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Lakhimpur Kheri News: स्कूली वाहनों में अब जीपीएस अनिवार्य
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लखीमपुर खीरी। अयोध्या में छात्रा के साथ हुई घटना के बाद यूपी सरकार ने सभी स्कूलों को गाइडलाइंस जारी कर दी है। निर्देशों के अनुसार, अब स्कूली वाहनों में जीपीएस अनिवार्य होगा। स्कूल प्रबंधन को बच्चों के अभिभावकों के साथ वाहनों की लोकेशन शेयर करनी होगी। आदेश आने के बाद शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों ने पहल शुरू कर दी है।
जिले में स्कूली वाहनों की संख्या करीब 1500 है। जिसमें से केवल 800 पंजीकृत हैं। बच्चों के साथ लगातार बढ़ रही घटनाओं को लेकर यूपी सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। सोमवार को शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों को शासन की तरफ से एक आदेश जारी किया गया है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई नियम लागू कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। शहर सहित अन्य तहसीलों में संचालित हो रहे स्कूलों में लगे स्कूली वाहन बिना जीपीएस के संचालित नहीं होंगे।
अभी तक तमाम ऐसे स्कूली वाहनों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें सुरक्षा की तमाम खामियां हैं। कई बार देखा गया है कि स्कूली वाहनों में सवार बच्चे घटना का शिकार हो जाते थे, लेकिन हादसों की जानकारी परिजनों को काफी देर में जानकारी हो पाती थी। शहर के कुछ कॉन्वेंट स्कूल संचालकों ने स्कूली वाहनों में जीपीएस की सुविधा दे रखी है।
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अब सभी स्कूल संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वाहन की लोकेशन अभिभावकों के मोबाइल फोन पर भी दिखाई दे। जीपीएस की लाइव लोकेशन मिलते रहने से अभिभावक अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर बेफ्रिक रहेंगे।
विद्यालय में लगे सभी स्कूली वाहन जीपीएस से लैस हैं। यहां से करीब 53 वाहनों से बच्चों को लाने और ले जाने का कार्य किया जाता है। स्कूल के प्रधानाचार्य से लेकर अन्य कर्मचारी लगातार वाहनों की मॉनीटरिंग करते हैं। यह सुविधा करीब दो सालों से चली आ रही है।
- जसमीत अजमानी विक्की, अजमानी इंटरनेशनल स्कूल
एक स्कूली बस के अलावा छह से सात चौपहिया वाहन हैं, बाकी ठेके पर वाहन चलाए जा रहे हैं। ज्यादातर वाहनों में जीपीएस लगा हुआ है, जिनमें नहीं लगा होगा, इन्हीं छुटिटयों में लगवा दिया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।
- विजय सचदेवा, प्रधानाचार्य लखनऊ पब्लिक स्कूल
एआरटीओ में रजिस्टर्ड हैं आठ सौ वाहन
पूरे जिले में स्कूली वाहनों की संख्या भले ही डेढ़ हजार से ज्यादा हो लेकिन परिवहन विभाग के पास अभी तक महज आठ सौ के करीब वाहन रजिस्टर्ड हैं। परिवहन विभाग के एआरटीओ आलोक कुमार सिंह ने बताया कि हर साल स्कूली वाहनों की फिटनेस, जीपीएस, बीमा आदि की जांच कराकर रिन्यूअल किया जाता है। कुछ सालों से बिना जीपीएस के वाहनों का रिन्यूअल नहीं किया जा रहा है।
अब इन नियमों का करना होगा पालन
1-स्कूली वाहनों में जीपीएस के अलावा पुलिस, चाइल्ड और वूमेन हेल्प लाइन नम्बर दर्ज किया जाना अनिवार्य होगा।
2-प्रत्येक बस में दो अध्यापक मौजूद रहेंगे जो बच्चों के साथ आवागमन करेंगे।
3-ड्राइवर और क्लीनर का पुलिस वेरीफिकेशन कराना जरूरी होगा।
