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Lakhimpur Kheri News: रोज हो रहे अग्निकांड, आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं
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मितौली थाना पर खड़ी वाटर मिस्ट की गाड़ी-संवाद
लखीमपुर खीरी। पारा चढ़ने के साथ ही तेज हवा चलने से आग की घटनाएं बढ़ गईं हैं। रोज ही कहीं आग से झोंपड़ियां जल रही हैं तो कहीं गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ रही है। अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर सहायता के लिए पहुंच भी रहे हैं लेकिन पर्याप्त इंतजाम न होने की वजह से लोगों का नुकसान होने से नहीं बचा पा रहे हैं। ज्यादातर मामलों में सब कुछ राख होने के बाद ही आग बुझ पा रही है।
जिले की 45 लाख की आबादी वाले जिले में अग्निशमन विभाग में स्टाफ के साथ ही संसाधनों की भारी कमी है। लगभग रोज कहीं न कहीं से आग लगने की घटनाएं हो रही हैं। विभाग में कई अहम पद रिक्त हैं। अग्निशमन विभाग ने गर्मी के सीजन में आग की घटनाएं रोकने के लिए क्या इंतजाम किए हैं, इनकी पड़ताल कराई गई तो पता चला कि आधे-अधूरे इंतजामों से ही आग पर काबू पाने की कवायद की जा रही है।
पलिया स्थित अग्निशमन केंद्र स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। यहां दमकल की दो गाड़ियां हैं, जबकि कर्मचारी सिर्फ सात हैं। अग्निशमन केंद्र के प्रभारी राधेश्याम पाल ने बताया कि पलिया क्षेत्र के दूरदराज क्षेत्रों में आग लगने पर जरूरत के हिसाब से दोनों गाड़ियों का उपयोग किया जाता है। निघासन की तरफ अगर घटना होती है तो वहां से भी कभी-कभार गाड़ी पहुंच जाती है। आग बुझाने के लिए फायर सिलिंडर, पंप समेत अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध हैं।
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50 किमी के दायरे में आग बुझाते हैं गोला के आठ फायर फाइटर
गोला गोकर्णनाथ। नगर सहित क्षेत्र सहित 50 किलोमीटर के दायरे में आग बुझाने का जिम्मा गोला फायर स्टेशन के आठ फायर फाइटर पर है। इन दिनों चार फायर फाइटर चैती मेले में ड्यूटी पर लगाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सूखे जलाशय आग पर काबू पाने में बाधक बन रहे हैं। इस दशा में ट्यूबवेल और किसानों की स्प्रे मशीनों का सहयोग लेना पड़ता है। 26 के सापेक्ष महज आठ फायर फाइटर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अग्निकांड की घटनाएं होती हैं, ऐसे में ब्लॉक स्तर पर वॉलिंटियर तैयार किए जा रहे हैं। प्रधानों और जागरूक किसानों का भी सहयोग लिया जा रहा है।
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जिले की 45 लाख की आबादी वाले जिले में अग्निशमन विभाग में स्टाफ के साथ ही संसाधनों की भारी कमी है। लगभग रोज कहीं न कहीं से आग लगने की घटनाएं हो रही हैं। विभाग में कई अहम पद रिक्त हैं। अग्निशमन विभाग ने गर्मी के सीजन में आग की घटनाएं रोकने के लिए क्या इंतजाम किए हैं, इनकी पड़ताल कराई गई तो पता चला कि आधे-अधूरे इंतजामों से ही आग पर काबू पाने की कवायद की जा रही है।
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पलिया स्थित अग्निशमन केंद्र स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। यहां दमकल की दो गाड़ियां हैं, जबकि कर्मचारी सिर्फ सात हैं। अग्निशमन केंद्र के प्रभारी राधेश्याम पाल ने बताया कि पलिया क्षेत्र के दूरदराज क्षेत्रों में आग लगने पर जरूरत के हिसाब से दोनों गाड़ियों का उपयोग किया जाता है। निघासन की तरफ अगर घटना होती है तो वहां से भी कभी-कभार गाड़ी पहुंच जाती है। आग बुझाने के लिए फायर सिलिंडर, पंप समेत अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध हैं।
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50 किमी के दायरे में आग बुझाते हैं गोला के आठ फायर फाइटर
गोला गोकर्णनाथ। नगर सहित क्षेत्र सहित 50 किलोमीटर के दायरे में आग बुझाने का जिम्मा गोला फायर स्टेशन के आठ फायर फाइटर पर है। इन दिनों चार फायर फाइटर चैती मेले में ड्यूटी पर लगाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सूखे जलाशय आग पर काबू पाने में बाधक बन रहे हैं। इस दशा में ट्यूबवेल और किसानों की स्प्रे मशीनों का सहयोग लेना पड़ता है। 26 के सापेक्ष महज आठ फायर फाइटर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अग्निकांड की घटनाएं होती हैं, ऐसे में ब्लॉक स्तर पर वॉलिंटियर तैयार किए जा रहे हैं। प्रधानों और जागरूक किसानों का भी सहयोग लिया जा रहा है।