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Lakhimpur Kheri News: हनीप्रीत से लेकर अन्नू धनखड़ तक चर्चा में रहा नेपाल बॉर्डर
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लखीमपुर खीरी। दिल्ली की मोस्ट वांटेड लेडी डॉन अन्नू धनखड़ के पकड़े जाने के बाद नेपाल बॉर्डर फिर चर्चा में आ गया है। पुलिस ने लेडी डॉन को घर से भागी सामान्य लड़की समझकर पकड़ा। बीस घंटे निगरानी में रहने के बाद भी पुलिस उसकी असलियत नहीं भांप सकी। इससे पहले डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के आश्रम की हनीप्रीत के फरार होने की सूचना पर भी नेपाल सीमा चर्चा में रही थी।
पीलीभीत से लेकर बहराइच और गोरखपुर-महाराजगंज तक लगने वाली इस तराई पट्टी के जिला खीरी में ही भारत-नेपाल की तकरीबन सवा सौ किलोमीटर खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इस सीमा के जरिये शातिर अपराधियों के देश छोड़कर नेपाल जाने की बात कोई नई नहीं है।
बीते गुरुवार को भारत-नेपाल सीमा के थाना संपूर्णानगर के अंतर्गत खजुरिया की एसएसबी चेकपोस्ट पर अन्नू धनखड़ के पकड़े जाने के बाद भले ही वहां तैनात जवानों की सतर्कता उजागर हुई, पर एक बार फिर यह बात भी साबित हो गई कि खुफिया एजेंसियों की सक्रियता के बाद भी अपराधी नेपाल भागने के लिए इसी बॉर्डर को मुफीद मानते हैं।
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वर्ष 2017 में जब डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जेल भेजा गया था तो उनकी खासमखास हनीप्रीत के खीरी के ही रास्ते नेपाल भागने की काफी चर्चा हुई थी। तब एक संदिग्ध कार भी कई दिन तक बॉर्डर पर खड़ी मिली थी।
इतना ही नहीं तराई के घने जंगल भी अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह रहे हैं। खीरी में चाहे दुर्दांत अपराधी डालू गुप्ता और बग्गा सिंह की दहशत का 2013 से लेकर 2017 तक दौर हो या फिर तस्करी के गंभीर मामले, भारत नेपाल सीमा और इस क्षेत्र के जंगल हमेशा सुर्खियों में रहे हैं।
120 किमी लंबी है सीमा
खीरी जिले से लगी 120 किमी लंबी भारत-नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा है। ये सीमा नोमेंस लैंड के पिलर संख्या 98 बंदरिया, बरसोला थाना तिकुनिया से शुरू होकर पिलर संख्या 211 खजुरिया थाना संपूर्णानगर तक है। इस अंतरराष्ट्रीय सीमा का अधिकांश क्षेत्र जंगल से सटा होने के कारण तमाम गुप्त रास्ते हैं। जिनका फायदा उठाकर न सिर्फ तस्करी की जाती है, बल्कि अपराधी खुद भी उस पार चले जाते हैं।
सुरक्षा में तैनात हैं कई एजेंसियां
भारत-नेपाल सीमा पर खीरी जिले में एसएसबी की 33 चौकियां हैं। इसके अलावा बॉर्डर क्षेत्र से सटे चार थाने संपूर्णानगर, चंदनचौकी, गौरीफंटा और तिकुनिया हैं, जिनकी पुलिस भी तैनात रहती है। सीमा पर खुफिया तंत्र के अलावा वन विभाग का स्टाफ भी निगरानी में तैनात रहता है। गौरीफंटा बॉर्डर पर कस्टम का भी कार्यालय है।
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बॉर्डर से आने-जाने वालों की चेकिंग की जाती है। एसएसबी के अलावा, कवच सेल और पुलिस की निगरानी रहती है। मामला संदिग्ध प्रतीत होते पर जांच भी की जाती है। ताजा प्रकरण को लेकर सतर्कता और बढ़ा दी गई है।
नैपाल सिंह, एएसपी
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लेडी डाॅन मामले में खुफिया तंत्र भी हुआ फेल
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। लेडी डॉन अन्नू धनखड़ मामले में खुफिया एजेंसियां फेल रहीं। उन्हें इस बात की भनक नहीं लगी कि लेडी डॉन जिले में दाखिल हुई और नेपाल भागने की फिराक में थी।
बॉर्डर सहित जिले में कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कारकों, लोगों को बारे में सूचनाएं संकलित करने और उन्हें समय से शासन-प्रशासन से साझा करने के लिए एलआईयू समेत अन्य केंद्रीय और राज्य स्तरीय खुफिया एजेंसियां यहां तैनात हैं। लेकिन अन्नू धनखड़ मामले में ये एजेंसियां फेल दिखाई दीं।
खुफिया एजेंसियों सहित पुलिस के मुखबिरों को चकमा देकर अन्नू नेपाल फरार होने की जुगत में थी, लेकिन इससे पहले उसे खजुरिया की एसएसबी पोस्ट पर तैनात जवानों ने रोक लिया। भले ही उसे पकड़ लिया गया, पर एक अपराधी की तरह नहीं, बल्कि घर से भागी सामान्य लड़की समझकर। इस पूरे घटनाक्रम ने यहां पुलिस-प्रशासन के कमजोर सूचनातंत्र को उजागर किया है।
सीमा पर हो रहीं कई गतिविधियां
