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Lakhimpur Kheri News: गाजियाबाद की घटना ने खोली आंखें, जिले के बच्चों में भी फोन की लत

Fri, 06 Feb 2026 11:07 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Fri, 06 Feb 2026 11:07 PM IST
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Ghaziabad incident opens eyes, children in the district are also addicted to phones
लखीमपुर खीरी। गाजियाबाद में ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते तीन मासूम बहनों की मौत की घटना ने अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। जिले में भी बच्चों में मोबाइल फोन की बढ़ती लत के मामले सामने आ रहे हैं, जो उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में फोन का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों में चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, ध्यान की कमी और व्यवहार में आक्रामकता जैसी समस्याओं को जन्म दे रहा है। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि कम उम्र में बच्चों के हाथ में फोन पहुंचने से उनका मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित होता है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन पांच से दस ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं, जो मोबाइल फोन की लत के शिकार हो चुके हैं। इनमें पांच-छह वर्ष की आयु से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं, जिनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता में गिरावट देखी जा रही है।
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मनोचिकित्सक के अनुसार, फोन की लत अब डोपामिन एडिक्शन का रूप ले चुकी है। फोन और ऑनलाइन गेम्स से मिलने वाला तात्कालिक आनंद मस्तिष्क को बार-बार उसी अनुभव की ओर खींचता है। इसका असर यह होता है कि बच्चे वास्तविक जीवन के रिश्तों, पढ़ाई और सामाजिक गतिविधियों से दूर होते चले जाते हैं। समय रहते काउंसलिंग और उपचार से ऐसे बच्चों में सुधार लाया जा सकता है।
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---इन बातों का रखें विशेष ध्यान---
-छोटे बच्चों को स्मार्टफोन देने से बचें।
-स्क्रीन टाइम की सख्त सीमा तय करें।
-ऑनलाइन कंटेंट और सोशल मीडिया गतिविधियों पर निगरानी रखें।
-बच्चों के अकेलेपन, मनोदशा और व्यवहार में बदलाव पर ध्यान दें।
-बच्चों से खुलकर और बिना दबाव संवाद करें।
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काउंसलिंग के बाद आया सुधार
केस–1
जिला अस्पताल के मानसिक रोग कक्ष में आए एक अभिभावक ने बताया कि उनका 13 वर्षीय पुत्र फोन की लत का शिकार हो गया था। मोबाइल न मिलने पर वह अत्यधिक चिड़चिड़ा और आक्रामक हो जाता था। चिकित्सकीय परामर्श और काउंसलिंग के बाद बच्चे की स्थिति में सुधार आया और अब वह सामान्य जीवन जी रहा है।
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पढ़ाई और भोजन से बना ली थी दूरी
केस–2
संतोष (परिवर्तित नाम) ने बताया कि उनका 16 वर्षीय बेटा फोन पर लगातार ऑनलाइन गेम खेलता रहता था। पढ़ाई और भोजन से दूरी बढ़ने लगी। फोन छीनने पर उसका व्यवहार आक्रामक हो गया। जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक को दिखाने पर काउंसलिंग के जरिये उसकी आदतों में सुधार किया गया।

---युवा अपनाएं डिजिटल डिटॉक्स---
चिकित्सकों का कहना है कि पहले परिवार के साथ समय बिताने और आपसी संवाद की परंपरा थी, लेकिन अब फोन ने रिश्तों की जगह ले ली है। फोन का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। ऐसे में युवाओं और बच्चों दोनों को डिजिटल डिटॉक्स अपनाना चाहिए यानि दिन के कुछ घंटे फोन से दूर रहकर ऑफलाइन गतिविधियों, खेलकूद और पारिवारिक संवाद को प्राथमिकता देना जरूरी है।
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