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सेहत पर खतरा : खाद्य पदार्थों की जांच में 88% नमूने फेल
Tue, 07 Apr 2026 11:22 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 07 Apr 2026 11:22 PM IST
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बाजार में रखी विभिन्न प्रकार की मिठाईयां। संवाद
लखीमपुर खीरी। चमकदार दिखने वाले खाद्य पदार्थ अब सेहत के लिए खतरा बन रहे हैं। जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में 88 प्रतिशत नमूने फेल पाए गए हैं, यानी अब तक आई 25 जांच रिपोर्ट में 22 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में बूंदी के लड्डू, बेसन और सोहन पापड़ी में अखाद्य रंग मिला है, जिन्हें असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।
मार्च में खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले की 326 दुकानों का निरीक्षण किया और 54 खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे। अब तक प्राप्त 25 जांच रिपोर्ट में 22 नमूने फेल पाए गए, जिनमें तीन नमूने असुरक्षित श्रेणी के हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
जांच में आठ मिठाई, दो सरसों के तेल, चार बेसन-मैदा, दो दाल, दो बिना दूध की मिठाई और एक अन्य नमूना अद्योमानक पाया गया। सहायक आयुक्त खाद्य बृजेंद्र शर्मा ने बताया कि असुरक्षित नमूनों के मामलों में सीजेएम कोर्ट में वाद दायर कर मुकदमा चलाया जाएगा, जबकि अद्योमानक मामलों को एडीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।
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11 कारोबारियों पर लगा 1.97 लाख का जुर्माना
एडीएम कोर्ट में 59 मुकदमे विचाराधीन थे, जिनमें 11 का निस्तारण करते हुए संबंधित कारोबारियों पर 1.97 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना जमा करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। एक माह में भुगतान न होने पर आरसी जारी कर वसूली की जाएगी।
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बच्चों में मानसिक और व्यवहारिक बदलाव हो सकता है : डॉ. रुकमेश
राजापुर आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रुकमेश मिश्रा ने बताया कि मानक से अधिक खाद्य रंग का सेवन शरीर पर गंभीर असर डाल सकता है। विशेषकर बच्चों में मानसिक और व्यवहारिक बदलाव, एकाग्रता की कमी और चिड़चिड़ापन देखने को मिल सकता है।
उन्होंने बताया कि एलर्जी, त्वचा पर चकत्ते, खुजली, सूजन और अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। कुछ रंगों में कैंसरकारी प्रभाव की आशंका रहती है, जिससे लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके अलावा पाचन संबंधी समस्याएं जैसे मतली, पेट दर्द और जलन भी हो सकती हैं। डॉ. मिश्रा ने बताया कि कुछ विक्रेता सब्जियों को ताजा और आकर्षक दिखाने के लिए मालाचाइट ग्रीन, मेटानिल येलो और कपड़ा रंगने वाले रसायनों का प्रयोग करते हैं। इससे कैंसर का खतरा, तंत्रिका तंत्र पर दुष्प्रभाव, यकृत और गुर्दे को नुकसान, रक्त संबंधी विकार तथा प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
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ऐसे करें बचाव के उपाय
अत्यधिक चमकीले रंग वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
सब्जियों को उपयोग से पहले अच्छी तरह धोकर नमक वाले पानी में भिगोएं।
मौसमी और स्थानीय सब्जियों को प्राथमिकता दें।
सड़क किनारे मिलने वाली रंगीन मिठाइयों से दूरी रखें।
बच्चों को रंगीन पेय और कैंडी का सेवन सीमित कराएं।
(नोट : जैसा कि राजापुर आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रुकमेश मिश्रा ने बताया)
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मार्च में खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले की 326 दुकानों का निरीक्षण किया और 54 खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे। अब तक प्राप्त 25 जांच रिपोर्ट में 22 नमूने फेल पाए गए, जिनमें तीन नमूने असुरक्षित श्रेणी के हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
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जांच में आठ मिठाई, दो सरसों के तेल, चार बेसन-मैदा, दो दाल, दो बिना दूध की मिठाई और एक अन्य नमूना अद्योमानक पाया गया। सहायक आयुक्त खाद्य बृजेंद्र शर्मा ने बताया कि असुरक्षित नमूनों के मामलों में सीजेएम कोर्ट में वाद दायर कर मुकदमा चलाया जाएगा, जबकि अद्योमानक मामलों को एडीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।
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11 कारोबारियों पर लगा 1.97 लाख का जुर्माना
एडीएम कोर्ट में 59 मुकदमे विचाराधीन थे, जिनमें 11 का निस्तारण करते हुए संबंधित कारोबारियों पर 1.97 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना जमा करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। एक माह में भुगतान न होने पर आरसी जारी कर वसूली की जाएगी।
बच्चों में मानसिक और व्यवहारिक बदलाव हो सकता है : डॉ. रुकमेश
राजापुर आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रुकमेश मिश्रा ने बताया कि मानक से अधिक खाद्य रंग का सेवन शरीर पर गंभीर असर डाल सकता है। विशेषकर बच्चों में मानसिक और व्यवहारिक बदलाव, एकाग्रता की कमी और चिड़चिड़ापन देखने को मिल सकता है।
उन्होंने बताया कि एलर्जी, त्वचा पर चकत्ते, खुजली, सूजन और अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। कुछ रंगों में कैंसरकारी प्रभाव की आशंका रहती है, जिससे लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके अलावा पाचन संबंधी समस्याएं जैसे मतली, पेट दर्द और जलन भी हो सकती हैं। डॉ. मिश्रा ने बताया कि कुछ विक्रेता सब्जियों को ताजा और आकर्षक दिखाने के लिए मालाचाइट ग्रीन, मेटानिल येलो और कपड़ा रंगने वाले रसायनों का प्रयोग करते हैं। इससे कैंसर का खतरा, तंत्रिका तंत्र पर दुष्प्रभाव, यकृत और गुर्दे को नुकसान, रक्त संबंधी विकार तथा प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ऐसे करें बचाव के उपाय
अत्यधिक चमकीले रंग वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
सब्जियों को उपयोग से पहले अच्छी तरह धोकर नमक वाले पानी में भिगोएं।
मौसमी और स्थानीय सब्जियों को प्राथमिकता दें।
सड़क किनारे मिलने वाली रंगीन मिठाइयों से दूरी रखें।
बच्चों को रंगीन पेय और कैंडी का सेवन सीमित कराएं।
(नोट : जैसा कि राजापुर आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रुकमेश मिश्रा ने बताया)

बाजार में रखी विभिन्न प्रकार की मिठाईयां। संवाद