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Lakhimpur Kheri News: दो साल से तेंदुओं की चहलकदमी बनी मुसीबत
Mon, 04 Aug 2025 11:51 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 04 Aug 2025 11:51 PM IST
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यहां से घर में घुसा तेंदुआ-संवाद
महेवागंज। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के वन रेंज शारदानगर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में तेंदुओं की चहल कदमी लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनी है। ज्ञानपुर, मंझरा, खंभारखेड़ा, गंगाबेहड़, बिदौरा, फूलबेहड़, बालूडीह, मोहनपुरवा, जंगपुर, पचपेड़ी, जंगल न.10, बनवारीपुर, श्रीनगर सहित करीब 20 किलोमीटर के दायरे में तेंदुओं का खौफ पिछले दो वर्षों से कायम है।
जीर्णोद्धार के बाद से एहतियातन इंदिरा मनोरंजन वन में विभाग ने ताला डाल रखा है। पिछले वर्ष शारदा नगर के पास, गंगा बेहड़ में बालक और मैनहा में लड़की सहित तीन लोगों को तेंदुआ मौत के घाट उतार चुका है। मंझरा में राजकीय डेरी क्षेत्र में तेंदुए की चहल कदमी से कर्मचारी और मजदूर परेशान रहे। मंझरा और आसपास गांव में विभाग ने पिंजरा लगाए। विभाग की मानें तो अब तक चार तेंदुआ कैद हो चुके हैं। उन्हें जंगल में छोड़ा गया था।
इधर 15 दिन से इलाके में फिर तेंदुए की दहशत है। करीब दस दिन पहले ज्ञानपुर में पिता के साथ सो रहे बालक को तेंदुआ खींच ले गया था। विभाग ने वहां दो पिंजरे लगा रखे हैं। मंझरा में भी पिंजरा लगा है। हमलावर तेंदुआ अब तक कैद नहीं हुआ। रोजाना आसपास किसी न किसी गांव में तेंदुआ देखे जाने का रोज शोर मच रहा था। ग्रामीणों का आरोप है, कि अगर समय रहते विभाग तेंदुआ को पकड़ने या उसे जंगल में खदेड़ने की ठोस कोशिश करता तो शीतलापुर जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होती। घटना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।
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जीर्णोद्धार के बाद से एहतियातन इंदिरा मनोरंजन वन में विभाग ने ताला डाल रखा है। पिछले वर्ष शारदा नगर के पास, गंगा बेहड़ में बालक और मैनहा में लड़की सहित तीन लोगों को तेंदुआ मौत के घाट उतार चुका है। मंझरा में राजकीय डेरी क्षेत्र में तेंदुए की चहल कदमी से कर्मचारी और मजदूर परेशान रहे। मंझरा और आसपास गांव में विभाग ने पिंजरा लगाए। विभाग की मानें तो अब तक चार तेंदुआ कैद हो चुके हैं। उन्हें जंगल में छोड़ा गया था।
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इधर 15 दिन से इलाके में फिर तेंदुए की दहशत है। करीब दस दिन पहले ज्ञानपुर में पिता के साथ सो रहे बालक को तेंदुआ खींच ले गया था। विभाग ने वहां दो पिंजरे लगा रखे हैं। मंझरा में भी पिंजरा लगा है। हमलावर तेंदुआ अब तक कैद नहीं हुआ। रोजाना आसपास किसी न किसी गांव में तेंदुआ देखे जाने का रोज शोर मच रहा था। ग्रामीणों का आरोप है, कि अगर समय रहते विभाग तेंदुआ को पकड़ने या उसे जंगल में खदेड़ने की ठोस कोशिश करता तो शीतलापुर जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होती। घटना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।
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