हाल ही में सीमा पर एक चौपहिया वाहन पकड़ा गया था। वाहन में संदिग्ध पीला पाउडर होने की सूचना मिली तो सीओ से लेकर एसपी तक को घटनास्थल पर जांच करने जाना पड़ा था। सूत्र बताते हैं कि संदिग्ध पीला पाउडर मामले में जांच एजेंसियों के हाथ खाली थे, लेकिन पुलिस की सजगता की वजह से यह वाहन बॉर्डर पार जाने से पहले ही रोक लिया गया।
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पीलीभीत से लेकर बहराइच और गोरखपुर-महाराजगंज तक लगने वाली इस तराई पट्टी के जिला खीरी में ही भारत-नेपाल की तकरीबन सवा सौ किलोमीटर खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इस सीमा के जरिये शातिर अपराधियों के देश छोड़कर नेपाल जाने की बात कोई नई नहीं है।
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बीते गुरुवार को भारत-नेपाल सीमा के थाना संपूर्णानगर के अंतर्गत खजुरिया की एसएसबी चेकपोस्ट पर अन्नू धनखड़ के पकड़े जाने के बाद भले ही वहां तैनात जवानों की सतर्कता उजागर हुई, पर एक बार फिर यह बात भी साबित हो गई कि खुफिया एजेंसियों की सक्रियता के बाद भी अपराधी नेपाल भागने के लिए इसी बॉर्डर को मुफीद मानते हैं।
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वर्ष 2017 में जब डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जेल भेजा गया था तो उनकी खासमखास हनीप्रीत के खीरी के ही रास्ते नेपाल भागने की काफी चर्चा हुई थी। तब एक संदिग्ध कार भी कई दिन तक बॉर्डर पर खड़ी मिली थी।
इतना ही नहीं तराई के घने जंगल भी अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह रहे हैं। खीरी में चाहे दुर्दांत अपराधी डालू गुप्ता और बग्गा सिंह की दहशत का 2013 से लेकर 2017 तक दौर हो या फिर तस्करी के गंभीर मामले, भारत नेपाल सीमा और इस क्षेत्र के जंगल हमेशा सुर्खियों में रहे हैं।
120 किमी लंबी है सीमा
खीरी जिले से लगी 120 किमी लंबी भारत-नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा है। ये सीमा नोमेंस लैंड के पिलर संख्या 98 बंदरिया, बरसोला थाना तिकुनिया से शुरू होकर पिलर संख्या 211 खजुरिया थाना संपूर्णानगर तक है। इस अंतरराष्ट्रीय सीमा का अधिकांश क्षेत्र जंगल से सटा होने के कारण तमाम गुप्त रास्ते हैं। जिनका फायदा उठाकर न सिर्फ तस्करी की जाती है, बल्कि अपराधी खुद भी उस पार चले जाते हैं।
सुरक्षा में तैनात हैं कई एजेंसियां
भारत-नेपाल सीमा पर खीरी जिले में एसएसबी की 33 चौकियां हैं। इसके अलावा बॉर्डर क्षेत्र से सटे चार थाने संपूर्णानगर, चंदनचौकी, गौरीफंटा और तिकुनिया हैं, जिनकी पुलिस भी तैनात रहती है। सीमा पर खुफिया तंत्र के अलावा वन विभाग का स्टाफ भी निगरानी में तैनात रहता है। गौरीफंटा बॉर्डर पर कस्टम का भी कार्यालय है।
बॉर्डर से आने-जाने वालों की चेकिंग की जाती है। एसएसबी के अलावा, कवच सेल और पुलिस की निगरानी रहती है। मामला संदिग्ध प्रतीत होते पर जांच भी की जाती है। ताजा प्रकरण को लेकर सतर्कता और बढ़ा दी गई है।
नैपाल सिंह, एएसपी
लेडी डाॅन मामले में खुफिया तंत्र भी हुआ फेल
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। लेडी डॉन अन्नू धनखड़ मामले में खुफिया एजेंसियां फेल रहीं। उन्हें इस बात की भनक नहीं लगी कि लेडी डॉन जिले में दाखिल हुई और नेपाल भागने की फिराक में थी।
बॉर्डर सहित जिले में कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कारकों, लोगों को बारे में सूचनाएं संकलित करने और उन्हें समय से शासन-प्रशासन से साझा करने के लिए एलआईयू समेत अन्य केंद्रीय और राज्य स्तरीय खुफिया एजेंसियां यहां तैनात हैं। लेकिन अन्नू धनखड़ मामले में ये एजेंसियां फेल दिखाई दीं।
खुफिया एजेंसियों सहित पुलिस के मुखबिरों को चकमा देकर अन्नू नेपाल फरार होने की जुगत में थी, लेकिन इससे पहले उसे खजुरिया की एसएसबी पोस्ट पर तैनात जवानों ने रोक लिया। भले ही उसे पकड़ लिया गया, पर एक अपराधी की तरह नहीं, बल्कि घर से भागी सामान्य लड़की समझकर। इस पूरे घटनाक्रम ने यहां पुलिस-प्रशासन के कमजोर सूचनातंत्र को उजागर किया है।
सीमा पर हो रहीं कई गतिविधियां
हाल ही में सीमा पर एक चौपहिया वाहन पकड़ा गया था। वाहन में संदिग्ध पीला पाउडर होने की सूचना मिली तो सीओ से लेकर एसपी तक को घटनास्थल पर जांच करने जाना पड़ा था। सूत्र बताते हैं कि संदिग्ध पीला पाउडर मामले में जांच एजेंसियों के हाथ खाली थे, लेकिन पुलिस की सजगता की वजह से यह वाहन बॉर्डर पार जाने से पहले ही रोक लिया गया।