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राहत भरी खबर: दुधवा टाइगर रिजर्व में अरसे बाद दिखा दुर्लभ गिद्धों का झुंड, विशेषज्ञों ने जताईं ये संभावनाएं

Thu, 31 Mar 2022 10:16 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)
संवाद न्यूज एजेंसी, बांकेगंज (लखीमपुर खीरी) Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 31 Mar 2022 10:16 PM IST
सार

विशेषज्ञों ने बताया कि टाइगर रिजर्व में देखे गए गिद्ध व्हाइट बिल्ड बल्चर प्रजाति के हैं। यहे कम ही दिखते हैं। यह प्रकृति प्रेमियों के लिए अच्छे संकेत हैं।मुख्य वन संरक्षक व फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व संजय पाठक का कहना है कि गिद्धों के संरक्षण के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है।

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Flock of rare vultures seen after a long time in Dudhwa Tiger Reserve
दुधवा टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों का झुंड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के भीरा रेंज की पल्हनापुर बीट जंगल से सटे इलाके में लंबे अरसे बाद गिद्धों का एक बड़ा झुंड दिखाई दिया है। तेजी से लुप्त हो रहे गिद्धों के इतने बड़े झुंड को देखकर पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार दिखाई पड़ा यह झुंड व्हाइट बिल्ड बल्चर प्रजाति के हैं,जो तराई में दुर्लभ माने जाते हैं।

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भीरा रेंज की पल्हनापुर रेंज में गुरुवार सवेरे गश्त कर रहे रेंजर राकेश बाबू वर्मा, फॉरेस्टर मोहम्मद उमर को जंगल से सटे इलाके में गिद्धों का एक बड़ा झुंड दिखाई पड़ा। दुर्लभ प्रजाति के करीब 50 गिद्धों के झुंड को देखकर वन कर्मियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। प्रकृति के सफाई कर्मी कहे जाने वाले इन गिद्धों के लापता होने से पर्यावरण को शुद्ध रखने का संकट पैदा हो गया है। ऐसी स्थिति में भारत सरकार समेत पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली विभिन्न संस्थाओं ने गिद्धों के संरक्षण के लिए एक अभियान के रूप में काम किया। जिसके परिणाम स्वरूप गिद्धों की आबादी में इजाफा शुरू हुआ है। पिछले दो वर्षों से कभी-कभार गिद्धों के झुंड दिखाई पड़ने लगे हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि गिद्ध संरक्षण के लिए अभी और काम किए जाने की जरूरत है।

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डाइक्लोफेनेक दवा गिद्धों के लिए बनी जानलेवा

पशुओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डाइक्लोफेनेक नामक दवा तराई के गिद्धों के लिए जानलेवा साबित हुई। दुधवा नेशनल पार्क के पशु चिकित्सक डॉ दया शंकर बताते हैं कि संबधित दवा के इस्तेमाल के बाद पशुओं की मृत्यु होने पर उनका मांस खाने से गिद्धों की किडनी फेल हो जाती थी और उनकी मृत्यु हो जाती थी। नजीजतन व्हाइट बिल्ड बल्चर और किंग बल्चर प्रजाति के गिद्धों की संख्या तेजी से घटने लगी। गिद्धों की घटती संख्या को सरकार ने गंभीरता से लिया। सरकार ने डाइक्लोफेनेक नामक दवा की बिक्री और इस्तेमाल दोनों पर प्रतिबंध लगाया। तराई क्षेत्र को डाइक्लोफेनिक फ्री जोन घोषित किए जाने के बाद गिद्धों को जीवनदान मिला।
 

मुख्य वन संरक्षक ने यह कहा

मुख्य वन संरक्षक व फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व संजय पाठक का कहना है कि भीरा रेंज की पल्हनापुर बीट जंगल से सटे इलाके में व्हाइट बिल्ड बल्चर का झुंड दिखाई दिया है। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शुभ संकेत है। इनके संरक्षण के लिए वन विभाग लगातार प्रयत्ननशील है।

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