राज्य कार्यक्रम अधिकारी वीपी सिंह, बीएमजीएस भूपेंद्र त्रिपाठी, एसीएमओ अशोक कुमार के साथ दोपहर 2:00 बजे के बाद गोला पहुंचे। तब तक सीएचसी और पीएचसी की ओपीडी बंद हो जा चुकी थी। गिनती के ही डॉक्टर और कर्मचारी मिले। पीएचसी पर राज्य कार्यक्रम अधिकारी ने सीएचसी अधीक्षक डॉ. गणेश कुमार और सीपीएम योगेश कुमार से 15 दिवसीय कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए जानकारी की।
लाइलाज है फाइलेरिया
राज्य कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फाइलेरिया रोग फैलता है। फाइलेरिया के तीन रूप हैं हाथी पांव, हाइड्रोसील, काई यूरिया (पेशाब के साथ सफेद पदार्थ का स्त्राव)। इसमें हाथी पांव लाइलाज है। इसे लेकर लापरवाही न बरती जाए। इस बीमारी के तत्काल कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। 5 से 10 साल बाद प्रकोप दिखाई देता है। तब तक देर हो चुकी होती है। फाइलेरिया विकलांगता का भी एक कारण है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रथम चरण में 10 से 27 अगस्त के बीच 27 जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चलाया गया। जिसमें लखीमपुर खीरी भी शामिल है। सोमवार को कार्यक्रम की समीक्षा करने के लिए राज्य कार्यक्रम अधिकारी वीपी सिंह, बीएमजीएस भूपेंद्र त्रिपाठी, एसीएमओ अशोक कुमार के साथ दोपहर 2:00 बजे के बाद गोला पहुंचे। तब तक सीएचसी और पीएचसी की ओपीडी बंद हो जा चुकी थी। गिनती के ही डॉक्टर और कर्मचारी मिले। पीएचसी पर राज्य कार्यक्रम अधिकारी ने सीएचसी अधीक्षक डॉ. गणेश कुमार और सीपीएम योगेश कुमार से 15 दिवसीय कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए जानकारी की।
विज्ञापन
लाइलाज है फाइलेरिया
राज्य कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फाइलेरिया रोग फैलता है। फाइलेरिया के तीन रूप हैं हाथी पांव, हाइड्रोसील, काई यूरिया (पेशाब के साथ सफेद पदार्थ का स्त्राव)। इसमें हाथी पांव लाइलाज है। इसे लेकर लापरवाही न बरती जाए। इस बीमारी के तत्काल कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। 5 से 10 साल बाद प्रकोप दिखाई देता है। तब तक देर हो चुकी होती है। फाइलेरिया विकलांगता का भी एक कारण है।
विज्ञापन