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स्वास्थ्य विभाग का दावा, अब तक नहीं हुई डेंगू से मौत
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 22 Oct 2016 12:27 AM IST
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Dengue
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- लखनऊ में लैब कर रही डेंगू की पुष्टि
- अब तक बुखार से हो चुकी चार दर्जन से अधिक मौत
- मौत के असल कारण तलाश नहीं कर सका महकमा
जिले में बुखार और डेंगू की चपेट में आकर दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी हैं, जबकि कई मरीजों का इलाज लखनऊ में चल रहा है। लखनऊ के डाक्टर और लैब दर्जन भर से अधिक मरीजों को डेंगू प्रभावित होने की पुष्टि कर चुके हैं, जिसमें कई लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, जिले के सीएमओ से लेकर स्वास्थ्य अधिकारी डेंगू को पुरजोर तरीके से नकारने में जुटे हैं, जिससे निपटने के लिए आवश्यक इंतजाम नहीं किए जा सके हैं। अभी भी अफसर डेंगू से किसी की मौत होना स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
डेंगू की चपेट में आने वाले मरीजों की फेहरिस्त में ग्रामीण से लेकर शहरवासी तक शामिल हैं। मच्छर जनित इस बीमारी से निपटने के लिए मच्छरों पर नियंत्रण करना आवश्यक है। इसके लिए शहर में नगर पालिका द्वारा खानापूर्ति करते हुए फागिंग कराई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों की रोकथाम के लिए कोई प्रयास ही नहीं किए गए। ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन इस धनराशि को खर्च नहीं किया जा रहा है। जबकि गांवों में फागिंग की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही गांवों में मच्छरों को मारने के लिए डीडीटी का छिड़काव हुआ है। लिहाजा डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के सीएमओ डॉ. जावेद अहमद की दलील है कि ज्यादातर बुखार के मामले आ रहे हैं, जिनमें भी प्लेटलेट्स कम हो जाती है, लेकिन इसे डेंगू का मामला नहीं कहा जा सकता है। अभी तक पांच लोगों में डेंगू के लक्षण मिलें हैं, जो उपचार से सही हो चुके हैं।
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- अब तक बुखार से हो चुकी चार दर्जन से अधिक मौत
- मौत के असल कारण तलाश नहीं कर सका महकमा
जिले में बुखार और डेंगू की चपेट में आकर दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी हैं, जबकि कई मरीजों का इलाज लखनऊ में चल रहा है। लखनऊ के डाक्टर और लैब दर्जन भर से अधिक मरीजों को डेंगू प्रभावित होने की पुष्टि कर चुके हैं, जिसमें कई लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, जिले के सीएमओ से लेकर स्वास्थ्य अधिकारी डेंगू को पुरजोर तरीके से नकारने में जुटे हैं, जिससे निपटने के लिए आवश्यक इंतजाम नहीं किए जा सके हैं। अभी भी अफसर डेंगू से किसी की मौत होना स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
डेंगू की चपेट में आने वाले मरीजों की फेहरिस्त में ग्रामीण से लेकर शहरवासी तक शामिल हैं। मच्छर जनित इस बीमारी से निपटने के लिए मच्छरों पर नियंत्रण करना आवश्यक है। इसके लिए शहर में नगर पालिका द्वारा खानापूर्ति करते हुए फागिंग कराई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों की रोकथाम के लिए कोई प्रयास ही नहीं किए गए। ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन इस धनराशि को खर्च नहीं किया जा रहा है। जबकि गांवों में फागिंग की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही गांवों में मच्छरों को मारने के लिए डीडीटी का छिड़काव हुआ है। लिहाजा डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के सीएमओ डॉ. जावेद अहमद की दलील है कि ज्यादातर बुखार के मामले आ रहे हैं, जिनमें भी प्लेटलेट्स कम हो जाती है, लेकिन इसे डेंगू का मामला नहीं कहा जा सकता है। अभी तक पांच लोगों में डेंगू के लक्षण मिलें हैं, जो उपचार से सही हो चुके हैं।
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