4- स्कूली वाहनों के पीछे बस मालिक और विद्यालय का फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
5-साइकिल से आने जाने वाले बच्चे दो या दो से अधिक सहपाठियों के साथ करें आवागमन।
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जिले में स्कूली वाहनों की संख्या करीब 1500 है। जिसमें से केवल 800 पंजीकृत हैं। बच्चों के साथ लगातार बढ़ रही घटनाओं को लेकर यूपी सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। सोमवार को शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों को शासन की तरफ से एक आदेश जारी किया गया है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई नियम लागू कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। शहर सहित अन्य तहसीलों में संचालित हो रहे स्कूलों में लगे स्कूली वाहन बिना जीपीएस के संचालित नहीं होंगे।
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अभी तक तमाम ऐसे स्कूली वाहनों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें सुरक्षा की तमाम खामियां हैं। कई बार देखा गया है कि स्कूली वाहनों में सवार बच्चे घटना का शिकार हो जाते थे, लेकिन हादसों की जानकारी परिजनों को काफी देर में जानकारी हो पाती थी। शहर के कुछ कॉन्वेंट स्कूल संचालकों ने स्कूली वाहनों में जीपीएस की सुविधा दे रखी है।
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अब सभी स्कूल संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वाहन की लोकेशन अभिभावकों के मोबाइल फोन पर भी दिखाई दे। जीपीएस की लाइव लोकेशन मिलते रहने से अभिभावक अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर बेफ्रिक रहेंगे।
विद्यालय में लगे सभी स्कूली वाहन जीपीएस से लैस हैं। यहां से करीब 53 वाहनों से बच्चों को लाने और ले जाने का कार्य किया जाता है। स्कूल के प्रधानाचार्य से लेकर अन्य कर्मचारी लगातार वाहनों की मॉनीटरिंग करते हैं। यह सुविधा करीब दो सालों से चली आ रही है।
- जसमीत अजमानी विक्की, अजमानी इंटरनेशनल स्कूल
एक स्कूली बस के अलावा छह से सात चौपहिया वाहन हैं, बाकी ठेके पर वाहन चलाए जा रहे हैं। ज्यादातर वाहनों में जीपीएस लगा हुआ है, जिनमें नहीं लगा होगा, इन्हीं छुटिटयों में लगवा दिया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा।
- विजय सचदेवा, प्रधानाचार्य लखनऊ पब्लिक स्कूल
एआरटीओ में रजिस्टर्ड हैं आठ सौ वाहन
पूरे जिले में स्कूली वाहनों की संख्या भले ही डेढ़ हजार से ज्यादा हो लेकिन परिवहन विभाग के पास अभी तक महज आठ सौ के करीब वाहन रजिस्टर्ड हैं। परिवहन विभाग के एआरटीओ आलोक कुमार सिंह ने बताया कि हर साल स्कूली वाहनों की फिटनेस, जीपीएस, बीमा आदि की जांच कराकर रिन्यूअल किया जाता है। कुछ सालों से बिना जीपीएस के वाहनों का रिन्यूअल नहीं किया जा रहा है।
अब इन नियमों का करना होगा पालन
1-स्कूली वाहनों में जीपीएस के अलावा पुलिस, चाइल्ड और वूमेन हेल्प लाइन नम्बर दर्ज किया जाना अनिवार्य होगा।
2-प्रत्येक बस में दो अध्यापक मौजूद रहेंगे जो बच्चों के साथ आवागमन करेंगे।
3-ड्राइवर और क्लीनर का पुलिस वेरीफिकेशन कराना जरूरी होगा।
4- स्कूली वाहनों के पीछे बस मालिक और विद्यालय का फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
5-साइकिल से आने जाने वाले बच्चे दो या दो से अधिक सहपाठियों के साथ करें आवागमन।