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82 दिन में 64 बच्चों की मौत से स्वास्थ्य विभाग में मची खलबली

Wed, 04 Dec 2019 02:44 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2019 02:44 AM IST
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Health
लखीमपुर खीरी। तीन सितंबर से 25 नवंबर तक 82 दिन में 64 बच्चों की कुपोषण से मौत होने का खुलासा होने से स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। सीडीओ ने इस मामले पर बुधवार को एक बैठक बुलाई है, जिसमें बच्चों की देखरेख करने की जिम्मेदारी निभा रहीं आशा वर्कर के चयन, उनको होने वाले भुगतान सहित कार्य करने वाली और न करने वालीं आशाओं के दस्तावेज तलब किए हैं। इसको लेकर डीपीएमयू कार्यालय में मंगलवार को दस्तावेज तैयार किए जाते रहे।
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अस्पताल और घर में जन्म लेने वाले नवजात तंदुरुस्त रहें, इसलिए इनकी देखभाल के लिए शासन एचबीएनसी कार्यक्रम चला रहा है। इसमें आशाओं को अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों के घर का 42 दिन तक छह बार और घर पर जन्मे बच्चे के घर का सात बार भ्रमण करना होता है। इसके लिए आशा वर्कर्स को 250 रुपये मानदेय दिया जाता है। आशा वर्कर बच्चों की देखरेख कर रही हैं कि नहीं इसकी मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी आशा संगिनी और बीसीपीएम की होती है। मगर, न तो आशाएं घर का भ्रमण करती हैं और न ही इनकी मॉनिटरिंग होती है। ऐसे में घर और अस्पताल में पैदा हुए बच्चे सही देखरेख न होने के कारण कुपोषण और बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। जो उनकी मौत का कारण बनता है। कुपोषण से बच्चों की मौत का खुलासा होने के बाद सीडीओ ने एचबीएनसी कार्यक्रम से जुड़े दस्तावेज बुधवार की बैठक में तलब किए हैं। इससे डीपीएमयू (जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई) कार्यालय में अफरातफरी है। मंगलवार की रात तक कार्यालय में ब्लॉकों से बीसीपीएम को बुलाकर दस्तावेज तैयार कराने का काम होता रहा।
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आशाओं का कार्य
आशाओं का काम है कि अस्पताल में पैैदा हुए बच्चों के घर का छह बार और घर पर जन्मे बच्चों के घर का सात-सात दिन पर 42 दिन तक भ्रमण करें। घरवालों को हाथ धोकर ही नवजात को छूने और हर भ्रमण पर बच्चे का वजन, तापमान, मां के स्वास्थ्य की सेहत की जांच करना होता है।
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इन बिंदुओं से संबंधित दस्तावेज किए तलब
-एक जनवरी से अब तक कितनी आशाएं काम नहीं कर रही, उनके विरुद्ध हुई कार्रवाई।
-कितनी आशाओं को नोटिस जारी की गई और कितनी की संविदा समाप्त हुई।
-नियमानुसार चयनित आशाओं की संख्या।
-ब्लॉक वार क्रियाशील आशाओं की संख्या।
-कितनी आशाओं के पास वजन मशीन और थर्मामीटर है।
-घर पर जन्मे बच्चों की आशाओं के देखेरख करने की तीन माह की रिपोर्ट।
-आशा भुगतान डिटेल
- थर्मामीटर और वजन मशीन के खराब होने पर दुबारा देने में कितना समय लगता है।
एचबीएनसी कार्यक्रम की स्थिति बेहद खराब है। इसको लेकर बुधवार को बैठक बुलाई है, जिसमें जिम्मेदारों को कार्यक्रम से संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने के लिए निर्देशित किया है।
- अरविंद सिंह, सीडीओ
मामले की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी कि किस स्तर से लापरवाही बरती गई। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
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